अध्यात्म

Rang ji Mandir Vrindavan: उत्तर भारत में दक्षिण की बेजोड़ कला का नमूना है वृंदावन का ये मंदिर, पूजा और परंपरा की शैली भी है बहुत खास

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Feb 2, 2023, 08:02 PM IST

Rang ji Mandir Vrindavan: वृंदावन में बना है दक्षिण भारतीय शैली का रंगनाथ जी मंदिर। दक्षिण भारतीय परंपरा के अनुसार होती है पूजा अर्चना। हर वर्ष ब्रह्मोत्सव में उमड़ती है भक्ताें की भीड़। मंदिर का द्वार जिसे गोपुरम कहते हैं और दूर से ही आकर्षित। मंदिर की वास्तु कला मनमोहने वाली है।

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वृंदावन स्थित रंगनाथ मंदिर

KEY HIGHLIGHTS
  • बांके बिहारी मंदिर के बहुत नजदीक है रंग जी मंदिर
  • दक्षिण भारतीय परंपरा से होती है मंदिर में पूजा
  • द्रविण शैली के मंदिर की अद्भुत है वास्तु कला


Rang ji Mandir Vrindavan: उत्तर भारत, जहां चलती है परंपराएं ब्रज की या अवध की, वहां दक्षिण भारतीय शैली में पूजा पाठ अपने आप में आकर्षण का केंद्र होती हैं। जब बात मंदिर और कृष्ण भक्ति की हो तो वहां दिव्यता स्वतः ही आ जाती है। ब्रज धाम वृंदावन में दक्षिण भारत की परंपरा की सजीव झलक दिखती है रंग जी मंदिर में। वृंदावन में ठाकुर बांके बिहारी जी मंदिर से कुछ ही दूरी पर स्थित रंग जी मंदिर, जिसे रंगनाथ जी मंदिर भी कहा जाता है। ये मंदिर जितना विशाल और बेजोड़ वास्तु कला का आकर्षण लिये हुए हैं उतनी ही प्रगांण आस्था यहां पर आने वाले श्रद्धालुओं की है। मंदिर के निकट पहुंचते ही दक्षिण भारत के मंदिरों जैसे अनुभव आपके मस्तिष्क को घेरने लगता है। दक्षिण भारत के मंदिरों की तरह ही विशाल गोपुर यानी प्रवेश द्वार आपका स्वागत करता है। श्री संप्रदाय के संस्थापक रामानुजाचार्य के विष्णु स्वरूप भगवान रंगनाथ के नाम से इस मंदिर को नाम दिया गया है।

मंदिर का इतिहास

द्रविड़ शैली में बने रंगनाथ जी मंदिर का निर्माण सेठ लखमीचंद के भ्राता सेठ गोविंद दास और राधाकृष्ण दास ने कराया था। यह मंदिर उनके गुरु आचार्य स्वामी रंगाचार्य द्वारा दिए गए मद्रास के रंगनाथ मंदिर की शैली के नक्शे के आधार पर बनाया गया था। मंदिर में एक सुंदर सरोवर और एक बाग भी है। भगवान रंगनाथ के सामने 60 फीट उंचा और करीब बीस फीट भूमि के भीतर धंसा हुआा स्वर्ण का एक ध्वज स्तंभ बना हुआ है। यहां एक संग्राहलय भी स्थित हैं जिसमें स्वर्ण प्रतिमाएं रखी गयी हैं। मंदिर का मुख्य द्वार 93 फीट उंचे मंडप से ढका हुआ है। मंदिर में ही एक विशाल रथ रखा हुआ है।

मंदिर के महोत्सव

मंदिर में प्रतिवर्ष ब्रह्मोत्सव के रूप में बड़ा आयोजन होता है। ये चैत्र माह में आयोजि होता है। ब्रह्मोत्सव दस दिन तक चलता है। प्रतिदिन मंदिर से भगवार रंगनाथ के श्री विग्रह को रथ में ले जाया जाता है। हजारों भक्त रस्सियों से रथ को खींचते हैं। उस दिन अष्टधातु की मूर्ति रथ के मध्य विराजित की जाती है। वहीं पौष पुत्रदा एकादशी पर भगवान रंगनाथ गर्भग्रह से बाहर निकल कर भक्तों को दर्शन देते हैं। ध्यान रखें कि मंदिर भ्रमण के दौरान आप गर्भगृह में तस्वीरें नहीं ले सकते।

(डिस्क्लेमर : यह पाठ्य सामग्री आम धारणाओं और इंटरनेट पर मौजूद सामग्री के आधार पर लिखी गई है। टाइम्स नाउ नवभारत इसकी पुष्टि नहीं करता है।)

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