अध्यात्म

Navratri Day 1: कल शारदीय नवरात्रि का पहला दिन कौन सी देवी का है? जानें कैसे करें पहले दिन की पूजा

Navratri First Day Devi Name, Navratri Ka Pehla Din Kiska Hota Hai: शारदीय नवरात्रि का पहला दिन बहुत खास माना जाता है क्योंकि यह देवी उपासना के नौ दिवसीय पर्व की शुरुआत है। इसी दिन घटस्थापना भी होती है। यहां से आप जानें कि नवरात्रि के पहले दिन देवी मां के कौन से स्वरूप की पूजा की जाती है।

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नवरात्रि के पहले दिन कौन से देवी की पूजा होती है? (pic credit: canva)

Navratri First Day Devi Name: नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना के बाद मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की शुरुआत हो जाती है। तो अगर आपको नहीं पता है कि नवरात्रि के पहले दिन कौन सी देवी मां की पूजा-अराधना की जाती है, तो ये आप यहां से जान सकते हैं। साथ ही यहां नवरात्रि के पहले दिन की पूजा की पूरी विधि, मंत्र और आरती भी दी गई है। यानी की यहां मां शैलपुत्री की पूजा विधि, मंत्र और आरती मौजूद है।

नवरात्रि के पहले दिन कौन से देवी की पूजा होती है?

नवरात्रि के पहले दिन माता दुर्गा के प्रथम स्वरुप मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। माता शैलपुत्री पर्वत राज हिमालय की पुत्री मानी जाती हैं। मां शैलपुत्री का वाहन बैल यानि की वृषभ है। इनके एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे हाथ में कमल का फूल है। माता को करुणा और स्नेह का प्रतीक माना गया है।

माता शैलपुत्री की पूजा विधि

नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा से पहले कलश स्थापित किया जाता है। इसके बाद माता शैलपुत्री की विधि पूर्वक पूजा की जाती है। माता की पूजा के लिए सुबह सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान कर पीले रंग के वस्त्र धारण कर लें। इसके बाद पूजा स्थल पर लाल रंग का कपड़ा बिछाएं। फिर उसके ऊपर माता रानी की प्रतिमा या फोटो स्थापित करें। फिर माता को धुप दीप दिखाएं। इसके बाद उन्हें लाल रंग के फूल अर्पित करें। फिर माता को घी और मिठाई का भोग लगाएं। अंत में माता शैलपुत्री के मंत्र का जाप करें और उनकी आरती करें।

मां शैलपुत्री के मंत्र

ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥

वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।

वृषारुढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥

मां शैलपुत्री की कथा

माता शैलपुत्री पूर्व जन्म में राजा दक्ष की पुत्री थीं और भगवान शिव की पत्नी थीं। कहते हैं एक बार दक्ष ने अपने यहां महायज्ञ का आयोजन किया था, जिसमें उन्होंने अपनी पुत्री के पति भगवान शिव को छोड़कर सभी देवताओं को आमंत्रित किया था। पिता के न बुलाने के बाद भी माता शैलपुत्री भगवान शिव की आज्ञा पाकर उस महायज्ञ में गईं। लेकिन जब माता वहां पहुंची तो अपने पिता के मुख से अपने पति के प्रति तिरस्कार का भाव देखकर उन्हें बेहद दुख हुआ। जिसके बाद उन्होंने खुद को योगाग्नि द्वारा भस्म कर लिया। कहते हैं फिर अगले जन्म में माता ने शैलराज हिमालय के राजा हिमावत के घर में जन्म लिया। तब उनका नाम शैलपुत्री पड़ा।

मां शैलपुत्री की आरती

शैलपुत्री मां बैल पर सवार।

करें देवता जय जयकार।

शिव शंकर की प्रिय भवानी।

तेरी महिमा किसी ने ना जानी।

पार्वती तू उमा कहलावे।

जो तुझे सिमरे सो सुख पावे।

ऋद्धि-सिद्धि परवान करे तू।

दया करे धनवान करे तू।

सोमवार को शिव संग प्यारी।

आरती तेरी जिसने उतारी।

उसकी सगरी आस पुजा दो।

सगरे दुख तकलीफ मिला दो।

घी का सुंदर दीप जला के।

गोला गरी का भोग लगा के।

श्रद्धा भाव से मंत्र गाएं।

प्रेम सहित फिर शीश झुकाएं।

जय गिरिराज किशोरी अंबे।

शिव मुख चंद्र चकोरी अंबे।

मनोकामना पूर्ण कर दो।

भक्त सदा सुख संपत्ति भर दो।

जय मां शैलपुत्री की, जय माता दी||

Srishti
सृष्टि author

सृष्टि टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की फीचर डेस्क से जुड़ी कंटेंट राइटर हैं, जो मुख्य रूप से धर्म और लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिखती हैं। सृष्टि को आध्यात्... और देखें

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