Tulsi Mala Pahnne Ke Niyam: विष्णु भक्त तुलसी की माला धारण करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, तुलसी में माता लक्ष्मी का वास होता है और तुलसी की माला से भगवान विष्णु के मंत्र का जाप विशेष फलदाई माना गया है। तुलसी की माला गले में धारण करते हैं तो मन और आत्मा दोनों पवित्र हो जाते हैं। अगर आपकी कुंडली में बुध और गुरु दो ग्रह कमजोर हो तो आपको तुलसी की माला जरूर पहननी चाहिए। ये ग्रहों को बलवान कर सकरात्मक असर के लिए प्रेरित करती है। इतना ही नहीं माला पहनने वाले को बुरी नजर नहीं लगती। इस माला को पहनने से आत्मिक शक्ति मिलती है और भय-दुख दूर होते हैं।
तुलसी माला पहनने के नियम-
श्मशान घाट
तुलसी माला पहनकर न ही श्मशान घाट जाना चाहिए और ना ही अंतिम संस्कार में जाना चाहिए। अगर इन जगहों पर जाना पड़े तो तुलसी की माला को पहले उतारकर गंगा जल में डुबोकर रखना चाहिए। वापस आने के बाद शुद्धता से नाखून काटने और बाल धोकर नहाने के बाद धारण करना चाहिए।
प्याज-लहसुन और धूम्रपान
तुलसी की माला पहनने वाले लोगों को तामसिक भोजन की मनाही होती है। इससे तुलसी का अपमान होता है। तुलसी की माला पहनने के बाद हमेशा सात्विक भोजन ही करना चाहिए। उन्हें मांस मदिरा से लेकर प्याज लहसुन नहीं खाना चाहिए। ऐसे लोगों को सिगरेट या धूम्रपान की दूसरी आदतों से भी दूर रहना चाहिए।
न उतारें
तुलसी की माला को बार-बार पहनना और उतरना नहीं चाहिए। अगर कभी किसी कारण से उतारना पड़े तो उसे गंगाजल से धोकर फिर धारण करना चाहिए।
हाथ में माला
जिन लोगों को तुलसी की माला गले में पहनने में परेशानी होती है उन्हें अपने दाएं हाथ में तुलसी की माला धारण करनी चाहिए।
रुद्राक्ष माला
जिस व्यक्ति ने तुलसी की माला धारण की है, उसे भूल कर भी रुद्राक्ष की माला धारण नहीं करना चाहिए। आप इन दो मालाओं को साथ में नहीं पहन सकते हैं।
लंबी माला
तुलसी कि माला हमेशा लंबी पहननी चाहिए ताकि वह हृदय तक पहुंचे। इससे फेफड़े और हृदय रोग से बचाव होता है। साथ ही ये माला जब गले को छूती है तो इससे आवाज मधुर और सुरीली बनती है।
