Sheetala Ashtami Puja Vidhi (शीतला माता की पूजा कैसे करें): शीतला अष्टमी का त्योहार इस साल 22 मार्च 2025, शनिवार के दिन मनाया जाएगा। इसे बसौड़ा और शीतालष्टमी के नाम से भी जाना जाता है। इस पर्व में माता को बासी भोजन का भोग लगाने की परंपरा है। मान्यता है इस त्योहार पर चूल्हा नहीं जलाना चाहिए। इस दिन सभी को बासी भोजन का ही सेवन करना चाहिए। बता दें शीतला अष्टमी के दिन पूजा मुहूर्त सुबह 6 बजकर 23 मिनट से लेकर शाम 6 बजकर 33 मिनट तक रहेगा। चलिए जानते हैं शीतला अष्टमी की पूजा विधि क्या है।
शीतला अष्टमी पूजा सामग्री लिस्ट (Sheetala Ashtami Puja Samagri List In Hindi)
रोली, मौली, फूल, वस्त्र, एक दीपक, आम के पत्ते, जल का कलश, चावल, हल्दी, होली वाली बड़कुले की माला, सिक्के और भोग की चीजें।
शीतला अष्टमी पूजा विधि (Sheetala Ashtami Puja Vidhi In Hindi)
- शीतला अष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर ठंडे पानी से स्नान करना चाहिए। साथ ही नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिला लेना चाहिए।
- संभव हो तो इस दिन नारंगी रंग के वस्त्र पहनने चाहिए।
- इसके बाद पूजा की थाली तैयार करें। उस थाली में दही, रोटी, बाजरा, पुआ और सप्तमी को बने मीठे चावल, नमक पारे और मठरी भी रखें।
- वहीं एक दूसरी थाली में आटे से बना दीपक और उसके साथ ही रोली, अक्षत, होली वाली बड़कुले की माला, मोली, वस्त्र, सिक्के और मेहंदी रखनी चाहिए।
- साथ में थाली में ठंडे पानी का लोटा भी रखें।
- इसके बाद शुभ मुहूर्त में माता शीतला की विधि विधान पूजा करें और उन्हें बासी खाने का भोग लगाएं।
- माता की पूजा के बाद नीम के पेड़ की पूजा भी जरूर करनी चाहिए।
- इस दिन नीम के पेड़ में जल जरूर चढ़ाएं और पेड़ की 7 या 11 परिक्रमा भी करें।
- इस दिन शीतला माता के मंदिर में जाकर भी दीपक जरूर जलाना चाहिए।
- साथ ही माता को जल चढ़ाएं। फिर रोली और हल्दी का टीका लगाएं।
- इसके बाद मेहंदी, रोली और वस्त्र अर्पित करें।
- इस दिन खुद भी बासी भोजन का ही सेवन करना चाहिए।
- मात की पूजा के समय 'ऊं शीतला मात्रै नम:' मंत्र का जाप करें।
- बची हुई पूजन सामग्री को किसी गाय या ब्राह्मण को दे दें।
शीता माता पूजा मंत्र (Sheetala Mata Puja Mantra)
-ऊं शीतलां शान्ति रूपिणीं तुष्टां सर्व सुख प्रदाम्।
शरण्यां सर्व पापघ्नीं नित्या पूज्यां दयामयीं।
-ऊं शीतलायै नमः
-ऊं श्रीं शीतलायै नमः
-ऊं अष्टदल पत्रयुक्ता शीतला पतये नमः
-ऊं शीतलां शान्तिदात्रीं शरणं भगवतीं हुम्।
शीतला अष्टमी का भोग (Sheetala Ashtami Bhog)
शीतला अष्टमी के भोग को एक रात पहले ही पका लिया जाता है। इसभोग में दही, पुए, नमक पारे, रोटी, दही चावल, मीठे चावल, शक्कर की रोटी, बाजरा, फीकी पूड़ी और पकौड़ियां रखी जाती हैं।
शीतला अष्टमी का महत्व (Sheetala Ashtami Ka Mahatva)
हिंदू धर्म में माता शीतला को संक्रामक रोगों और बीमारियों से सुरक्षा देने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है। कहते हैं शीतला अष्टमी के दिन माता शीतला की पूजा करने से गर्मियों में होने वाले रोगों से छुटकारा मिलता है। स्कंद पुराण में माता शीतला का वाहन गर्दभ बताया गया है। वे अपने हाथों में कलश, सूप, मार्जन तथा नीम के पत्ते धारण करती हैं।
