अध्यात्म

Pana Sankranti 2025: पना संक्रांति कब है 2025 में, नोट कर लें सही तारीख, मुहूर्त, पूजा विधि और कथा

Pana Sankranti (Maha Vishuba Sankranti) 2025: जब सूर्य देव मेष राशि में प्रवेश करते हैं तो उस दिन मेष संक्रांति मनाई जाती है। जिसे ओडिशा में पना संक्रांति के नाम से जाना जाता है। जो इस बार 14 अप्रैल को मनाई जा रही है। इस दिन ओडिशा में फल, सत्तू, दही और अन्य चीजों से बने शर्बत पीने का विधान है।

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Pana Sankranti (Maha Vishuba Sankranti) 2025

Pana Sankranti (Maha Vishuba Sankranti) 2025 Date: पना संक्रांति के दिन ओडिशा के लोग एक-दूसरे को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं देते हैं। इसे भारत के विभिन्न राज्यों में अलग-अलग नामों से मनाया जाता है। जहां उत्तर भारत में इस दिन बैसाखी मनाई जाती है तो वहीं केरल में विशु और तमिलनाडु में पुथांडु पर्व मनाया जाता है। जब्कि असम में इस दिन बोहाग बिहू (Bihu 2025) मनाया जाता है। ओडिशा में पना संक्रांति का पर्व बहुत खुशी, सांस्कृतिक और धार्मिक प्रदर्शनों के साथ मनाया जाता है।

पना संक्रांति मुहूर्त 2025 (Pana Sankranti Muhurat 2025)

पना संक्रांति 202514 अप्रैल 2025, सोमवार
पना संक्रान्ति पुण्य काल 202505:57 AM से 12:22 PM
पना संक्रान्ति महा पुण्य काल05:57 AM से 08:05 AM
मेष संक्रान्ति का क्षण14 अप्रैल को 03:30 AM

पना संक्रांति पर क्या करते हैं (Pana Sankranti Par Kya Karte Hai)

पना संक्रांति सौर वर्ष का पहला दिन है। ओडिया की परंपरा के अनुसार, इस संक्रांति को हनुमान भगवान का जन्म हुआ था। इस दिन ओडिशा के लोग पना से भरे एक छोटे बर्तन का उपयोग करते हैं। फिर इस बर्तन के तल पर एक छेद बनाया जाता है, जो बारिश का प्रतिनिधित्व करते हुए पानी को गिरने देता है। इस दिन भगवान सूर्य उत्तरायण का आधा सफर पूरा कर लेते हैं। पना संक्रांति पर स्नान-दान, पितरों का तर्पण और मधुसूदन भगवान की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। इसके अलावा इस दिन सूर्य को अर्घ्य जरूर देना चाहिए।

Laveena Sharma
लवीना शर्माauthor

धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर की रहने वाली हूं। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट हूं। 10 साल से मीडिया में काम कर रही हूं। पत्रकारिता में करियर की शुरुआत न्यूज 24 से हुई। इसके बाद तमाम चैनलों में काम किया। जहां स्क्रिप्ट राइटिंग, एडिटिंग और एंकरिंग का अनुभव हासिल हुआ। रफ्तार यहीं नहीं रूकी अब चाह थी कुछ नया करने की जिसके लिए मैंने डिजिटल मीडिया में स्विच किया और मैं जनसत्ता से जुड़ गई। जनसत्ता में मैंने अध्यात्म सेक्शन लीड किया। इसके बाद पत्रिका में सेवाएं दी और अब timesnowhindi.com से जु़ड़ी हूं। यहां भी मैं अध्यात्म सेक्शन में कार्यरत हूं। भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और ज्योतिष शास्त्र में मेरा शुरू से ही लगाव रहा है। मेरी कोशिश रहती है कि मैं ऐसा कंटेट लिखूं जिससे बड़े बुजुर्ग ही नहीं बल्कि आज के युवा भी कनेक्ट कर सकें।

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