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Raksha Bandhan Kyu Manaya Jata Hai: रक्षाबंधन क्यों मनाया जाता है? जानिए इसका इतिहास क्या है

Raksha Bandhan Kyu Manaya Jata Hai: रक्षाबंधन का त्योहार हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में आता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई में रंग-बिरंगी राखियां बांधती हैं। वहीं भाई अपनी बहनों को उनकी रक्षा करने का वचन देते हैं। कई जगह इस त्योहार को राखरी के नाम से भी जाना जाता है। यहां हम आपको बताएंगे राखी का त्योहार क्यों मनाया जाता है। इसका इतिहास क्या है।

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Raksha Bandhan History

Raksha Bandhan Kyu Manaya Jata Hai: भाई-बहन के प्रेम का पर्व रक्षाबंधन बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता है और इस साल राखी का त्योहार 19 अगस्त को मनाया जा रहा है। इस दिन बहनें शुभ मुहूर्त में अपने भाइयों के हाथ में राखी बांधती हैं। साथ ही उनकी लंबी उम्र और खुशहाल जीवन की कामना करती हैं। वहीं भाई भी अपनी बहनों की रक्षा करने का वचन देते हैं। इस पावन पर्व से कई कहानियां भी जुड़ी हुई हैं। चलिए जानते हैं रक्षाबंधन क्यों मनाया जाता है, क्या है इसका इतिहास और कहानी।

रक्षाबंधन क्यों मनाया जाता है (Raksha Bandhan Kyu Manaya Jata Hai)

रक्षाबंधन की एक कहानी महाभारत काल से जुड़ी है। जिसके अनुसार जब भगवान कृष्ण ने शिशुपाल का वध कर दिया था। तब भगवान कृष्ण की उंगली में चोट लग गई थी। जिससे रक्त बहने लगा था। तभी द्रौपदी ने अपनी साड़ी का एक टुकड़ा फाड़कर श्री कृष्ण की उंगली पर बांध दिया था । ऐसा माना जाता है कि जिस दिन ये घटना हुई उस दिन श्रावण मास की पूर्णिमा थी। कहते हैं तभी से इसी दिन रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाने लगा और बहनें अपने भाइयों के हाथ में रक्षासूत्र बांधने लगीं।

रक्षाबंधन का इतिहास (Raksha Bandhan History In Hindi)

रक्षाबंधन त्योहार का इतिहास काफी पुराना बताया जाता है। कहते हैं एक बार सम्राट सिकंदर की पत्नी ने अपने पति के दुश्मन राजा पोरस को रक्षा सूत्र बांधकर मुंह बोला भाई बना लिया था। वहीं राजा पोरस ने अपनी मुंह बोली बहन का मान रखते हुए उनके पति सम्राट सिकंदर को युद्ध में न मारने का वचन दिया था। कहते हैं युद्ध के दौरान पोरस को सिकंदर पर हमला करने के कई मौके मिले लेकिन राखी का वचन निभाते हुए उन्होंने सिकंदर को नहीं मारा।

Laveena Sharma
लवीना शर्माauthor

धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर की रहने वाली हूं। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट हूं। 10 साल से मीडिया में काम कर रही हूं। पत्रकारिता में करियर की शुरुआत न्यूज 24 से हुई। इसके बाद तमाम चैनलों में काम किया। जहां स्क्रिप्ट राइटिंग, एडिटिंग और एंकरिंग का अनुभव हासिल हुआ। रफ्तार यहीं नहीं रूकी अब चाह थी कुछ नया करने की जिसके लिए मैंने डिजिटल मीडिया में स्विच किया और मैं जनसत्ता से जुड़ गई। जनसत्ता में मैंने अध्यात्म सेक्शन लीड किया। इसके बाद पत्रिका में सेवाएं दी और अब timesnowhindi.com से जु़ड़ी हूं। यहां भी मैं अध्यात्म सेक्शन में कार्यरत हूं। भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और ज्योतिष शास्त्र में मेरा शुरू से ही लगाव रहा है। मेरी कोशिश रहती है कि मैं ऐसा कंटेट लिखूं जिससे बड़े बुजुर्ग ही नहीं बल्कि आज के युवा भी कनेक्ट कर सकें।

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