Margashirsha Maas Ki Katha: मार्गशीर्ष मास हिन्दू पंचांग का नवां मास माना जाता है। यह अग्रहायण मास या मार्गशीर्ष के नाम से भी जाना जाता है। यह मास सूर्य के धनु राशि में प्रवेश करने के बाद शुरू होता है और लगभग दिसंबर-जनवरी के बीच पड़ता है। इस महीने में व्रत कथा का पाठ करना बेहद शुभ माना जाता है। यहां मार्गशीर्ष मास की कथा लिखित रूप से मौजूद है, इसे आप पढ़ सकते हैं।
मार्गशीर्ष मास की कथा-
मार्गशीर्ष मास की पौराणिक कथा के अनुसार बहुत समय पहले, एक ब्राह्मण ने भगवान विष्णु की भक्ति में लीन होकर सारा साल व्रत और तपस्या की। जब मार्गशीर्ष मास आया, तब भगवान विष्णु ने उनके तप और भक्ति को देखकर उन्हें दर्शन दिए। कहा जाता है कि मार्गशीर्ष मास में विष्णु भगवान की भक्ति विशेष फलदायक होती है। इस मास में भगवान विष्णु की पूजा करने से पाप नष्ट होते हैं, धन-संपत्ति में वृद्धि होती है, और संसारिक एवं आध्यात्मिक जीवन में सुख प्राप्त होता है। इसे “सोने का महीना” भी कहा जाता है क्योंकि इस मास में सूरज और चंद्रमा की स्थिति विशेष रूप से धन और वैभव देने वाली मानी जाती है।
मार्गशीर्ष मास मंत्र-
मार्गशीर्षोऽधिकस्तस्मात्सर्वदा च मम प्रियः ।।
उषस्युत्थाय यो मर्त्यः स्नानं विधिवदाचरेत् ।।
तुष्टोऽहं तस्य यच्छामि स्वात्मानमपि पुत्रक ।।
मार्गशीर्ष मास में क्या किया जाता है?
मार्गशीर्ष मास में विष्णु भगवान का सांकेतिक रूप से स्नान, दीपदान और भजन अत्यंत शुभ माना जाता है। इस मास में अन्न, वस्त्र, तुलसी पौधा, गाय और धन का दान करने से विशेष फल मिलता है। मार्गशीर्ष मास में पवित्र नदी में स्नान करने से सभी पाप नष्ट माने जाते हैं।
