साढ़ेसाती और ढैय्या से परेशान लोग साल 2026 में कर लें ये उपाय, शनिदेव खुद दूर करेंगे समस्याएं
- Authored by: Mohit Tiwari
- Updated Dec 28, 2025, 07:17 PM IST
Astrological Remedies for shani sade sati and dhaiya: शनिदेव को कर्मफलदाता माना जाता है। वे साढ़ेसाती और ढैय्या के माध्यम से व्यक्ति को उसके कर्मों का फल प्रदान करते हैं। इसी कारण जब भी व्यक्ति पर शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या होती है तो उसको कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में अगर कुछ आसान से उपायों को अपनाया जाए तो शनिदेव द्वारा मिलने वाले कष्टों से बचा जा सकता है। आइए जानते हैं कि कौन से उपायों को अपनाकर साढ़ेसाती और ढैय्या से बचा जा सकता है।
साढ़ेसाती से मुक्ति के लिए करें ये उपाय
Astrological Remedies for shani sade sati and dhaiya: सनातन धर्म में शनिदेव को कर्मफल दाता और न्याय के देवता के रूप में पूजा जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शनि ग्रह सभी नौ ग्रहों में सबसे धीमी गति से चलता है और एक राशि में लगभग साढ़े दो साल तक रहता है। इसी कारण शनि की साढ़ेसाती (7.5 साल) और ढैय्या (2.5 साल) का प्रभाव लोगों पर पड़ता है, जिससे जीवन में चुनौतियां, स्वास्थ्य समस्याएं, आर्थिक तंगी या मानसिक तनाव का सामना करना पड़ता है।
नए साल 2026 में शनि पूरे वर्ष मीन राशि में विराजमान रहेंगे, जो कुछ राशियों पर अशुभ प्रभाव डालेंगे। यदि आप इन प्रभावों से परेशान हैं या बचना चाहते हैं, तो कुछ सरल आध्यात्मिक उपाय अपनाकर शनिदेव को प्रसन्न कर सकते हैं। ये उपाय श्रद्धा और नियमितता से किए जाएं, तो निश्चित रूप से राहत मिलेगी। आइए जानते हैं 2026 में किन राशियों पर प्रभाव पड़ेगा और क्या उपाय अपनाएं।
2026 में शनि की स्थिति और प्रभावित राशियां
वैदिक ज्योतिष के अनुसार, शनि 2025 में 29 मार्च को मीन राशि में प्रवेश कर चुके हैं और 2026 में भी पूरे साल यहीं रहेंगे। इस स्थिति में साढ़ेसाती का प्रभाव कुंभ राशि पर तीसरा चरण, मीन राशि पर दूसरा चरण और मेष राशि पर पहला चरण रहेगा। वहीं, सिंह राशि पर कंटक ढैय्या और धनु राशि चतुर्थ ढैय्या पड़ेगा। इन राशियों के लोग स्वास्थ्य, करियर, धन या पारिवारिक समस्याओं का सामना कर सकते हैं। आइए जानते हैं कि इससे बचने के लिए क्या उपाय किए जा सकते हैं।
शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए करें ये उपाय
शनिदेव दान-पुण्य से बहुत जल्दी प्रसन्न होते हैं। यदि साढ़ेसाती या ढैय्या के प्रभाव में हैं, तो प्रत्येक शनिवार को काले तिल, आटा और शक्कर को मिलाकर एक मिश्रण बनाएं और इसे काली चींटियों को खिलाएं। यह उपाय नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है और शनिदेव की कृपा प्राप्त करने में मदद करता है। इसके अलावा, अपने सामर्थ्य के अनुसार काले तिल, काला कपड़ा, कंबल या उड़द की दाल का दान जरूरतमंदों को करें।
हनुमान जी की आराधना
हनुमान जी की पूजा शनि की बाधाओं से बचाने में अत्यंत प्रभावी मानी जाती है, क्योंकि हनुमान जी शनिदेव के गुरु हैं। प्रत्येक शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ करें और बंदरों को गुड़-चना खिलाएं। इससे हनुमान जी प्रसन्न होते हैं और शनिदेव का प्रकोप कम होता है। यदि संभव हो, तो हनुमान मंदिर जाकर दीपक जलाएं और अपनी समस्याओं की निवेदन करें। यह उपाय विशेष रूप से उन लोगों के लिए फायदेमंद है जो साढ़ेसाती के कारण मानसिक तनाव या स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं।
शनि मंत्र का करें जाप
शनिदेव की पूजा में मंत्र जाप का विशेष महत्व है। प्रत्येक शनिवार को ‘ॐ शं शनैश्चराय नमः’ मंत्र का रुद्राक्ष की माला से कम से कम 108 बार जाप करें। पूजा के दौरान शनिदेव को नीले रंग के फूल अर्पित करें। इसके अलावा, शनिदेव के 10 नामों का जाप भी 108 बार करें। यह जाप मन को शांत करता है और शनि दोष से मुक्ति दिलाता है।
दैनिक जीवन में अपनाएं ये उपाय
रोजमर्रा के जीवन में कुछ आसान टोटके शनि के प्रभाव को कम कर सकते हैं। प्रातःकाल उठकर स्नान के बाद पीपल के पेड़ को जल अर्पित करें और सात परिक्रमा करें।
- सूर्यास्त के बाद सुनसान जगह पर पीपल के नीचे दीपक जलाएं, या मंदिर में ऐसा करें।
- एक कटोरी में तेल लें, उसमें अपना चेहरा देखें और फिर उस तेल को किसी जरूरतमंद को दान दें। यह उपाय शनिदेव को प्रसन्न करता है।
- शनिवार को तेल से बने भोजन को किसी जरूरतमंद या विकलांग को खिलाएं।
- शनि बाधा से मुक्ति के लिए काले घोड़े की नाल या नाव की कील से बनी अंगूठी को शनिवार सूर्यास्त के समय मध्यमा उंगली में धारण करें।