Pradosh Vrat Kab Hai 2026: हर माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी पर प्रदोष व्रत रखा जाता है। फाल्गुन का महीना हिंदू कैलेंडर का आखिरी महीना है। अभी फाल्गुन माह का शुक्ल पक्ष चल रहा है। ऐसे में फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को लेकर संशय व्याप्त है।
इस कारण है कि फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 28 फरवरी 2026 की रात 8 बजकर 43 मिनट से प्रारंभ होकर 1 मार्च 2026 की शाम 7 बजकर 9 मिनट तक रहेगी। वहीं, प्रदोष व्रत सूर्यास्त के समय आने वाली त्रयोदशी में रखा जाता है, इसलिए इस बार व्रत 1 मार्च 2026, रविवार को रखा जा रहा है। रविवार होने के कारण यह रवि प्रदोष व्रत है।
प्रदोष व्रत पर पूजा का शुभ मुहूर्त (Pradosh Vrat Par Puja Ka Shubh Muhurat)
1 मार्च का दिन कई शुभ योगों से युक्त रहेगा। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 05:07 से 05:57 बजे तक रहेगा और प्रातः सन्ध्या 05:32 से 06:46 बजे तक रहेगी। अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:10 से 12:57 बजे तक रहेगा, जो किसी भी शुभ कार्य के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। विजय मुहूर्त 02:29 से 03:16 बजे तक रहेगा।
शाम के समय गोधूलि मुहूर्त 06:18 से 06:43 बजे तक और सायाह्न सन्ध्या 06:21 से 07:35 बजे तक रहेगी। निशिता मुहूर्त 2 मार्च की मध्य रात्रि 12:08 से 12:58 बजे तक रहेगा। अमृत काल 2 मार्च की सुबह 06:18 से 07:51 बजे तक रहेगा। इसी दिन रवि पुष्य योग और सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 06:46 से 08:34 बजे तक बनेंगे, जबकि रवि योग 08:34 बजे से 2 मार्च की सुबह 06:45 बजे तक प्रभावी रहेगा। इतने शुभ संयोग इस दिन को आध्यात्मिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण बना रहे हैं।
प्रदोष काल और पूजा का श्रेष्ठ समय
प्रदोष व्रत की पूजा सूर्यास्त के समय की जाती है। 1 मार्च को शाम लगभग 6 बजकर 20 मिनट से 7 बजकर 10 मिनट तक का समय प्रदोष पूजन के लिए विशेष शुभ रहेगा। इसी अवधि में भगवान शिव की आराधना करना फलदायी माना गया है। मान्यता है कि प्रदोष काल में शिव पूजा करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और ग्रह दोष शांत होते हैं। श्रद्धा से किया गया व्रत मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है।
प्रदोष व्रत की पूजा विधि (Pradosh Vrat Puja Vidhi)
प्रदोष व्रत के दिन सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प लें। दिनभर सात्विक भोजन करें या फलाहार लें। शाम को प्रदोष काल में पूजा स्थान को साफ कर भगवान शिव की प्रतिमा या शिवलिंग स्थापित करें। जल, दूध, दही, घी और शहद से अभिषेक करें और गंगाजल अर्पित करें। इसके बाद बेलपत्र, अक्षत, धतूरा और पुष्प चढ़ाएं। इसके साथ ही व्रत की कथा को पढ़ें या फिर सुनें। धूप-दीप प्रज्वलित कर ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें। इस दिन शिव पुराण का पाठ या श्रवण करना भी शुभ माना गया है। अंत में शिव आरती कर व्रत पूर्ण करें।
क्यों खास है रविप्रदोष
यह प्रदोष व्रत रविवार को है, इसलिए इसे रवि प्रदोष कहा जाएगा। इस दिन भगवान शिव के साथ सूर्य देव की पूजा भी लाभकारी मानी जाती है। सुबह सूर्य को अर्घ्य देने और आदित्य मंत्र जपने से आत्मबल और ऊर्जा में वृद्धि होती है। इस प्रकार पंचांग गणना के अनुसार 1 मार्च 2026 को फाल्गुन माह का अंतिम प्रदोष व्रत रखा जाएगा। शुभ योगों से युक्त यह दिन शिव आराधना और साधना के लिए अत्यंत अनुकूल रहेगा।
प्रदोष व्रत का पारण कब करें (Pradosh Vrat Ka Paran Kab Karen)
प्रदोष व्रत का पारण हमेशा चतुर्दशी तिथि को किया जाता है। ऐसे में आप 2 मार्च के दिन प्रदोष व्रत का पारण कर सकते हैं।
डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी पंचांग और शास्त्रों पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।
