अध्यात्म

Pautrada Ekadashi Vrat Paran Time 2025: पौष पुत्रदा एकादशी का पारण कब करें, जानिए साल 2025 के आखिरी एकादशी व्रत का पारण समय और शुभ मुहूर्त

  • Agency by: Agency
  • Updated Dec 31, 2025, 07:37 AM IST

Pautrada Ekadashi Vrat Paran Time 2025 (पुत्रदा एकादशी 2025 का पारण कब है?) Paush Maas Putrada Ekadashi 2025 ka Paran kitne Baje Hai: 30 दिसंबर 2025 को साल की अंतिम एकादशी व्रत रखा गया है। इस व्रत के अगले दिन द्वादशी तिथि को पारण किया जाता है। बिना पारण व्रत को सफल नहीं माना जाता है। यह व्रत संतान सुख, धन-संपदा के लिए फलदायी माना जाता है। आइए जानते हैं कि पौष पुत्रदा एकादशी का पारण कब करें।

पौष पुत्रदा एकादशी का पारण कब करें

Pautrada Ekadashi Vrat Paran Time 2025: आज 30 दिसंबर 2025 को साल की अंतिम एकादशी पौष पुत्रदा एकादशी का व्रत रखा गया है। यह व्रत संतान सुख, धन-संपदा और सभी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए विशेष फलदायी माना जाता है। भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा से इस व्रत से पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-शांति बढ़ती है। एकादशी का व्रत अगले दिन द्वादशी तिथि पर पारण करके पूरा किया जाता है। इस कारण पौष पुत्रदा एकादशी का पारण 31 दिसंबर 2025 को किया जाएगा। आइए जानते हैं पारण का सही समय, शुभ मुहूर्त और विधि-विधान क्या है?

व्रत पारण का सही समय

वैदिक पंचांग के अनुसार, पौष पुत्रदा एकादशी व्रत का पारण 31 दिसंबर 2025 को दोपहर 01:29 बजे से 03:33 बजे के बीच करना सबसे शुभ है। इस मुहूर्त में पारण करने से व्रत का पूरा फल मिलता है। यदि किसी कारण यह समय निकल जाए, तो हरि वासर समाप्त होने के बाद भी पारण किया जा सकता है, लेकिन मुख्य मुहूर्त का पालन करना उत्तम है। पारण द्वादशी तिथि में ही करें, त्रयोदशी लगने से पहले ही करें।

31 दिसंबर 2025 के शुभ मुहूर्त

पारण के अलावा इस दिन अन्य पूजा या शुभ कार्यों के लिए ये मुहूर्त लाभकारी हैं।

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 05:24 से 06:19 बजे तक
  • प्रातः संध्या: सुबह 05:52 से 07:14 बजे तक
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 02:08 से 02:49 बजे तक
  • गोधूलि मुहूर्त: शाम 05:32 से 06:00 बजे तक
  • सायाह्न संध्या: शाम 05:35 से 06:57 बजे तक
  • अमृत काल: 1 जनवरी रात 11:20 से 12:46 बजे तक
  • निशिता मुहूर्त: 1 जनवरी रात 11:57 से 12:52 बजे तक
  • सर्वार्थ सिद्धि योग: पूरे दिन (सभी कार्यों में सफलता देने वाला दुर्लभ योग)
सर्वार्थ सिद्धि योग का पूरे दिन रहना पारण को और भी फलदायी बनाता है।

पौष पुत्रदा एकादशी व्रत पारण की विधि

सूर्योदय से पहले उठें, स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें। सूर्य देव को जल से अर्घ्य दें। घर के मंदिर को साफ करें और गंगाजल छिड़ककर शुद्ध करें। भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्ति या चित्र के सामने दीपक जलाएं। हल्दी-केसर का तिलक लगाएं, फूल चढ़ाएं और एकदशी माता की आरती करें। ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें। विष्णु सहस्रनाम या विष्णु चालीसा का पाठ करें।

सात्विक भोजन (फल, दूध, मिठाई आदि) का भोग लगाएं। भोग की थाली में तुलसी के पत्ते अवश्य रखें। पूजा के बाद प्रसाद स्वयं लें। इसके बाद सात्विक भोजन करें, जिसमें चावल जरूर शामिल करें। तामसिक भोजन (लहसुन, प्याज आदि) से दूर रहें। द्वादशी पर दान का विशेष महत्व है। अन्न, धन, कपड़े, पीले फल या तुलसी का पौधा ब्राह्मण या गरीबों को दान करें। इससे व्रत का पूर्ण फल मिलता है और जीवन में कभी कमी नहीं होती है।

एकादशी मैय्या की आरती

एकादशी मैय्या की आरती

इन बातों का रखें ध्यान

पारण से पहले तुलसी दल ग्रहण करें। यदि संभव हो, ब्राह्मण को भोजन कराएं। पूरे दिन सकारात्मक विचार रखें और क्रोध से बचें। पौष पुत्रदा एकादशी का व्रत और विधिपूर्वक पारण करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। नए साल की शुरुआत इस शुभ कार्य से करें ताकि पूरा वर्ष सुख-समृद्धि से भरा रहे।

डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी पंचांग और शास्त्रों पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।

जानिए मेष, वृषभ, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर, कुंभ और मीन राशि वालों का वार्षिक राशिफल। पढ़ें हिंदी में अध्यात्म से जुड़ी सभी छोटी बड़ी न्यूज़ और ताजा समाचार के लिए जुड़े रहें टाइम्स नाउ नवभारत से|

End of Article