Shani Pradosh Vrat Katha 2024: हर महीने की त्रयोदशी तिथि के दिन प्रदोष का व्रत रखा जाता है। जो भी त्रयोदशी तिथि शनिवार को पड़ती है। उसको शनि प्रदोष व्रत के नाम से जाना जाता है। आज यानि 28 दिसंबर 2024 को साल 2024 का आखिरी प्रदोष व्रत रखा जा रहा है। शनि प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव और शनि देव दोनों की उपासना की जाती है। ऐसा माना जाता है कि शनि प्रदोष का व्रत रखने से साधक को शनि दोष से मु्क्ति मिलती है और भगवान भोलेनाथ के आशीर्वाद से संतान सुख की प्राप्ति होती है। परिवार के सुख, समृद्धि के लिए भी ये व्रत करना लाभकारी होता है। शनि प्रदोष व्रत के दिन इसकी कथा का पाठ करने से भगवान भोलेनाथ की कृपा बरसती है। आइए यहां पढ़ें शनि प्रदोष व्रत की कथा।
Shani Pradosh Vrat Katha 2024 In Hindi (शनि प्रदोष व्रत कथा)
पौराणिक कथा के अनुसार के प्राचीन नगर में एक सेठ जी रहा करते थे। उनके पास हर चीज की सुख-सुविधा थी, लेकिन उनकी कोई संतान नहीं थी। संतान ना होने के कारण सेठ और सेठानी बहुत ही उदास रहते थे। बहुत सोच- विचार करने के बाद सेठ जी ने अपना काम नौकर को सौंप दिया और सेठानी के साथ तीर्थ यात्रा पर निकल गए। अपने नगर के बाहर जाते ही उन्हें एक साधु मिले। जो अपनी साधना में ध्यानमग्न बैठे थे। सेठजी ने सोच की क्यों ना इन साधु बाबा से आशीर्वाद प्राप्त करके ही तीर्थ यात्रा पर निकला जाए। सेठ और सेठानी दोनों ही साधु के पास पहुंचे। साधु ने जब अपनी साधना से आंखें खोली तो देखा कि सेठ और सेठानी कब से उनके आशीर्वाद के इंतजार में बैंठे हैं।
साधु बाबा ने सेठ और सेठानी से कहा कि मैं तुम लोगों का दुख जानता हूं। तुम इस दुख से निकलने के लिए शनि प्रदोष का व्रत। इस व्रत को करने से तुमको जरूर ही संतान सुख की प्राप्ति होती है। साधु ने सेठ और सेठानी को पूरी शनि प्रदोष व्रत की विधि बताई। इसके साथ ही शिव जी के ये वंदना बताई।
हे नीलकंठ सुर नमस्कार ।
शशि मौलि चन्द्र सुख नमस्कार ॥
हे उमाकांत सुधि नमस्कार ।
विश्वेश्वर प्रभु शिव नमस्कार ॥
हे रुद्रदेव शिव नमस्कार ।
शिवशंकर जगगुरु नमस्कार ॥
उग्रत्व रूप मन नमस्कार ॥
ईशान ईश प्रभु नमस्कार ।
दोनों सेठ और सेठानी साधु बाबा से आशीर्वाद लेकर तीर्थयात्रा पर चले गए। वहां से लौटने के बाद सेठ और सेठानी ने मिलकर शनि प्रदोष व्रत किया और पूरे विधि- विधान के साथ शिव जी की पूजा की। शनि प्रदोष व्रत के प्रभाव से सेठ और सेठानी को पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई और उनका जीवन खुशियों से भर गया।
