अध्यात्म

Sawan Kalashtami Vrat 2025: आज है कालाष्टमी व्रत, यहां देखें पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र और आरती

Sawan Kalashtami Vrat Puja Muhurat, Vidhi, Mantra, Aarti: श्रावण मास में कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान काल भैरव की विशेष पूजा की जाती है। आज कालाष्टमी है। जो लोग तंत्र विद्या का अध्ययन करते हैं वो कालाष्टमी की रात को अनुष्ठान करते हैं। यहां से आप कालाष्टमी की पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजा की विधि, मंत्र और आरती जान सकते हैं।

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कालाष्टमी पूजा शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र और आरती (Photo Source: iStock)

Sawan Kalashtami Vrat 2025 Puja Muhurat, Vidhi, Mantra, Aarti: आजकालाष्टमी है। आज के दिन काल भैरव देव की पूजा रात्रि में की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि काल भैरव देव की पूजा करने से साधक को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। साथ ही जीवन में व्याप्त सभी प्रकार की चिंताएं, रोग, दुख, पीड़ाएं और शारीरिक और मानसिक परेशानियां दूर हो जाती हैं। यहां से आप आज की पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजा की संपूर्ण विधि, काल भैरव के मंत्र और आरती के लिरिक्स देख सकते हैं।

कालाष्टमी पूजा शुभ मुहूर्त-

सावन महीने की कालाष्टमी आज, 17 जुलाई को मनाई जा रही है। कालाष्टमी की तिथि का प्रारंभ 17 जुलाई को शाम 07:08 बजे से होगा और इसका समापन 18 जुलाई, शुक्रवार को शाम 5:01 बजे होगा।

कालाष्टमी पूजा विधि-

कालाष्टमी का दिन ब्रह्म बेला में उठकर काल भैरव दैव को प्रणाम किया जाता है। इसके बाद मैं घर की सफाई की जाती है। अपने दैनिक कार्यों को पूरा करने के बाद गंगा जल से स्नान करें। उसके बाद साफ कपड़े पहनकर सूर्य देवता को जल अर्पित करें। पंचोपचार करने के बाद पंचामृत, दूध, दही, बिल्व पत्र, धतूरे, फल, फूल, धूप आदि से काल भैरव देव की पूजा करें। इस समय भैरव कवच का पाठ करें और मंत्र का जाप करें। पूजा के अंत में आरती करें और सुख-समृद्धि और धन-संपदा की प्रार्थना करें। रात में स्नान-ध्यान के बाद विधि- विधान से रात्रि पूजा करें। उसके बाद रात के समय भजन करें।

कालाष्टमी पूजा मंत्र-

शिवपुराण में कालभैरव की पूजा के दौरान इन मंत्रों का जप करना बेहद फलदायी माना गया है।

अतिक्रूर महाकाय कल्पान्त दहनोपम्,

भैरव नमस्तुभ्यं अनुज्ञा दातुमर्हसि!!

अन्य मंत्र-

ओम भयहरणं च भैरव:।

ओम कालभैरवाय नम:।

ओम ह्रीं बं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरूकुरू बटुकाय ह्रीं।

ओम भ्रं कालभैरवाय फट्।

कालाष्टमी पूजा आरती-

जय भैरव देवा, प्रभु जय भैंरव देवा।

जय काली और गौरा देवी कृत सेवा।।

तुम्हीं पाप उद्धारक दुख सिंधु तारक।

भक्तों के सुख कारक भीषण वपु धारक।।

वाहन शवन विराजत कर त्रिशूल धारी।

महिमा अमिट तुम्हारी जय जय भयकारी।।

तुम बिन देवा सेवा सफल नहीं होंवे।

चौमुख दीपक दर्शन दुख सगरे खोंवे।।

तेल चटकि दधि मिश्रित भाषावलि तेरी।

कृपा करिए भैरव करिए नहीं देरी।।

पांव घुंघरू बाजत अरु डमरू डमकावत।।

बटुकनाथ बन बालक जन मन हर्षावत।।

बटुकनाथ जी की आरती जो कोई नर गावें।

कहें धरणीधर नर मनवांछित फल पावें।।

Srishti
सृष्टिauthor

सृष्टि टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की फीचर डेस्क से जुड़ी कंटेंट राइटर हैं, जो मुख्य रूप से धर्म और लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिखती हैं। सृष्टि को आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और साहित्य में गहरी रुचि है। यही वजह है कि उनके लेखों में परंपरा, आस्था और जीवनशैली की सहज समझ खूबसूरती से दिखाई देती है। वह धार्मिक कथाओं, ग्रंथों से जुड़े विषयों, आध्यात्मिक ट्रेंड्स और समकालीन जीवनशैली पर 5,000 से अधिक लेख लिख चुकी हैं। मॉडर्न लाइफस्टाइल और पारंपरिक मूल्यों के बीच संतुलन बनाते हुए वह ऐसे कंटेंट गढ़ती हैं, जो प्रेरक होने के साथ-साथ जानकारीपूर्ण भी होता है।

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