अध्यात्म

साल 2025 की आखिरी और दिसंबर की तीसरी एकादशी कब है, जानिए तिथि और व्रत और पूजन मुहूर्त

Paush Putrada Ekadashi 2025 Date: साल 2025 के दिसंबर महीने में तीन एकादशी पड़ रही हैं। इसमें तीसरी एकादशी पौष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी पड़ रही है। महीने की शुरुआत भी मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी से हुई थी। आइए जानते हैं कि साल 2025 की अंतिम एकादशी कब है?

पौष पुत्रदा एकादशी कब है

पौष पुत्रदा एकादशी कब है

Paush Putrada Ekadashi 2025 Date: साल 2025 के अंतिम महीने दिसंबर में तीन एकादशी व्रत पड़ रहे हैं। इसमें से पहला मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी पड़ी है और दो पौष माह की एकादशी पड़ रही हैं। दिसंबर की शुरुआत और अंत भी एकादशी तिथि से ही हो रहा है।

1 दिसंबर 2025 को पहली एकादशी थी। जो मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी थी। वहीं, दूसरी सफला एकादशी 15 जनवरी को पड़ेगी। इसके बाद वैदिक पंचांग के अनुसार पौष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 30 दिसंबर 2025, मंगलवार को सुबह 07 बजकर 50 मिनट से शुरू होकर 31 दिसंबर 2025, बुधवार को सुबह 05 बजकर 02 मिनट तक रहेगी। 30 दिसंबर को सूर्योदय के समय एकादशी तिथि पूर्ण रूप से विद्यमान रहेगी और अधिकांश समय इसी दिन रहेगी, इसलिए पौष पुत्रदा एकादशी का व्रत 30 दिसंबर 2025 (मंगलवार) को ही रखा जाएगा।

30 दिसंबर 2025 के सभी शुभ मुहूर्त

इस दिन कई दुर्लभ और अत्यंत शुभ मुहूर्त बन रहे हैं जो पूजा, जप और संकल्प के लिए सर्वोत्तम हैं।

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 05:24 से 06:19 बजे (साधना और संकल्प के लिए सर्वश्रेष्ठ)
  • प्रातः संध्या: सुबह 05:51 से 07:13 बजे
  • अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:03 से 12:44 बजे (हर कार्य में विजय दिलाने वाला)
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 02:07 से 02:49 बजे
  • गोधूलि मुहूर्त: शाम 05:31 से 05:59 बजे
  • सायाह्न संध्या: शाम 05:34 से 06:56 बजे
  • अमृत काल: रात 11:35 बजे से 31 दिसंबर 01:03 बजे तक
  • निशिथा मुहूर्त: रात 11:57 बजे से 31 दिसंबर 12:51 बजे तक (रात्रि जागरण और विशेष पूजा के लिए उत्तम)

पौष पुत्रदा एकादशी व्रत पारण का समय

31 दिसंबर 2025, बुधवार को सुबह द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले पारण करना चाहिए। हरि वासर समाप्ति का समय सुबह 07:10 बजे तक रहेगा, इसलिए सुबह 05:02 बजे से 07:10 बजे के बीच व्रत का पारण करना सबसे उत्तम रहेगा। इस समय के बाद पारण करने से व्रत का पूरा फल नहीं मिलता है।

क्या है पौष पुत्रदा एकादशी का महत्व?

पौष पुत्रदा एकादशी को संतान प्राप्ति और संतान की सुख-समृद्धि के लिए सबसे प्रभावशाली एकादशी माना जाता है। जो दंपति लंबे समय से संतान सुख से वंचित हैं या संतान पक्ष में किसी प्रकार की बाधा है, उनके लिए इस व्रत का विधि-विधान से पालन करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। पुराणों में वर्णित कथा के अनुसार इस व्रत को करने से पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है और संतान दीर्घायु, स्वस्थ तथा विद्वान बनती है। यह एकादशी सौभाग्यवती एकादशी के समान ही फल प्रदान करती है, लेकिन विशेष रूप से पुत्र प्राप्ति की कामना के लिए जानी जाती है।

पूजा की सरल और प्रभावी विधि

व्रत के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और पीले या सफेद वस्त्र पहनें। हाथ में जल, फूल और अक्षत लेकर संकल्प लें कि आप संतान सुख की प्राप्ति के लिए यह व्रत कर रहे हैं। भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें, उन्हें पंचामृत स्नान कराएं, पीले फूल, तुलसी दल, चंदन और पीले वस्त्र अर्पित करें। भोग में पीली मिठाई, फल और खास तौर पर तुलसी युक्त प्रसाद चढ़ाएं। पूजा के दौरान ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें।

पुत्रदा एकादशी व्रत कथा का पाठ अवश्य करें। शाम को दीपदान करें और रात में जागरण या भजन-कीर्तन करें। अगले दिन ब्राह्मण या जरूरतमंद को भोजन कराकर दान-दक्षिणा दें और फिर शुभ मुहूर्त में व्रत खोलें। इस प्रकार 30 दिसंबर 2025 को रखा जाने वाला पौष पुत्रदा एकादशी व्रत संतान की कामना करने वाले दंपतियों के लिए वरदान स्वरूप सिद्ध हो सकता है। पूर्ण श्रद्धा और विधि-विधान से इस व्रत को करने पर भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।

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Mohit Tiwari
Mohit Tiwari author

मोहित तिवारी को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव है। इन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रतिष्ठित न्यूजपेपर में फील्ड रिपोर्टिंग से की थी। मोहित ... और देखें

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