Rudrabhishek Puja Samagri, Vidhi, Mantra: सावन का महीना चल रहा है और इस महीने में रुद्राभिषेक करना बेहद शुभ होता है। अगर सच्ची श्रद्धा और सही विधि-विधान के साथ रुद्राभिषेक किया जाए तो जीवन में चमत्कारिक बदलाव होते हैं। इस पूजा को करने से अकाल मृत्यु से भी मुक्ति मिल जाती है। अगर आपको ये पूजा घर पर करनी है तो आप यहां से इसकी सामग्री देख सकते हैं। साथ ही पूजा की विधि और मंत्र भी यहां मौजूद हैं।
रुद्राभिषेक पूजन सामग्री लिस्ट (Rudrabhishek Puja Samagri List)-
- शुद्ध जल
- घी
- पान
- सुपारी
- गन्ने का रस
- दूध
- दही
- शहद
- गुलाबजल
- नारियल
- दीपक
- बत्ती
- अगरबत्ती
- कपूर
- श्रृंगी
- बिल्वपत्र
- धुप
- मौली
- भांग
- मेवा
- मिठाई
- धतूरा
रुद्राभिषेक पूजन मंत्र ((Rudrabhishek Puja Mantra)-
रुद्राभिषेक करते समय "रुतम्-दु:खम्, द्रावयति-नाशयतीतिरुद्र:" मंत्र का जाप किया जाता है।
इसके अलावा इन मंत्रों का जाप भी करना शुभ है-
- ॐ नम: शम्भवाय च मयोभवाय च नम: शंकराय च मयस्कराय च नम: शिवाय च शिवतराय च ॥
- ईशानः सर्वविद्यानामीश्व रः सर्वभूतानां ब्रह्माधिपतिर्ब्रह्मणोऽधिपति ब्रह्मा शिवो मे अस्तु सदाशिवोय् ॥
- तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि। तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥
- अघोरेभ्योथघोरेभ्यो घोरघोरतरेभ्यः सर्वेभ्यः सर्व सर्वेभ्यो नमस्ते अस्तु रुद्ररुपेभ्यः॥
- वामदेवाय नमो ज्येष्ठारय नमः श्रेष्ठारय नमो
- रुद्राय नमः कालाय नम: कलविकरणाय नमो बलविकरणाय नमः
- बलाय नमो बलप्रमथनाथाय नमः सर्वभूतदमनाय नमो मनोन्मनाय नमः॥
- सद्योजातं प्रपद्यामि सद्योजाताय वै नमो नमः।
- भवे भवे नाति भवे भवस्व मां भवोद्भवाय नमः॥
- नम: सायं नम: प्रातर्नमो रात्र्या नमो दिवा।
- भवाय च शर्वाय चाभाभ्यामकरं नम:॥
- यस्य नि:श्र्वसितं वेदा यो वेदेभ्यो खिलं जगत्।
- निर्ममे तमहं वन्दे विद्यातीर्थ महेश्वरम्॥
- त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिबर्धनम् उर्वारूकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मा मृतात् ॥
- सर्वो वै रुद्रास्तस्मै रुद्राय नमो अस्तु। पुरुषो वै रुद्र: सन्महो नमो नम:॥
- विश्वा भूतं भुवनं चित्रं बहुधा जातं जायामानं च यत्। सर्वो ह्येष रुद्रस्तस्मै रुद्राय नमो अस्तु ॥
रुद्राभिषेक पूजन विधि (Rudrabhishek Puja Vidhi In Hindi)-
- रुद्राभिषेक पूजन के लिए सबसे पहले शिवलिंग की स्थापना उत्तर दिशा में करें।
- वहीं रुद्राभिषेक के समय आपका मुख पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए।
- शिवलिंग के पास पूर्व दिशा में एक चौकी लगाएं। जिस पर साफ कपड़ा बिछाकर गणेश जी और नवग्रहों की फोटो रखें।
- रुद्राभिषेक शुरू होने से पहले पूजन सामग्री तैयार कर लें।
- रुद्राभिषेक में शिवलिंग का जलाभिषेक करने से पहले भगवान गणेश जी की पूजा की जाती है।
- इस दौरान भगवान गणेश को तिलक, चावल, फूल, नैवेद्य, दूर्वा और दक्षिणा चढ़ाएं।
- इसके बाद नवग्रह की पूजा करें।
- अब भगवान शंकर की पूजा आरंभ करें।
- शिवलिंग को गंगाजल से स्नान करवाएं और रुद्राभिषेक शुरू करें।
- फिर आचमनी से गन्ने का रस, दही, दूध यानी पंचामृत समेत जितने भी तरल पदार्थ हैं उन सभी से शिवलिंग का अभिषेक करें।
- इसके अलावा भगवान शिव का अभिषेक करते समय मन में लगातार महामृत्युंजय मंत्र, ओम नमः: शिवाय या रुद्राष्टकम मंत्र का जाप करते रहें।
- फिर शिवलिंग पर चंदन का लेप लगाएं और पान का पत्ता, बेलपत्र आदि चीजें शिवजी को अर्पित करें।
- ध्यान रहे कि शिवलिंग पर बिल्वपत्र चढ़ाने से पहले उन पर चन्दन से ॐ या राम नाम लिख लेना है।
- रुद्राभिषक पूजा में कई मंत्रों का उच्चारण होता है। इसलिए सलाह है कि ये पूजा अनुभवी पंडित से ही कराएं, लेकिन यदि अगर आप खुद ही रुद्राष्टाध्यायी का पाठ कर सकते हैं तो इस पूजा को आप खुद भी कर सकते हैं।
- अंत में शिवजी को प्रसाद चढ़ाएं और सपरिवार शिव जी की आरती करें।
- आरती के बाद पूजा के समय शिवलिंग पर अर्पित किया जाने वाला जल या अन्य द्रव्यों को सभी जनों पर छिड़क दें और उन्हें ये पवित्र जल प्रसाद स्वरूप पीने को भी दें।
रुद्राभिषेक का महत्व (Rudrabhishek Puja Benefits)-
रुद्राभिषेक करने से भगवान भोलेनाथ की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इससे अकाल मृत्यु और लंबी बीमारी का डर खत्म हो जाता है। इसके मंत्र इतने शक्तिशाली होते हैं कि इनके जप से घर से नकारात्मकता ऊर्जा दूर हो जाती है। साथ ही कालसर्प दोष के बुरे प्रभाव से भी मुक्ति मिल जाती है।
