अध्यात्म

Parshuram Dwadashi 2025: आज मनाई जाएगी परशुराम द्वादशी, जान लें इसकी पूजा विधि, मुहूर्त और महत्व

Parshuram Dwadashi 2025: हिंदू पंचांग के अनुसार परशुराम द्वादशी वैशाख शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को मनाई जाती है। जो इस बार 8 मई को पड़ रही है। जानिए इस दिन क्या करते हैं और इसकी पूजा विधि क्या है।

Image

Parshuram Dwadashi 2025

Parshuram Dwadashi 2025: इस साल परशुराम द्वादशी मोहिनी एकादशी के दिन ही यानी 8 मई 2025 को मनाई जाएगी। परशुराम द्वादशी के दिन भक्तजन भगवान परशुराम की पूजा-अर्चना करते हैं और व्रत रखते हैं। ऐसी मान्यता है कि परशुराम द्वादशी का व्रत उन लोगों के लिए बेहद फलदायी साबित होता है जिन्हें संतान प्राप्ति नहीं हो पा रही है। हिन्दू पुराणों में उल्लेख मिलता है कि परशुराम द्वादशी के दिन ही भगवान शिव ने परशुरामजी को पृथ्वी अधर्म का नाश करने के लिए दिव्य परशु अस्त्र प्रदान किया था।

परशुराम द्वादशी 2025 तिथि व मुहूर्त (Parshuram Dwadashi 2025 Date And Time)

परशुराम द्वादशी 8 मई को मनाई जाएगी। द्वादशी तिथि 8 मई की दोपहर 12 बजकर 29 मिनट से लेकर 9 मई की दोपहर 2 बजकर 56 मिनट तक रहेगी।

परशुराम द्वादशी के दिन क्या करते हैं (Parshuram Dwadashi Par Kya Karte Hai)

  • इस दिन भगवान परशुराम जी का ध्यान करें और उनसे मनोवांछित फल की कामना करें।
  • कई जगह इस दिन घर के वाहनों को फूल माला पहना कर उनकी पूजा की जाती है।
  • संभव हो तो इस दिन श्री विष्णु जी के मंदिर जरूर जाएं और अपने परिवार को सुख-समृद्धि की कामना करें।
  • मान्यता है इस दिन व्रत रखने से हर मनोकामना पूरी हो जाती है।

क्यों मनाई जाती है परशुराम द्वादशी? (Parshuram Dwadashi Kyu Manai Jati Hai)

ऐसी मान्यता है कि परशुराम द्वादशी के दिन भगवान शिव ने परशुराम जी को पृथ्वी पर बढ़ रहे अधर्म का नाश करने के लिए परशु अस्त्र प्रदान किया था। जिससे उन्होंने हैहयवंशी राजाओं का संहार किया।

Laveena Sharma
लवीना शर्माauthor

धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर की रहने वाली हूं। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट हूं। 10 साल से मीडिया में काम कर रही हूं। पत्रकारिता में करियर की शुरुआत न्यूज 24 से हुई। इसके बाद तमाम चैनलों में काम किया। जहां स्क्रिप्ट राइटिंग, एडिटिंग और एंकरिंग का अनुभव हासिल हुआ। रफ्तार यहीं नहीं रूकी अब चाह थी कुछ नया करने की जिसके लिए मैंने डिजिटल मीडिया में स्विच किया और मैं जनसत्ता से जुड़ गई। जनसत्ता में मैंने अध्यात्म सेक्शन लीड किया। इसके बाद पत्रिका में सेवाएं दी और अब timesnowhindi.com से जु़ड़ी हूं। यहां भी मैं अध्यात्म सेक्शन में कार्यरत हूं। भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और ज्योतिष शास्त्र में मेरा शुरू से ही लगाव रहा है। मेरी कोशिश रहती है कि मैं ऐसा कंटेट लिखूं जिससे बड़े बुजुर्ग ही नहीं बल्कि आज के युवा भी कनेक्ट कर सकें।

और पढ़ें
End of Article