Shivling Puja: सनातन धर्म में शिव के निरंकार रूप शिवलिंग की पूजा का काफी महत्व है। ऐसी मान्यता है कि शिव के भीतर ही सभी धार्मिक शक्तियां व देवता समाहित हैं। हिंदू धर्म में हर भगवान की पूजा का अलग- अलग विधान है। शास्त्रों में शिवलिंग की पूजा के लिए कुछ विशेष विधियां बताई गई है। ऐसा माना जाता है कि इन विधियों से शिवलिंग की पूजा करने से साधक शुभ फल की प्राप्ति होती है। ।साकार में निराकार व निराकार में साकार का दर्शन भगवान शिव में ही होता है। शिवलिंग की पूजा बहुत ही सरल,सहज व समर्पण भाव से करना चाहिए। आइए जानते हैं शिवलिंग की पूजा के समय किना बातों का ध्यान रखना चाहिए।
शिवलिंग की पूजा के समय रखें इन बातों का ध्यान
- पूजा घर में नर्मदेश्वर का शिवलिंग पूजा घर में रखें । पूजा घर ईशान दिशा में हो व उसके ईशान दिशा में शिवलिंग रखिए। ईशान मतलब उत्तर पूर्व दिशा होती है।
- अपने घर से जल लेना सीखें। यदि शिव मंदिर किसी पवित्र नदी के तट पर है तो वहां का जल भगवान को अर्पित करें।।
- यदि घर में शिवलिंग स्थापित करना है तो पारद का शिवलिंग घर के पूजा घर में रखकर नीचे अर्घा बनाकर प्रतिदिन भगवान का जलाभिषेक करें।
- शिवलिंग पर पहले सादा जल अर्पित करें।उसमें फूल इत्यादि मत मिलाएं। जल बहुत धीरे धीरे गिराएं व ॐ नमः शिवाय का महामंत्र पढ़ते रहें। दही,दूध व शहद भी भगवान को अर्पित करें।
- यदि आप व्याधि से पीड़ित हैं तो कुश व गंगाजल जिसे कुशोदक कहते हैं,उसी शिवलिंग पर शिववास के दिन भगवान का रुद्राभिषेक कराएं।
- शिव मंदिर में शिव परिवार अवश्य रखें। इससे परिवार में धन,ऐश्वर्य व शांति आती है।
- यदि मोक्ष व शिवधाम चाहिए तो पवित्र नदियों के जल से भगवान का रुद्राभिषेक करें व हर पल श्वांस में ॐ नमः शिवाय महामंत्र का जप करते रहें।
- अपने घर में एक पात्र रखें जिसमें कई नदियों का विशेषकर गंगा,जमुना,नर्मदा,गोमती इत्यादि पवित्र नदियों का जल मिलाकर रखें व उनको नित्य शिवलिंग पर चढ़ाएं।
