Shab-e-Qadr ki Namaz Padhne ka Tarika, (शब ए क़द्र की नमाज़ कैसे पढ़ें) : रमजान का पाक महीना अब अपने आखिरी अशरे में पहुंच चुका है। इस आखिरी अशरे की रातों को इस्लाम में बहुत खास माना जाता है, क्योंकि इन्हीं में वह मुबारक रात आती है जिसे शब-ए-कद्र कहा जाता है। पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हदीस में कहा कि शब-ए-कद्र को आखिरी 10 दिनों की विषम रातों (21, 23, 25, 27, 29) में तलाश की जाए।
इस रात को लैलतुल कद्र या नाइट ऑफ पावर भी कहा जाता है। इस्लामी मान्यता के अनुसार इस रात की इबादत हजार महीनों की इबादत से भी बेहतर मानी जाती है। माना जाता है कि इसी मुकद्दस रात में अल्लाह तआला ने अपने आखिरी पैगंबर हजरत मुहम्मद मुस्तुफा (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) पर कुरआन शरीफ की पहली वह्य नाजिल की थी। इसलिए मुसलमान इस रात को नमाज, कुरान की तिलावत और इबादत में बिताने की कोशिश करते हैं।
अधिकतर रमजान की 27वीं रात को शब-ए-कद्र माना जाता है। साल 2026 में आज यानी 16 मार्च को 27वीं रात है। इस कारण आज के दिन शब-ए-कद्र मानी जा रही है। इस रात अल्लाह की इबादत का सवाब हजारों महीनों से भी ज्यादा मिलता है। इस रात को नमाज जरूर अदा करनी चाहिए। आइए जानते हैं कि इस रात को नमाज अदा करने का क्या तरीका है।
क्या होती है शब-ए-कद्र की नमाज (Kya Hoti Hai shab-e-Qadr Ki Namaz)
शब-ए-कद्र की रात में खास तौर पर नफ्ल नमाज पढ़ी जाती है। यह नमाज सामान्य नमाज की तरह ही होती है, लेकिन इसे ज्यादा से ज्यादा पढ़ने की कोशिश की जाती है। इस रात लोग अपनी क्षमता के अनुसार 2, 4, 8, 12 या 20 रकात तक नफ्ल नमाज अदा करते हैं। इस नमाज का मकसद अल्लाह की इबादत करना और उससे रहमत व बरकत की दुआ मांगना होता है।
नफ्ल नमाज पढ़ने का तरीका (Nafal ki Namaz Padhne Ka Tareeka)
शब-ए-कद्र की रात में नफ्ल नमाज दो-दो रकात करके पढ़ी जाती है। नमाज शुरू करने से पहले दिल में नियत की जाती है कि मैं अल्लाह की रजा के लिए नफ्ल नमाज पढ़ रहा हूं। इसके बाद नमाज उसी तरीके से पढ़ी जाती है जैसे आम नमाज पढ़ी जाती है।
नमाज की पहली रकात में सबसे पहले सना पढ़ी जाती है। इसके बाद सूरह अल-फातिहा पढ़ी जाती है और फिर कोई दूसरी सूरह पढ़ी जाती है। कई लोग इस रात सूरह अल-कद्र पढ़ते हैं क्योंकि इसमें इस रात की फजीलत का जिक्र मिलता है। इसके बाद रुकू और सजदा किया जाता है।
दूसरी रकात में फिर से सूरह फातिहा पढ़ी जाती है और उसके बाद कोई दूसरी सूरह पढ़ी जाती है। इसके बाद रुकू और सजदा किया जाता है। नमाज के आखिर में बैठकर अत्तहियात, दुरूद और अन्य दुआएं पढ़ने के बाद सलाम फेरकर नमाज पूरी की जाती है।
कितनी रकात नमाज पढ़ सकते हैं
शब-ए-कद्र की रात में नफ्ल नमाज की कोई निश्चित संख्या तय नहीं की गई है। हर व्यक्ति अपनी क्षमता और समय के अनुसार नमाज पढ़ सकता है। आमतौर पर लोग दो-दो रकात करके कई बार नमाज अदा करते हैं। कुछ लोग 4 या 8 रकात पढ़ते हैं, जबकि कई लोग ज्यादा समय तक इबादत करते हुए 12 या 20 रकात तक भी नफ्ल नमाज पढ़ते हैं।
इस रात में पढ़ी जाती हैं दूसरी भी नमाजें
शब-ए-कद्र की रात में नफ्ल नमाज के अलावा कुछ लोग तहज्जुद की नमाज भी अदा करते हैं। इसके साथ ही कुरान शरीफ की तिलावत करना भी बहुत सवाब का काम माना जाता है। मुसलमान इस रात को इबादत में गुजारने की कोशिश करते हैं ताकि अल्लाह की रहमत और बरकत हासिल हो सके। इस तरह शब-ए-कद्र की रात में नफ्ल नमाज पढ़ना, कुरान की तिलावत करना और ज्यादा से ज्यादा इबादत करना बहुत अहम माना जाता है। यही वजह है कि मुसलमान इस मुकद्दस रात को पूरी श्रद्धा और इबादत के साथ बिताने की कोशिश करते हैं।
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