अध्यात्म

नवरात्रि में क्यों खास है 'दिव्य स्त्रैण'? पढ़ें शक्ति की भक्ति पर सद्गुरु के 9 अनमोल विचार

सद्गुरु के अनुसार, जिस दिन इंसान अपने भीतर के पौरुष और स्त्रैण के संतुलन को समझ लेता है, उसी दिन उसका जीवन रूपांतरित होने लगता है।

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दिव्य नारी शक्ति पर सद्गुरु के 9 अनमोल विचार

नवरात्रि अस्तित्व के सबसे जीवंत और शक्तिशाली पहलू 'दिव्य स्त्रैण' का उत्सव है। अमूमन हम देवी को केवल पूजा-पाठ और मूर्तियों तक सीमित कर देते हैं, लेकिन योग परंपरा और सद्गुरु के दर्शन में स्त्रैण को लिंग से परे, संपूर्ण ब्रह्मांड की एक मूल ऊर्जा और चेतना के रूप में देखा गया है।

पारंपरिक रूप से नवरात्रि को नौ रातों में विभाजित किया गया है, जो मुख्य रूप से तीन आयामों- दुर्गा (शक्ति और सक्रियता), लक्ष्मी (समृद्धि और पोषण) और सरस्वती (ज्ञान और मोक्ष) का प्रतिनिधित्व करती हैं। यह यात्रा तमोगुण से रजोगुण और अंततः सत्वगुण से परे जाकर परम मुक्ति पाने का प्रतीक है।

सद्गुरु के अनुसार, जिस दिन इंसान अपने भीतर के पौरुष और स्त्रैण के संतुलन को समझ लेता है, उसी दिन उसका जीवन रूपांतरित होने लगता है। इस दिव्य स्त्रैण और देवी कृपा को समझने के लिए उनके 9 विचार बेहद महत्वपूर्ण हैं:

ऊर्जा तंत्र का रूपांतरण: देवी के साथ करीबी शारीरिक और ऊर्जात्मक जुड़ाव आपके भीतर ऐसा रूपांतरण लाता है कि उनकी कृपा हर पल आपके साथ काम करती है।

अस्तित्व का संतुलन: जब जीवन में पौरुष और स्त्रैण दोनों की भूमिका बराबर होती है, तभी जीवन में वास्तविक सुंदरता और उद्देश्य आता है।

सच्ची सुंदरता की पहचान: दिव्य स्त्रैण का उत्सव मनाकर ही इंसान जीवन के सबसे गहरे और खूबसूरत आयामों को महसूस कर सकता है।

सृष्टि का आधार: स्त्रैण जीवन का वह शक्तिशाली आयाम है, जिसके बिना इस अस्तित्व में किसी भी चीज़ की रचना या गति संभव नहीं है।

कल्पना से परे जीवन: जो देवी की कृपा प्राप्त कर लेता है, वह अपनी सामान्य क्षमता, काबिलियत और कल्पना से कहीं अधिक ऊँचा और भव्य जीवन जीता है।

परमानन्द का उन्माद: देवी एक ऐसी चीख और उन्माद हैं जो किसी पागलपन या विवशता से नहीं, बल्कि विशुद्ध आनंद से उपजती है।

शून्यता में देवी का वास: जब आप खुद को अहंकार और विचारों से खाली कर लेते हैं, तो देवी के पास आपके भीतर प्रविष्ट होने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता।

लिंग भैरवी का स्वरूप: लिंग भैरवी किसी नियम या सीमा में बंधी ऊर्जा नहीं, बल्कि अपनी उच्चतम और विशुद्ध संभावना में बहता हुआ बेबाक जीवन है।

संस्कृति और कला का आधार: यदि इस धरती से स्त्रैण ऊर्जा गायब हो जाए, तो दुनिया में कोमलता, सुंदरता, संवेदना और कलात्मकता नाम की कोई चीज़ नहीं बचेगी।

नवरात्रि हमें समझने का मौका देती है कि हम महज भौतिक शरीर भर नहीं, ऊर्जा का एक प्रवाह हैं। शक्ति के बिना शिव भी अचल हैं। जब हम अपने भीतर की कठोरता को छोड़कर कोमलता, भक्ति और स्त्रैण ऊर्जा को अपनाते हैं, तभी हम जीवन को उसकी संपूर्णता और दिव्यता में जी पाते हैं।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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