बच्चों की परवरिश एक तपस्या है और यह तपस्या हर माता− पिता को करनी ही होती है। फिर भले ही उस तपस्या का स्वरूप और तरीका अलग ही क्यों न हो। हर मां का हृदय अपनी संतान के लिए अलग ही गुलाटियां खाता है तो हर पिता अपने बच्चे को अपने से भी आगे निकलता हुआ देखना चाहता है। आसपास के समाज में लगातार हो रहे बदलाव और बिखराव को देखकर आज माता पिता अपने बच्चे के भविष्य को लेकर शंकित हैं। वो हर यत्न करना चाहते हैं। हां बेशक ज्योतिष के उपाय माता पिता की इसमें मदद भी कर सकते हैं। आइये आपको बताते हैं उन प्रमुख उपायों के बारे में जिन्हे आज अपनाकर आप अपने बच्चे का कल सुधार सकते हैं।
बच्चों की परवरिश से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें
1- अच्छी परवरिश के जरिए बच्चे के भाग्य को बढ़ाया जा सकता है। माता-पिता दोनों मिलकर बच्चे पर ध्यान दें। माता− पिता अपने वात, पित्त और कफ को नियंत्रित करें। अपनी घबराहट नियंत्रण करना सीखें, क्योंकि बच्चे स्पंदन की भाषा समझते हैं। माता−पिता गुस्सा और महत्वाकांक्षाओं पर नियंत्रण करना सीखें।
2− कुंडली में मंगल, शुक्र, चंद्र का योग है तो बच्चे हमेशा भावनात्मक सहयोग चाहेंगे। भावनात्मक सहयोग की चाह में लड़कियां गलत रास्ते पर भटक जाती हैं।
3− रुद्राक्ष की माला पांच या सात मुखी पहनाएं। बच्चियों के साथ दोस्ताना व्यवहार रखें, शुक्रवार को चावल या साबूदाना की खीर किसी बुजुर्ग को बच्ची के हाथ से खिलवाएं।
4− पिता, भ्राता का सहयोग न मिलने पर भी बच्चों में भटकाव आ जाता है। पिता बच्चों के साथ बैठें, बात करें और उनके साथ समय व्यतीत करें।
5− मिट्टी के बर्तन में पानी भरकर कलश स्थापित करें। पीला कपड़ा लपेटकर बच्चे की तस्वीर या फोटो उसके नीचे रखें। धीरे-धीरे बच्चे का गुस्सा कम होगा।
6− घर में कलह, राहु, शनि खराब होने से बच्चा तरक्की नहीं करेगा।
7− घर में यथा संभव सात्विक माहौल रखें। सुबह शाम बच्चों को पूजा में शामिल जरूर करें।
8− सुबह उठकर बच्चे को सूर्य दर्शन जरूर कराएं। स्कूल जाने से पहले बच्चों को सूर्य देव को अर्घ्य देने की आदत डलवाएं। इससे उनका सूर्य ग्रह मजबूत होगा और बुद्धि एवं तेज की वृद्धि होगी।
9− अधिक से अधिक कोशिश करें कि घर में किसी तरह की चुगली आदि न हो। घर के अंदर सदैव ही ज्ञान की बातें करें। सुविचार पढ़ने की और बच्चों के साथ साझा करने की आदत डालें।
10− माता पिता बच्चाें के सामने आदर्श स्थापित करने का प्रयास करें।
परवरिश तपस्या का स्वरूप कैसा भी हो लेकिन फिर भी हर माता पिता का यह स्वप्न होता है कि उनकी संतान उत्तम हो, विलक्षण हो और वे अपना जीवन उत्कृष्ट रूप से जी सकें। लेकिन इस स्वप्न को कल साकार रूप में देखने के लिए आपको आज और अभी से मेहनत करनी होगी।
(डिस्क्लेमर: यह पाठ्य सामग्री आम धारणाओं और इंटरनेट पर मौजूद सामग्री के आधार पर लिखी गई है। टाइम्स नाउ नवभारत इसकी पुष्टि नहीं करता है।)
