Sakat Chauth Vrat par kiski puja karein: सकट चौथ का व्रत हिंदू कैलेंडर के अनुसार, माघ महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है। अंग्रेजी कैलेंडर में यह डेट अमूमन जनवरी महीने में आती है। हालांकि भक्तों को यह दुविधा रहती है कि सकट चौथ पर गणेश जी पूजा होती है या सकट माता की। चलिए यहां इस कंफ्यूजन को दूर करते हैं।
सकट चौथ पर मुख्य पूजा किसकी होती है?
सकट चौथ को संकष्टी चतुर्थी भी कहा जाता है। यह व्रत भगवान गणेश को समर्पित होता है। इस दिन महिलाएं संतान की लंबी आयु, स्वास्थ्य और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए गणेश जी का व्रत और पूजा करती हैं।
सकट चौथ पर सकट माता की पूजा होती है क्या
लोक परंपराओं में सकट माता को माता पार्वती का ही रूप माना जाता है। मान्यता है कि माता पार्वती ने इस दिन गणेश जी की रक्षा और कल्याण के लिए व्रत किया था। इसलिए कई जगहों पर महिलाएं सकट माता की कथा सुनती हैं और उन्हें प्रसाद चढ़ाती हैं।
सकट चौथ पर किसकी पूजा करें
माघ मास के सकट चौथ और संकष्टी चतुर्थी - दोनों व्रत एक ही हैं। सकट चौथ के व्रत में गणेश जी और सकट माता दोनों की पूजा होती है। हालांकि इस व्रत के मुख्य आराध्य गणेश जी ही माने जाते हैं।
सकट चौथ की उत्तर भारत में प्रचलित मान्यता
उत्तर भारत में सकट चौथ के व्रत को सकट माता का व्रत भी कहा जाता है। पूजा में गणेश जी के साथ सकट माता का स्मरण किया जाता है। चंद्र दर्शन के बाद ही व्रत खोला जाता है, जो गणेश पूजा की परंपरा है।
- क्या सकट चौथ व्रत में पानी पी सकते हैं
सकट चौथ का व्रत रखने वाले निर्जला व्रत रखते हैं। शाम को चांद निकलने के बाद व्रत पारण कर जल ग्रहण किया जाता है।
सकट चौथ व्रत और पूजा में लाल रंग सबसे शुभ माना जाता है। पीला, नारंगी रंग भी सकट चौथ के लिए अच्छे रहते हैं। काला, स्लेटी जैसे रंग सकट चौथ की पूजा में नहीं पहनने चाहिए।
FAQs
क्या सकट चौथ व्रत में पानी पी सकते हैं
सकट चौथ का व्रत रखने वाले निर्जला व्रत रखते हैं। शाम को चांद निकलने के बाद व्रत पारण कर जल ग्रहण किया जाता है।
