Saraswati Puja 2023 Puja Vidhi, Muhurat: सरस्वती पूजा की स्टेप बाय स्टेप पूरी विधि, मंत्र, कथा, मुहूर्त, आरती सबकुछ यहां देखें

Saraswati Puja (Basant Panchami) 2023 Puja Vidhi, Shubh Muhurat, Time, Samagri, Mantra, Aarti in Hindi: सरस्वती पूजा का हिंदू धर्म में विशेष महत्व माना जाता है। कहते हैं जो व्यक्ति बसंत पंचमी पर मांं सरस्वती की विधि विधान पूजा करता है उसे सफलता प्राप्त होती है।

Updated Jan 26, 2023 | 01:47 PM IST

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बसंत पंचमी 2023 शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, व्रत कथा, सरस्वती वंदना और आरती यहां देखें

Saraswati Puja (Basant Panchami) 2023 Puja Vidhi, Shubh Muhurat, Time, Samagri, Mantra, Aarti: देशभर में बसंत पंचमी का त्योहार बड़े ही धूम-धाम से मनाया जाता है। इस बार ये पर्व 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस (Republic Day) के दिन पड़ा है। बसंत पंचमी को वसंत पंचमी, ज्ञान पंचमी और सरस्वती पूजा के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन मां सरस्वती की पूजा का विशेष महत्व होता है। ये त्योहार हर साल माघ शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को पड़ता है। इसी दिन से भारत में बसंत ऋतु का आरंभ हो जाता है। यहां आप जानेंगे बसंत पंचमी की पूजा विधि, मंत्र, कथा, आरती और मुहूर्त।

बसंत पंचमी शुभ मुहूर्त (Basant Panchami 2023 Shubh Muhurat)

बसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा सूर्योदय के बाद और दिन के मध्य भाग से पहले करनी चाहिए, इस समय को पूर्वाह्न भी कहा जाता है। इस बार बसंत पंचमी 26 जनवरी को मनाई जा रही है। इस दिन सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 7 बजकर 12 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 34 मिनट तक रहेगा।

बसंत पंचमी पूजा विधि (Basant Panchami Puja Vidhi)

  • बसंत पंचमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें और इसके बाद पीले या सफेद रंग के कपड़े पहने।
  • फिर घर के पूजा स्थल पर जाकर मां सरस्वती की पूजा का संकल्प लें।
  • फिर पूजा स्थान पर मां सरस्वती की मूर्ति स्थापित करें।
  • साथ ही भगवान गणेश जी की मूर्ति भी स्थापित करें क्योंकि गणेश जी प्रथम पूज्य देवता माने जाते हैं।
  • इसके बाद उनको फूल, अक्षत, धूप, दीप आदि अर्पित करें।
  • अब मां सरस्वती को गंगाजल और दूध से स्नान कराएं।
  • फिर उन्हें पीले वस्त्र अर्पित करें।
  • इसके बाद मां सरस्वती को पीले फूल, अक्षत, सफेद चंदन, पीला गुलाल, धूप, दीप आदि अर्पित करें।
  • मां को गेंदे के फूल की माला पहनाएं।
  • फिर माता को लड्डू या कोई भी पीले रंग की मिठाई का भोग लगाएं।
  • अब सरस्वती वंदना व मंत्र से मां सरस्वती की पूजा करें।
  • पूजा के अंत में हवन और आरती करें।

मां सरस्वती की वंदना (Maa Saraswati Ki Vandana)

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता।
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥
या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।
सा माम् पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥1॥
शुक्लाम् ब्रह्मविचार सार परमाम् आद्यां जगद्व्यापिनीम्।
वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्‌॥
हस्ते स्फटिकमालिकाम् विदधतीम् पद्मासने संस्थिताम्‌।
वन्दे ताम् परमेश्वरीम् भगवतीम् बुद्धिप्रदाम् शारदाम्‌॥2॥

मां सरस्वती के मंत्र (Maa Saraswati Mantra)

-ओम ऐं सरस्वत्यै ऐं नमः।
-ओम ऐं ह्रीं क्लीं महासरस्वती देव्यै नमः।
-सरस्वती ॐ सरस्वत्यै नमः

मां सरस्वती की आरती (Maa Saraswati Ki Aarti)

जय सरस्वती माता,
मैया जय सरस्वती माता ।
सदगुण वैभव शालिनी,
त्रिभुवन विख्याता ॥
जय जय सरस्वती माता...॥
चन्द्रवदनि पद्मासिनि,
द्युति मंगलकारी ।
सोहे शुभ हंस सवारी,
अतुल तेजधारी ॥
जय जय सरस्वती माता...॥
बाएं कर में वीणा,
दाएं कर माला ।
शीश मुकुट मणि सोहे,
गल मोतियन माला ॥
जय जय सरस्वती माता...॥
देवी शरण जो आए,
उनका उद्धार किया ।
पैठी मंथरा दासी,
रावण संहार किया ॥
जय जय सरस्वती माता...॥
विद्या ज्ञान प्रदायिनि,
ज्ञान प्रकाश भरो ।
मोह अज्ञान और तिमिर का,
जग से नाश करो ॥
जय जय सरस्वती माता...॥
धूप दीप फल मेवा,
माँ स्वीकार करो ।
ज्ञानचक्षु दे माता,
जग निस्तार करो ॥
॥ जय सरस्वती माता...॥
माँ सरस्वती की आरती,
जो कोई जन गावे ।
हितकारी सुखकारी,
ज्ञान भक्ति पावे ॥
जय जय सरस्वती माता...॥
जय सरस्वती माता,
जय जय सरस्वती माता ।
सदगुण वैभव शालिनी,
त्रिभुवन विख्याता ॥

बसंत पंचमी कथा (Basant Panchami Vrat Katha)

लोक कथा के अनुसार एक बार ब्रह्मा जी धरती पर विचरण करने निकले और उन्होंने मनुष्यों और जीव-जंतुओं को देखा तो उन्हें सभी नीरस और शांत दिखाई दिए। यह देखकर ब्रह्मा जी को कुछ कमी महसूस हुई और उन्होंने अपने कमंडल से जल निकालकर पृथ्वी पर छिड़क दिया। जल छिड़कते ही एक सुंदर स्त्री प्रकट हुई जिसके एक हाथ में वीणा, एक में माला, एक में पुस्तक और एक में वर मुद्रा थी। ब्रह्मा जी ने उन्हें ज्ञान की देवी मां सरस्वती के नाम से पुकारा। सरस्वती जी ने जैसे ही वीणा के तार झंकृत किए, उससे सभी प्राणी बोलने लगे, नदियां कलकल कर बहने लगी हवा ने भी सन्नाटे को चीरता हुआ संगीत पैदा किया। तभी से ज्ञान और संगीत की देवी के रुप में सरस्वती की पूजा की जाने लगी।
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