अध्यात्म

Ganesh Bhagwan ka Bhajan: सकट चौथ माता के भजन- यहां देखें गणेश जी के संकष्टी चतुर्थी स्पेशल भजन

Ganesh Bhagwan ka Bhajan, (सकट चौथ माता के भजन), Sankashti Chaturthi Ke Bhajan: सकट चौथ यानी माघी संकष्टी चतुर्थी का व्रत बड़ी श्रदा के साथ किया जाता है। अगर आपने भी यह व्रत किया है तो सकट माता और गणेश जी के ये भजन भी गाएं। इससे व्रत की भक्ति दोगुनी हो जाएगी। यहां देखें गणेश जी के संकष्टी चतुर्थी स्पेशल भजन और सकट चौथ व्रत के भजन।

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sankashti chaturthi special bhajan

Ganesh Bhagwan ka Bhajan, (सकट चौथ माता के भजन), Sankashti Chaturthi Ke Bhajan: सकट चौथ और संकष्टी चतुर्थी (Sankashti Chaturthi) का पर्व संतान सुख, लंबी आयु और संकटों से रक्षा के लिए रखा जाता है। इस दिन सकट माता और भगवान गणेश की पूजा के साथ भजन-कीर्तन का विशेष महत्व होता है। माना जाता है कि भजन गाने से मन की शुद्धि होती है और व्रत का फल कई गुना बढ़ जाता है। पूजा के समय और चंद्र दर्शन के बाद भजन करना शुभ माना जाता है। यहां आप सकट चौथ के भजन देख सकते हैं।

Sakat chauth vrat ke bhajan | sankashti chaturthi special bhajan

सकट चौथ भजन / गणेश जन्म कथा भजन

मुखड़ा (कोरस – सभी गायक)

जय जय गणपति गौरी नंदन,

हम श्रद्धा-भाव संग शीश झुकाते हैं।

मंगलकर्ता दुखहर्ता की गाथा गाते हैं,

पावन कथा सुनाते हैं॥

(रिपीट)

करो जगत कल्याण हे गणनायक,

करो जगत कल्याण हे गणनायक॥

अंतरा 1 (कथा-गायन)

शिव के गणों को गौरा माँ ने

द्वार-दरबार बिठाया,

खिला-पिला सब गणों को

फिर स्नान को माता धाया।

तभी किसी काम से

भोलेनाथ पधारे,

रोक न पाए शिव को गण

भीतर वे सिधारे।

लाज से भर गया मन माता का,

विघ्न पड़ा जीवन में,

स्नान में बाधा देख

व्याकुल हुईं चिंतन में।

(कोरस)

मंगलकर्ता दुखहर्ता की गाथा गाते हैं,

पावन कथा सुनाते हैं॥

अंतरा 2 (कथा-गायन)

बार-बार जब स्नान करें माता,

शिव का आगमन हो जाए,

गण न रोक सकें महादेव को,

ये बाधा बढ़ती जाए।

सोच रही थीं जगदंबा –

कौन बनेगा सहारा,

इस विघ्न का हल कैसे हो

कैसा हो उपाय न्यारा।

तभी युक्ति मन में आई,

हर्षित हुईं भवानी,

इस बाधा का अंत करेंगी

अब माता कल्याणी।

(कोरस)

करो जगत कल्याण हे गणनायक,

करो जगत कल्याण हे गणनायक॥

अंतरा 3 (गणेश जन्म)

उपटन से माँ ने मूरत

अद्भुत रूप सजाई,

अपनी शक्ति फूँक प्राण

ममता बरसाई।

विनायक का हुआ अवतार,

जग में आनंद छाया,

माता-पुत्र का प्रेम निरख

देवों ने शीश नवाया।

आशीष दिया माँ ने ललना को,

चिर आयु वर पाया,

देवलोक में मंगल गूँजा,

सकल जग हर्षाया।

(कोरस)

मंगलकर्ता दुखहर्ता की गाथा गाते हैं,

पावन कथा सुनाते हैं॥

अंतरा 4 (द्वार-रक्षा प्रसंग)

स्नान को चलीं जब माता,

ललना द्वार बैठाया,

आज्ञा दी – बिन मेरी आज्ञा

कोई भीतर न आए।

आए तभी शिवगण द्वार पर,

रोक दिया विनायक ने,

माता का आदेश सुनाकर

दृढ़ रहा वह बालक ने।

गण न माने, युद्ध ठना,

शक्ति दिखाई ललना ने,

गण हार कर शिव के पास

जा सुनाई घटना ने।

(कोरस)

करो जगत कल्याण हे गणनायक,

तुम करो जगत कल्याण हे गणनायक॥

अंतरा 5 (महायुद्ध व बलिदान)

आए शिव गण सेना संग,

रणभूमि बन गई धरा,

आदि शक्ति का पुत्र अकेला

सब पर भारी पड़ा।

ब्रह्मा-विष्णु भी आए समझाने,

पर बालक न माने बात,

अंत में शंकर क्रोध में आए,

त्रिशूल चला तत्काल।

गिर पड़ा ललना धरती पर,

“माँ” कह पुकार लगाई,

सुनकर पुकार पार्वती

विनाश रूप धर आई।

(कोरस)

मंगलकर्ता दुखहर्ता की गाथा गाते हैं,

पावन कथा सुनाते हैं॥

अंतरा 6 (गजमुख अवतार)

देवी बोलीं – यदि जग बचाना,

मेरे ललना को जीवन दो,

विष्णु लाए गज का शीश,

शिव ने जोड़ दिया धड़ से वो।

जी उठा विनायक फिर से,

गजमुख रूप धराया,

पिता-पुत्र का मिलन देख

तीनों लोक हर्षाया।

शिव ने बनाया गणों का स्वामी,

प्रथम पूज्य कहलाया,

हर कार्य में सबसे पहले

अब गणेश पूजाया।

(कोरस – तेज ताल)

करो जगत कल्याण हे गणनायक,

करो जगत कल्याण हे गणनायक॥

समापन (आरतीनुमा कोरस)

तुम हितकारी, तुम सुखकारी,

मंगलकर्ता दातार,

विघ्न सभी हर लेते हो,

आओ शरण तुम्हार।

रिद्धि-सिद्धि संग शुभ-लाभ भी

करते हैं सेवा आपकी,

सदा रहे सिर पर कृपा

हे गौरीसुत, गणराज जी।

(फाइनल रिपीट – सभी)

मंगलकर्ता दुखहर्ता की गाथा गाते हैं,

पावन कथा सुनाते हैं॥

करो जगत कल्याण हे गणनायक,

करो जगत कल्याण हे गणनायक॥

गणपति बप्पा

गणपति बप्पा

मेरे कीर्तन में रंग बरसाओ आओ जी गजानन आओ लिरिक्स

मेरे कीर्तन में रंग बरसाओ,

आओ जी गजानन आओ ।।

ब्रह्मा तुम भी पधारो,

विष्णु तुम भी पधारो,

भोले शंकर को साथ ले आओ,

आओ जी गजानन आओ,

मेरे कीर्तन में रंग बरसाओ,

आओ जी गजानन आओ ।।

लक्ष्मी तुम भी पधारो,

गौरा तुम भी पधारो,

सरस्वती को साथ ले आओ

आओ जी गजानन आओ,

मेरे कीर्तन में रंग बरसाओ,

आओ जी गजानन आओ ।।

राम तुम भी पधारो,

लक्ष्मण तुम भी पधारो,

सीता मैया को साथ ले आओ,

मेरे कीर्तन में रंग बरसाओ,

आओ जी गजानन आओ ।।

श्याम तुम भी पधारो,

राम तुम भी पधारो,

राधा रानी को साथ ले आओ,

मेरे कीर्तन में रंग बरसाओ,

आओ जी गजानन आओ ।।

हनुमत तुम भी पधारो,

नारद तुम भी पधारो,

मैया रानी को साथ ले आओ,

मेरे कीर्तन में रंग बरसाओ,

आओ जी गजानन आओ ।।

गणपति गणेश को, उमापति महेश को, मेरा प्रणाम है Bhajan Lyrics

गणपति गणेश को,

उमापति महेश को,

मेरा प्रणाम है,

मेरा प्रणाम है ।।

अंजनी के पूत को,

राम जी के दूत को,

संकट हरने वाले को,

संजीवन लाने वाले को,

मेरा प्रणाम है,

मेरा प्रणाम है ।।

कृष्ण कन्हैया को,

दाऊ जी के भैया को,

लाज बचाने वाले को,

प्रेम सिखाने वाले को,

मेरा प्रणाम है,

मेरा प्रणाम है ।।

मैया शेरोवाली को,

खंडे खप्पर वाली को,

सचियाँ जोतावाली को,

भंडारे भरने वाली को,

मेरा प्रणाम है,

मेरा प्रणाम है ।।

राम जिनका नाम है,

अयोध्या जिनका धाम है,

ऐसे धनुर्धारी को,

विष्णु के अवतारी को,

मेरा प्रणाम है,

मेरा प्रणाम है ।।

कृष्णा जिनका नाम है,

मथुरा जिनका धाम है,

ऐसे मुरली बजैया को,

गव्वों के चरेया को,

मेरा प्रणाम है,

मेरा प्रणाम है ।।

शिव शंकर जिनका नाम है,

कैलाश जिनका धाम है,

ऐसे उमरू बजैया को,

ऐसे भस्म रमैया को,

मेरा प्रणाम है,

मेरा प्रणाम है ।।

विष्णु जिनका नाम है,

क्षीर सागर जिनका धाम है,

ऐसे चक्र धारी को,

जग के पालनहारी को,

मेरा प्रणाम है,

मेरा प्रणाम है ।।

काली जिनका नाम है,

कलकत्ता जिनका धाम है,

ऐसी खप्पर वाली को,

शक्ति देने वाली को,

मेरा प्रणाम है,

मेरा प्रणाम है ।।

श्याम जिनका नाम है,

खाटू जिनका धाम है,

ऐसे हारे के सहारे को,

कलयुग के अवतारी को,

मेरा प्रणाम है,

मेरा प्रणाम है ।।

गणपति गणेश को,

उमापति महेश को,

मेरा प्रणाम है,

मेरा प्रणाम है ।।

गोदी में उठा लो मेरी मां गजानन छोटे हैं लिरिक्स

गोदी में उठा लो मेरी माँ, गजानन छोटे हैं ।।

मेरे गजानन के छोटे-छोटे पांव हैं,

घुंघरू पहना दो मेरी माँ, गजानन छोटे हैं ।।

मेरे गजानन के छोटे-छोटे अंग हैं,

पीताम्बर पहना दो मेरी माँ, गजानन छोटे हैं ।।

मेरे गजानन के छोटे-छोटे हाथ हैं,

कंगना पहना दो मेरी माँ, गजानन छोटे हैं ।।

मेरे गजानन का छोटा सा गला है,

माला पहना दो मेरी माँ, गजानन छोटे हैं ।।

मेरे गजानन के छोटे-छोटे कान हैं,

कुण्डल पहना दो मेरी माँ, गजानन छोटे हैं ।।

मेरे गजानन का छोटा सा मुख है,

मोदक खिला दो मेरी माँ, गजानन छोटे हैं ।।

मेरे गजानन का छोटा सा शीश है,

मुकुट पहना दो मेरी माँ, गजानन छोटे हैं ।।

गणनायक महाराज, सुमरां जोड्या दोन्यूं हाथ Bhajan Lyrics

गजानन्द मैहर करो ।। टेर ।।

तर्ज – भरी नगरी में शोर ।

एक दन्त है दयावन्त है, चार भुजावोंवाले,

लम्बोदर, रिद्धि-सिद्धि के दाता, विघ्न मिटाने वाले,

ल्याया मोदक भर-भर थाल, जीमो शिवगौरां के लाल ।। गजानन्द …

अद्भुत तेरा रूप गजानन्द, अद्भुत तेरी माया,

मात-पिता की सेवा कर, वरदान अनोखा पाया,

बन गए देवों में सिरमौर, तुझ बिन मिले ना कोई ठौर ।। गजानन्द …

अगर किसी ने भूल आपको, कारज कोई बनाया,

विघ्न हुए कारज सब अटके, कोई काम न आया,

तुझसे हार गया संसार, तेरी महिमा अपरम्पार ।। गजानन्द …

‘नन्दू’ मिलकर भक्त श्याम के, तुमको प्रथम मनावें,

बरसे रंग कृपा का तेरी, जब हम श्याम रिझावें,

वन्दन तेरा है गणराज, रखना श्याम भक्त की लाज ।। गजानन्द …

लिरिक्स – नन्दू जी

Medha Chawla
मेधा चावलाauthor

मेधा चावला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर एसोसिएट एडिटर हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन की लीड हैं। लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 20 वर्षों का अनुभव रखने वाली मेधा की विशेषज्ञता हेल्थ, वेलनेस, फिटनेस, मेंटल हेल्थ, डेली लाइफ इम्प्रूवमेंट, ह्यूमन-इंटरेस्ट फीचर्स और रिसर्च-बेस्ड स्टोरीज तक फैली है। उनकी लेखन शैली पाठकों को जटिल स्वास्थ्य और जीवनशैली संबंधी विषयों को आसान, समझने योग्य और व्यवहारिक रूप में प्रस्तुत करती है, जिससे उनका कंटेंट व्यापक पाठक समूह से जुड़ता है। अबतक 30,000 से अधिक कंटेंट पीस लिख चुकी मेधा की कई एक्सक्लूसिव स्टोरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ट्रेंड सेट कर चुकी हैं।

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