Shani Puja Rules: शनिदेव भगवान सूर्य देव और माता छाया के पुत्र हैं। वे यमराज और देवी यमुना के भाई हैं। शनिवार का दिन शनिदेव को समर्पित है। माना जाता है कि शनिदेव की पूजा करने से शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या से राहत मिलती है। दरअसरल शनि न्यायाधीश हैं। वे व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल देते हैं।
अगर किसी व्यक्ति के कर्म खराब हैं तो शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या और महादशा में उसको कष्टों का सामना करना पड़ता है। शनि के कष्टों से छुटकारा पाने के लिए लोग कई उपायों को अपनाते हैं। ऐसे में वे कई बार अनजाने में कुछ ऐसे कार्य कर देते हैं, जिससे उन्हें शुभ की जगह अशुभ फल मिलने लगता है। आपके काम बनने की जगह बिगड़ने लगते हैं। आइए जानते हैं कि शनि की पूजा में कौन सी गलतियां नहीं करनी चाहिए?
शनिदेव की पूजा में न करें ये गलतियां
- शनिदेव की पूजा में कभी भी तांबे के बर्तन का प्रयोग नहीं करना चाहिए। चाहें उनकी आरती उतारनी हो या उनको कुछ अर्पित करना हो, दोनों के लिए लोहे के पात्र का ही प्रयोग करें। दरअसल तांबा सूर्य की धातु है। सूर्य भले ही शनिदेव के पिता है, लेकिन दोनों में परस्पर शत्रुता है। इस कारण शनिदेव की पूजा में तांबे का प्रयोग वर्जित है।
- शनिदेव को कभी भी लाल फूल अर्पित नहीं करना चाहिए। लाल रंग मंगल का प्रतीक है। मंगल और शनि की आपस में शत्रु हैं। ऐसे ही उनको पीले फूल अर्पित नहीं करने चाहिए। शनिदेव की पूजा में परिजात के फूल का ही प्रयोग करें।
- शनिदेव को पीली दाल कभी भी अर्पित नहीं करनी चाहिए। उनको सिर्फ काली उड़द की दाल ही अर्पित करनी चाहिए। माना जाता है कि ऐसा करने से शनि के प्रकोप से बचा जा सकता है।
- शनिदेव को दूध की सफेद बर्फी या पीली और लाल मिठाई अर्पित नहीं करनी चाहिए। उनका गुड़ और काले तिल के लड्डू, काले अंगूर, गुलाब जामुन और मीठी पूड़ी अर्पित करनी चाहिए।
- शनिदेव की पूजा में पीले और लाल कपड़ों का प्रयोग नहीं करना चाहिए। शनिदेव की पूजा में सिर्फ काले कपड़ों का ही प्रयोग करना चाहिए।
