Ganesh Bhagwan ka Bhajan, (सकट चौथ माता के भजन), Sankashti Chaturthi Ke Bhajan: सकट चौथ और संकष्टी चतुर्थी (Sankashti Chaturthi) का पर्व संतान सुख, लंबी आयु और संकटों से रक्षा के लिए रखा जाता है। इस दिन सकट माता और भगवान गणेश की पूजा के साथ भजन-कीर्तन का विशेष महत्व होता है। माना जाता है कि भजन गाने से मन की शुद्धि होती है और व्रत का फल कई गुना बढ़ जाता है। पूजा के समय और चंद्र दर्शन के बाद भजन करना शुभ माना जाता है। यहां आप सकट चौथ के भजन देख सकते हैं।
Sakat chauth vrat ke bhajan | sankashti chaturthi special bhajan
सकट चौथ भजन / गणेश जन्म कथा भजन
मुखड़ा (कोरस – सभी गायक)
जय जय गणपति गौरी नंदन,
हम श्रद्धा-भाव संग शीश झुकाते हैं।
मंगलकर्ता दुखहर्ता की गाथा गाते हैं,
पावन कथा सुनाते हैं॥
(रिपीट)
करो जगत कल्याण हे गणनायक,
करो जगत कल्याण हे गणनायक॥
अंतरा 1 (कथा-गायन)
शिव के गणों को गौरा माँ ने
द्वार-दरबार बिठाया,
खिला-पिला सब गणों को
फिर स्नान को माता धाया।
तभी किसी काम से
भोलेनाथ पधारे,
रोक न पाए शिव को गण
भीतर वे सिधारे।
लाज से भर गया मन माता का,
विघ्न पड़ा जीवन में,
स्नान में बाधा देख
व्याकुल हुईं चिंतन में।
(कोरस)
मंगलकर्ता दुखहर्ता की गाथा गाते हैं,
पावन कथा सुनाते हैं॥
अंतरा 2 (कथा-गायन)
बार-बार जब स्नान करें माता,
शिव का आगमन हो जाए,
गण न रोक सकें महादेव को,
ये बाधा बढ़ती जाए।
सोच रही थीं जगदंबा –
कौन बनेगा सहारा,
इस विघ्न का हल कैसे हो
कैसा हो उपाय न्यारा।
तभी युक्ति मन में आई,
हर्षित हुईं भवानी,
इस बाधा का अंत करेंगी
अब माता कल्याणी।
(कोरस)
करो जगत कल्याण हे गणनायक,
करो जगत कल्याण हे गणनायक॥
अंतरा 3 (गणेश जन्म)
उपटन से माँ ने मूरत
अद्भुत रूप सजाई,
अपनी शक्ति फूँक प्राण
ममता बरसाई।
विनायक का हुआ अवतार,
जग में आनंद छाया,
माता-पुत्र का प्रेम निरख
देवों ने शीश नवाया।
आशीष दिया माँ ने ललना को,
चिर आयु वर पाया,
देवलोक में मंगल गूँजा,
सकल जग हर्षाया।
(कोरस)
मंगलकर्ता दुखहर्ता की गाथा गाते हैं,
पावन कथा सुनाते हैं॥
अंतरा 4 (द्वार-रक्षा प्रसंग)
स्नान को चलीं जब माता,
ललना द्वार बैठाया,
आज्ञा दी – बिन मेरी आज्ञा
कोई भीतर न आए।
आए तभी शिवगण द्वार पर,
रोक दिया विनायक ने,
माता का आदेश सुनाकर
दृढ़ रहा वह बालक ने।
गण न माने, युद्ध ठना,
शक्ति दिखाई ललना ने,
गण हार कर शिव के पास
जा सुनाई घटना ने।
(कोरस)
करो जगत कल्याण हे गणनायक,
तुम करो जगत कल्याण हे गणनायक॥
अंतरा 5 (महायुद्ध व बलिदान)
आए शिव गण सेना संग,
रणभूमि बन गई धरा,
आदि शक्ति का पुत्र अकेला
सब पर भारी पड़ा।
ब्रह्मा-विष्णु भी आए समझाने,
पर बालक न माने बात,
अंत में शंकर क्रोध में आए,
त्रिशूल चला तत्काल।
गिर पड़ा ललना धरती पर,
“माँ” कह पुकार लगाई,
सुनकर पुकार पार्वती
विनाश रूप धर आई।
(कोरस)
मंगलकर्ता दुखहर्ता की गाथा गाते हैं,
पावन कथा सुनाते हैं॥
अंतरा 6 (गजमुख अवतार)
देवी बोलीं – यदि जग बचाना,
मेरे ललना को जीवन दो,
विष्णु लाए गज का शीश,
शिव ने जोड़ दिया धड़ से वो।
जी उठा विनायक फिर से,
गजमुख रूप धराया,
पिता-पुत्र का मिलन देख
तीनों लोक हर्षाया।
शिव ने बनाया गणों का स्वामी,
प्रथम पूज्य कहलाया,
हर कार्य में सबसे पहले
अब गणेश पूजाया।
(कोरस – तेज ताल)
करो जगत कल्याण हे गणनायक,
करो जगत कल्याण हे गणनायक॥
समापन (आरतीनुमा कोरस)
तुम हितकारी, तुम सुखकारी,
मंगलकर्ता दातार,
विघ्न सभी हर लेते हो,
आओ शरण तुम्हार।
रिद्धि-सिद्धि संग शुभ-लाभ भी
करते हैं सेवा आपकी,
सदा रहे सिर पर कृपा
हे गौरीसुत, गणराज जी।
(फाइनल रिपीट – सभी)
मंगलकर्ता दुखहर्ता की गाथा गाते हैं,
पावन कथा सुनाते हैं॥
करो जगत कल्याण हे गणनायक,
करो जगत कल्याण हे गणनायक॥

गणपति बप्पा
मेरे कीर्तन में रंग बरसाओ आओ जी गजानन आओ लिरिक्स
मेरे कीर्तन में रंग बरसाओ,
आओ जी गजानन आओ ।।
ब्रह्मा तुम भी पधारो,
विष्णु तुम भी पधारो,
भोले शंकर को साथ ले आओ,
आओ जी गजानन आओ,
मेरे कीर्तन में रंग बरसाओ,
आओ जी गजानन आओ ।।
लक्ष्मी तुम भी पधारो,
गौरा तुम भी पधारो,
सरस्वती को साथ ले आओ
आओ जी गजानन आओ,
मेरे कीर्तन में रंग बरसाओ,
आओ जी गजानन आओ ।।
राम तुम भी पधारो,
लक्ष्मण तुम भी पधारो,
सीता मैया को साथ ले आओ,
मेरे कीर्तन में रंग बरसाओ,
आओ जी गजानन आओ ।।
श्याम तुम भी पधारो,
राम तुम भी पधारो,
राधा रानी को साथ ले आओ,
मेरे कीर्तन में रंग बरसाओ,
आओ जी गजानन आओ ।।
हनुमत तुम भी पधारो,
नारद तुम भी पधारो,
मैया रानी को साथ ले आओ,
मेरे कीर्तन में रंग बरसाओ,
आओ जी गजानन आओ ।।
गणपति गणेश को, उमापति महेश को, मेरा प्रणाम है Bhajan Lyrics
गणपति गणेश को,
उमापति महेश को,
मेरा प्रणाम है,
मेरा प्रणाम है ।।
अंजनी के पूत को,
राम जी के दूत को,
संकट हरने वाले को,
संजीवन लाने वाले को,
मेरा प्रणाम है,
मेरा प्रणाम है ।।
कृष्ण कन्हैया को,
दाऊ जी के भैया को,
लाज बचाने वाले को,
प्रेम सिखाने वाले को,
मेरा प्रणाम है,
मेरा प्रणाम है ।।
मैया शेरोवाली को,
खंडे खप्पर वाली को,
सचियाँ जोतावाली को,
भंडारे भरने वाली को,
मेरा प्रणाम है,
मेरा प्रणाम है ।।
राम जिनका नाम है,
अयोध्या जिनका धाम है,
ऐसे धनुर्धारी को,
विष्णु के अवतारी को,
मेरा प्रणाम है,
मेरा प्रणाम है ।।
कृष्णा जिनका नाम है,
मथुरा जिनका धाम है,
ऐसे मुरली बजैया को,
गव्वों के चरेया को,
मेरा प्रणाम है,
मेरा प्रणाम है ।।
शिव शंकर जिनका नाम है,
कैलाश जिनका धाम है,
ऐसे उमरू बजैया को,
ऐसे भस्म रमैया को,
मेरा प्रणाम है,
मेरा प्रणाम है ।।
विष्णु जिनका नाम है,
क्षीर सागर जिनका धाम है,
ऐसे चक्र धारी को,
जग के पालनहारी को,
मेरा प्रणाम है,
मेरा प्रणाम है ।।
काली जिनका नाम है,
कलकत्ता जिनका धाम है,
ऐसी खप्पर वाली को,
शक्ति देने वाली को,
मेरा प्रणाम है,
मेरा प्रणाम है ।।
श्याम जिनका नाम है,
खाटू जिनका धाम है,
ऐसे हारे के सहारे को,
कलयुग के अवतारी को,
मेरा प्रणाम है,
मेरा प्रणाम है ।।
गणपति गणेश को,
उमापति महेश को,
मेरा प्रणाम है,
मेरा प्रणाम है ।।
गोदी में उठा लो मेरी मां गजानन छोटे हैं लिरिक्स
गोदी में उठा लो मेरी माँ, गजानन छोटे हैं ।।
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घुंघरू पहना दो मेरी माँ, गजानन छोटे हैं ।।
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माला पहना दो मेरी माँ, गजानन छोटे हैं ।।
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कुण्डल पहना दो मेरी माँ, गजानन छोटे हैं ।।
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मेरे गजानन का छोटा सा शीश है,
मुकुट पहना दो मेरी माँ, गजानन छोटे हैं ।।
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