ऋषि पंचमी व्रत कथा हिंदी में (Rishi Panchami Ki Kahani, Kyon Manai Jati Hai), Rishi Panchami Katha pdf: 28 अगस्त 2025 को भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि है। इस व्रत में सप्त ऋषियों की पूजा की जाती है और उनसे जाने अनजाने में हुए पापों की मुक्ति की कामना की जाती है। यहां आप ऋषि पंचमी की व्रत कथा, ऋषि पंचमी की कहानी, ऋषि पंचमी व्रत की कथा, ऋषि पंचमी व्रत कथा pdf, ऋषि पंचमी व्रत कथा लिखित में पढ़ सकते हैं।
ऋषि पंचमी व्रत कथा इन हिंदी
प्राचीन समय की बात है, एक ब्राह्मण था जिसकी पत्नी बहुत धर्मपरायण और श्रद्धालु थी। उनके घर में एक पुत्र और एक पुत्री थी। ब्राह्मण ने अपनी पुत्री का विवाह उचित समय पर एक योग्य वर के साथ कर दिया। विवाह के कुछ समय बाद ही दुर्भाग्यवश वह कन्या विधवा हो गई और मायके में आकर रहने लगी।
एक दिन ब्राह्मणी ने स्वप्न में देखा कि उसकी कन्या पिछले जन्म के पाप के कारण दुख भोग रही है। ब्राह्मणी ने यह बात अपने पति को बताई। तब ब्राह्मण ने एक विद्वान ऋषि से जाकर इसका कारण पूछा।
ऋषि ने ध्यान करके बताया कि यह कन्या पूर्व जन्म में ब्राह्मण कुल में उत्पन्न हुई थी। एक बार मासिक धर्म के समय उसने शुद्धि-विधान का पालन नहीं किया और अशुद्ध अवस्था में घर का काम किया। यही पाप इसके दुख का कारण बना। स्त्रियों को मासिक धर्म के दिनों में विशेष सावधानी रखनी चाहिए और शास्त्र में बताए नियमों का पालन करना चाहिए। इस दोष के प्रायश्चित के लिए ऋषि पंचमी व्रत करने का विधान है।
मान्यता है कि महिलाओं को भाद्रपद शुक्ल पंचमी को पूरे विधि-विधान से ऋषि पंचमी व्रत करना चाहिए। इस व्रत में सप्तर्षियों की पूजा कर, धूप-दीप, नैवेद्य अर्पण करना चाहिए और कथा सुननी चाहिए। व्रत के प्रभाव से स्त्री अपने पापों से मुक्त होकर पुण्य फल प्राप्त करती है।
ब्राह्मण दम्पत्ति ने वही व्रत अपनी पुत्री से करवाया। इसके प्रभाव से वह पापमुक्त हुई और अगले जन्म में उसे उत्तम सुख और सौभाग्य प्राप्त हुआ।
ऋषि पंचमी की आरती Lyrics
श्री हरि हर गुरु गणपति , सबहु धरि ध्यान।
मुनि मंडल श्रृंगार युक्त, श्री गौतम करहुँ बखान।।
ॐ जय गौतम त्राता , स्वामी जी गौतम त्राता ।
ऋषिवर पूज्य हमारे ,मुद मंगल दाता।। ॐ जय।।
द्विज कुल कमल दिवाकर , परम् न्याय कारी।
जग कल्याण करन हित, न्याय रच्यौ भारी।। ॐ जय।।
पिप्लाद सूत शिष्य आपके, सब आदर्श भये।
वेद शास्त्र दर्शन में, पूर्ण कुशल हुए।।ॐ जय।।
गुर्जर करण नरेश विनय पर तुम पुष्कर आये ।
सभी शिष्य सुतगण को, अपने संग लाये।।ॐ जय।।
अनावृष्टि के कारण संकट आन पड्यो ।
भगवान आप दया करी, सबको कष्ट हरयो।।ॐ जय।।
पुत्र प्राप्ति हेतु , भूप के यज्ञ कियो।
यज्ञ देव के आशीष से , सुत को जन्म भयो।।ॐ जय।।
भूप मनोरथ पूर्ण करके , चिंता दूर करी।
प्रेतराज पामर की , निर्मल देह करी।।ॐ जय।।
ऋषिवर अक्षपाद की आरती ,जो कोई नर गावे।
ऋषि की पूर्ण कृपा से , मनोवांछित फल पावे ।।ॐ जय।।
