अध्यात्म

Makar Sankranti Katha: शनि और सूर्य देव की कहानी, मकर संक्रांति पर जरूर पढ़ें ये कथा

  • Authored by: Srishti
  • Updated Jan 15, 2026, 06:40 AM IST

Makar Sankranti Ki Katha: मकर संक्रांति पर सूर्यदेव की पूजा की जाती है। इस दिन सूर्य धनु राशि से निकलकर पुत्र शनि के स्वामित्व वाली मकर राशि में प्रवेश करते हैं। दोनों ग्रहों के बीच पिता और पुत्र का संबंध होने के बावजूद विपरीत स्वभाव है। यहां से आप मकर संक्रांति की कथा पढ़ सकते हैं।

शनि और सूर्य देव की कहानी (pc: canva)

शनि और सूर्य देव की कहानी (pc: canva)

Makar Sankranti Ki Katha: श्रीमद्भागवत के अनुसार, सूर्यदेव की दो पत्नियां मानी जाती हैं। एक का नाम छाया है और दूसरी का नाम संज्ञा। संज्ञा को भगवान विश्वकर्मा की पुत्री बताया गया है। विवाह के बाद सूर्य के तेज को सहन न कर पाने के कारण संज्ञा ने अपनी छाया को सूर्य के पास छोड़ दिया और स्वयं तपस्या के लिए वन चली गईं। छाया से कर्म और न्याय के देवता शनिदेव हुए और संज्ञा से धर्म और न्याय के देवता यमराज हुए।

कथा के अनुसार, छाया ने अपने पुत्र शनि देव को अधिक स्नेह दिया। सूर्य देव ने छाया को अपनी दूसरी पत्नी संज्ञा के पुत्र यमराज से भेदभाव करते देख लिया था। इस बात से नाराज होकर सूर्य देव ने संज्ञा और उनके पुत्र शनि को अपने से अलग कर दिया था। इससे शनि देव और उनकी माता छाया ने सूर्य देव से आहत होकर उन्हें कुष्ठ रोग का शाप दे दिया था। इसके कारण सूर्य देव का कुछ समय के लिए तेज और प्रभाव कम हो गया। इसी कारण सूर्य और शनि को एक-दूसरे का शत्रु ग्रह माना गया है।

इसके बाद क्रोध में आकर सूर्य देव ने शनि के घर को जला दिया। जिसे कुंभ राशि कहा जाता है। इस घटना से शनि देव और उनकी माता छाया को भारी कष्ट सहना पड़ा। यह देखकर यमराज अत्यंत व्यथित हुए और उन्होंने अपने पिता सूर्य देव को समझाया। यमराज की बातों से सूर्य देव का गुस्सा शांत हुआ और वे शनि के धाम पहुंचे। लेकिन वहां सब कुछ जल चुका था। उस समय शनि देव के पास पूजा के लिए केवल काले तिल ही उपलब्ध थे। उन्होंने उन्हीं तिलों से सूर्य देव की विधि पूर्वक आराधना की।

शनि का यह विनम्र भाव और भक्ति देखकर सूर्य देव का हृदय पिघल गया। वे शनि की श्रद्धा से प्रसन्न हुए और उन्हें आशीर्वाद दिया कि जब मैं तुम्हारे दूसरे घर, यानी मकर राशि में प्रवेश करूंगा तब धन, अन्न और समृद्धि का संचार होगा। इससे सभी कष्ट दूर होंगे। मान्यता है कि तिल के कारण ही शनि देव को फिर से वैभव और सम्मान प्राप्त हुआ। इसी वजह से शनि देव को तिल अत्यंत प्रिय माना जाता है। मकर संक्रांति के दिन तिल से सूर्य और शनि की पूजा, दान और स्नान का विशेष महत्व बताया गया है।

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सृष्टि टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की फीचर डेस्क से जुड़ी कंटेंट राइटर हैं, जो मुख्य रूप से धर्म और लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिखती हैं। सृष्टि को आध्यात्... और देखें

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