शिव जी को क्यों चढ़ाया जाता है 3 पत्तों वाला बेलपत्र? जानें इस साल कैसा बेलपत्र चढ़ाना होगा शुभ
- Authored by: Srishti
- Updated Feb 3, 2026, 11:45 AM IST
Belpatra Kaisa Chadhana Chahie: महाशिवरात्रि पर महादेव को 3 पत्तों वाला बेलपत्र जरूर चढ़ाया जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि 3 पत्तों वाला बेलपत्र ही क्यो? इसके पीछे की कहानी हम आपको बताते हैं। साथ ही इस साल आपको कैसा बेलपत्र चढ़ाना है, ये भी आप यहां से जान सकते हैं।
शिवलिंग पर 3 पत्तों वाला बेलपत्र क्यों चढ़ाया जाता है? (pc: canva)
Belpatra Kaisa Chadhana Chahie: महाशिवरात्रि आ रही है और इसकी तैयारियां भी शुरू हो चुकी हैं। महादेव के भक्त इस खास दिन पर उन्हें प्रसन्न करने का हर तरीका आजमाते हैं। भोलेबाबा के प्रिय भोज से लेकर प्रिय फल-फूल तक, सब अर्पित किया जाता है। महाशिवरात्रि पर बेलपत्र चढ़ाने की परंपरा काफी पुरानी है। खासतौर से तीन पत्तियों वाला बेलपत्र ही चढ़ाया जाता है। लेकिन क्या आप इसके पीछे का कारण जानते हैं। यहां हम आपको बेलपत्र से जुड़े सभी सवालों के जवाब बता रहे हैं।
शिव जी को 3 पत्तों वाला बेलपत्र क्यों चढ़ाया जाता है?
महाशिवरात्रि पर भोले बाबा को तीन पत्तियों का बेलपत्र अर्पित किया जाता है। असल में बेलपत्र के ये 3 पत्ते त्रिदेव हैं यानी ब्रह्मा, विष्णु और महेश। जब ये तीनों पत्ते एक ही डंडी में जुड़े होते हैं तो त्रिपुंड यानी कि तीन रेखाओं और त्रिगुणों, सत, रज और तम का भी प्रतीक माने जाते हैं। शिवलिंग पर इसे चढ़ाना त्रिलोक में सर्वोच्च मानने का संकेत है। और मान्यता ये भी है कि बेलपत्र की ठंडी प्रकृति भगवान शंकर की उग्र उर्जा को शीतल रखती है। इससे भक्त की भक्ति तुरंत स्वीकार होती है। अगर बेलपत्र टूटा हुआ या कटा हुआ हो तो शिव जी को नहीं चढ़ाना चाहिए। इसलिए जब भी बेलपत्र चढ़ाएं तो तीन पत्तों वाला बेलपत्र ही चढ़ाएं।
अगर तीन पत्तियों वाला बेलपत्र न मिले तो क्या चढ़ाएं?
अगर आपको तीन पत्तियों वाला बेलपत्र नहीं मिलता है तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। आप आसानी से 5, 7, 9, 11 या 13 पत्ती वाले बेलपत्र भी चढ़ा सकते हैं। ये भी शुभ होते हैं।
बेलपत्र चढ़ाने के नियम-
- बेलपत्र को अनामिका, अंगूठा और मध्यमा उंगली से पकड़कर चढ़ाएं।
- मध्य की पत्ती को पकड़कर ही इसे शिवजी को अर्पित करें।
- बेलपत्र हमेशा उलटा (चिकना भाग) शिवलिंग की ओर रखते हुए चढ़ाएं।
- बेलपत्र के कटी हुई या टूटी हुई पत्तियों को न चढ़ाएं।
- पीला, सूखा, मुरझाया हुआ या कीड़े-मकोड़ों से क्षतिग्रस्त बेलपत्र अर्पित नहीं करना चाहिए।
- बेलपत्र के पत्र में तीन से अधिक पत्तियां होने पर भी वे एक ही डंडी से जुड़ी होनी चाहिए।
क्या बेलपत्र बासी होता है?
नहीं, बेलपत्र कभी बासी नहीं होता है। ऐसी मान्यता है कि बेलपत्र जूठा या फिर बासी नहीं होता है। मान्यता है कि पहले चढ़े बेलपत्र को अर्पित करने से भी आपकी पूजा संपूर्ण होती है और शिव जी का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
क्या पहले चढ़ाया गया बेलपत्र फिर से चढ़ाया जा सकता है?
भगवान शिव की एक खासियत है कि वो पुनः अर्पण किए गए बेलपत्र को भी स्वीकार करते हैं। बेलपत्र कभी पुराना नहीं होता है। अगर कोई बेलपत्र पहले चढ़ाया गया हो और वह अभी भी साफ, त्रिदली और अखंड अवस्था में है, तो उसे धोकर पुनः चढ़ाया जा सकता है। ये शिव जी की उदारता का प्रतीक है और यह दर्शाता है कि वे भक्ति और भावना को अधिक महत्व देते हैं।