Pradosh Puja Vrat Katha in Hindi: आज शुक्र प्रदोष व्रत पर जरूर पढ़ें या सुनें ये कथा, इसके बिना अधूरी है प्रदोष की पूजा
- Authored by: Mohit Tiwari
- Updated Jan 16, 2026, 05:09 PM IST
Pradosh Puja Vrat Katha in Hindi, शुक्र प्रदोष व्रत पूजा कथा 2026: माघ माह के कृष्ण पक्ष का प्रदोष व्रत 16 जनवरी को रखा जा रहा है। यह साल 2026 का दूसरा प्रदोष है। मान्यता है कि प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव और माता पार्वती का पूजन सभी दुखों से मुक्ति दिलाता है।वहीं, यह व्रत कथा के बिना अधूरा माना जाता है। आइए जानते हैं कि माघ प्रदोष व्रत की कथा क्या है?
प्रदोष व्रत कथा
Pradosh Puja Vrat Katha in Hindi: आज शुक्रवार, 16 जनवरी 2026 को माघ मास की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि है। इस कारण आज प्रदोष व्रत रखा जा रहा है। शुक्रवार के दिन पड़ने के कारण इसे शुक्र प्रदोष व्रत के नाम से जाना जाता है। शुक्र प्रदोष व्रत वैवाहिक सुख, प्रेम संबंधों में मधुरता, सौंदर्य, भौतिक सुख-सुविधाएं, धन-वैभव और हर तरह की मनोकामना पूर्ति के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है। इस दिन प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा के साथ व्रत कथा का पाठ करना अनिवार्य होता है, क्योंकि कथा सुनने-पढ़ने से ही व्रत पूर्ण फलदायी होता है। आज शाम प्रदोष काल (5:43 से 8:19 बजे तक) में शिवलिंग पर पूजन सामग्री में बेलपत्र, धतूरा, भांग, गंगाजल चढ़ाते हुए यह कथा अवश्य पढ़ें।
माघ मास शुक्र प्रदोष व्रत कथा
प्राचीन काल में अंबापुर नामक एक गांव में एक गरीब विधवा ब्राह्मणी रहती थी। वह भीख मांगकर किसी तरह अपना और अपने पुत्र का पेट पालती थी। एक दिन उसे जंगल में दो छोटे-छोटे बच्चे रोते हुए मिले। वे इतने छोटे थे कि अपने माता-पिता या घर का नाम भी नहीं बता पा रहे थे। ब्राह्मणी का हृदय करुणा से भर गया। उसने दोनों बच्चों को अपने घर लाकर पालने का निर्णय लिया और उन्हें अपना पुत्र मानकर उनका लालन-पालन करने लगी।
कुछ समय बाद वह दोनों बच्चों को लेकर महर्षि शांडिल्य के आश्रम गई और उनसे बच्चों के माता-पिता के बारे में पूछा। ध्यान लगाकर ऋषि ने बताया कि ये दोनों बच्चे विदर्भ देश के राजकुमार हैं। गंधर्व सेन नामक शत्रु राजा ने छल से उनका राज्य छीन लिया है और इन बच्चों को मारने के इरादे से जंगल में छोड़ दिया था।
यह सुनकर ब्राह्मणी बहुत दुखी हुई और बोली, ‘हे ऋषिवर! कोई ऐसा उपाय बताइए जिससे इन बच्चों को उनका खोया हुआ राज्य और पिता दोनों वापस मिल जाएं।’
महर्षि शांडिल्य ने कहा, ‘हे देवी! तुम इन बच्चों सहित शुक्रवार के प्रदोष व्रत करो। भगवान शिव की कृपा से इनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी।’
ब्राह्मणी और दोनों राजकुमारों ने पूरी श्रद्धा से शुक्र प्रदोष व्रत करना शुरू किया। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने आशीर्वाद दिया।
कुछ समय बाद बड़े राजकुमार का विवाह पड़ोसी राज्य की राजकुमारी अंशुमती से हो गया। अंशुमती के पिता ने अपनी सेना देकर गंधर्व सेन पर आक्रमण किया और युद्ध में विजय प्राप्त की। इस प्रकार दोनों राजकुमारों को उनका खोया हुआ राज्य वापस मिल गया। ब्राह्मणी मां को भी राजमहलों में सम्मान के साथ रखा गया और उसके दिन बदल गए। वह जीवन भर सुख-समृद्धि से रही।
कथा का फल
जो भी व्यक्ति शुक्र प्रदोष व्रत की यह कथा श्रद्धापूर्वक पढ़ता या सुनता है, भगवान शिव उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। विशेष रूप से वैवाहिक सुख, संतान सुख, खोया हुआ सम्मान और धन-वैभव वापस मिलता है।