अध्यात्म

Sawan Somwar Vrat Aarti In Hindi: ओम जय शिव ओंकारा...सावन सोमवार व्रत कथा के बाद जरूर पढ़ें शिव जी की आरती

ShivJi Ki Aarti (शिव जी की आरती): भगवान शिव का प्रिय महीना सावन शुरू हो गया है। इस महीने में सनातन धर्म के लोग शिव जी की विधि विधान पूजा करते हैं। लेकिन शिव की पूजा एक चीज के बिना अधूरी मानी जाती है। वो चीज है शिव की आरती। यहां आप देखेंगे भगवान शिव की आरती के लिरिक्स संपूर्ण।

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Shiv Ji Ki Aarti, Om Jai Shiv Omkara

ShivJi Ki Aarti (शिव आरती): सावन महीने में भगवान शिव की आरती करने का विशेष महत्व माना गया है। खासकर सावन सोमवार के दिन तो जरूर ही सुबह-शाम भोलेनाथ की आरती जरूर करनी चाहिए। कहते हैं जो भक्त सच्चे मन से ओम जय शिव ओंकारा आरती करता है उसकी सारी मुराद पूरी हो जाती है। ये आरती मन को शांत करती है और आत्मविश्वास में बढ़ोतरी करती है। यहां आप देखेंगे शिव आरती के संपूर्ण लिरिक्स।

Shivji Ki Aarti Photo (शिव जी की आरती लिरिक्स)

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Sawan Somwar Vrat Katha Aarti (ओम जय शिव ओंकारा)

ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।

ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा ॥

ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा॥

एकानन चतुरानन, पंचानन राजे ।

हंसासन गरूड़ासन, वृषवाहन साजे ॥

ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा॥

दो भुज चार चतुर्भुज, दसभुज अति सोहे ।

त्रिगुण रूप निरखते, त्रिभुवन जन मोहे ॥

ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा॥

अक्षमाला वनमाला, मुण्डमाला धारी ।

चंदन मृगमद सोहै, भाले शशिधारी ॥

ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा॥

श्वेताम्बर पीताम्बर, बाघम्बर अंगे ।

सनकादिक गरुणादिक, भूतादिक संगे ॥

ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा॥

कर के मध्य कमंडल, चक्र त्रिशूलधारी ।

सुखकारी दुखहारी, जगपालन कारी ॥

ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा॥

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, जानत अविवेका ।

प्रणवाक्षर में शोभित, ये तीनों एका ॥

ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा॥

त्रिगुणस्वामी जी की आरती, जो कोइ नर गावे ।

कहत शिवानंद स्वामी, सुख संपति पावे ॥

ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा॥

लक्ष्मी व सावित्री, पार्वती संगा ।

पार्वती अर्द्धांगी, शिवलहरी गंगा ॥

ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा॥

पर्वत सोहैं पार्वती, शंकर कैलासा ।

भांग धतूर का भोजन, भस्मी में वासा ॥

ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा॥

जटा में गंग बहत है, गल मुण्डन माला ।

शेष नाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला ॥

ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा॥

काशी में विराजे विश्वनाथ, नंदी ब्रह्मचारी ।

नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी ॥

ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा॥

ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।

ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा ॥

शिव आरती की विधि (Shiv Aarti Ki Vidhi)

भगवान शिव की आरती करने से पहले महादेव की प्रतिमा के सामने घी का दीपक जला लें। इसके बाद पूरे परिवार के साथ विधि विधान इस आरती को गाएं। आरती के बाद सभी लोगों में प्रसाद बांट दें।

Laveena Sharma
लवीना शर्मा author

धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर की रहने वाली हूं। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट हूं। 10 साल से मीडिया में काम कर रही हूं। पत्रकारिता में करि... और देखें

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