अध्यात्म

Sheetala Mata Mandir: कहां स्थित है शीतला माता मंदिर, जानिए खुलने की टाइमिंग और इसकी कहानी

Sheetala Mata Mandir Gurugram: गुरुग्राम में शीतला माता का विशाल मंदिर स्थित है। यह मंदिर करीब पांच सौ साल पुराना है। माता शीतला के इस मंदिर को महाभारत काल से जोड़कर देखा जा सकता है। ऐसे में आइए जानते हैं इस मंदिर के इतिहास के बारे में।

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Sheetala Saptami 2024

Sheetala Mata Mandir Gurgaon: शीतला सप्तमी को हिंदू धर्म में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन शीतला माता की पूजा करने की परंपरा है। चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी और अष्टमी तिथि शीतला माता की पूजा के लिए समर्पित है। शीतला सप्तमी को बशोड़ा के नाम से भी जाना जाता है। 2024 में शीतला सप्तमी 1 अप्रैल कोो और उसके अगले शीतला अष्टमी का पर्व मनाया जाएगा। वैसे तो यहां कई शीतला माता मंदिर हैं, लेकिन गुरुग्राम में शीतला माता मंदिर शहर की एक विशेष पहचान दर्शाता है और सबसे खास माना जाता है क्योंकि यह मंदिर महाभारत से जुड़ा हुआ है। शीतला सप्तमी और शीतला अष्टमी के अवसर पर यहां शीतला माता की पूजा की जाती है। बासौड़ा के मौके पर आइए जानते हैं इस मंदिर की खासियत के बारे में।

Sheetala Mata Mandir Open Time (शीतला मंदिर के खुलने का समय)

शीतला माता मंदिर गुड़गांव सुबह 6 बजे से रात 8 बजे तक खुला रहता है। शीतला माता मंदिर में बसौड़ा के दिन पूरे विधि- विधान के साथ उनकी पूजा की जाती है।

शीतला माता मंदिर इतिहास (Sheetla Mata Mandir History)

इस विश्व प्रसिद्ध शीतला माता मंदिर का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। ऐसा माना जाता है कि आचार्य द्रोणाचार्य ने कौरवों और पांडवों को यहीं शिक्षा दी थी। यहां साल भर आस्थावानों का जमावड़ा रहता है। स्कंद पुराण की कथा के अनुसार, ऋषिति के निर्माता भगवान ब्रह्मा ने सितारा माता को ब्रह्मांड के स्वास्थ्य को बनाए रखने की जिम्मेदारी सौंपी थी। माना जाता है कि शीतला माता की उचित पूजा से खसरा, चेचक और नेत्र रोगों से राहत मिलती है।

मनोकामना होती है पूरी

गुरुग्राम के शीतला माता मंदिर को कई समुदाय के लोग कुलदेवी मानते हैं। यहां न केवल स्थानीय बल्कि दूर-दूर से भी लोग देवी के दर्शन का आनंद लेने आते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस मंदिर के मुख्य द्वार पर एक बरगद का पेड़ लगा हुआ था। मान्यता है कि भक्त अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए पेड़ पर चुन्नी या मौली बांधते हैं, उस पर ठंडा जल चढ़ाते हैं और मन्नत मांगते हैं।
TNN Spirituality Desk
TNN अध्यात्म डेस्क author

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