15 या 16 फरवरी, कब रखा जाएगा महाशिवरात्रि व्रत? जानिए सही तिथि, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त
- Authored by: Mohit Tiwari
- Updated Feb 5, 2026, 09:27 PM IST
Mahashivratri 2026 Mei Kab Hai: फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी और चतुर्दशी तिथि के मेल पर महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। माना जाता है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। साल 2026 में महाशिवरात्रि की तिथि को लेकर कन्फ्यूजन है, इसका कारण चतुर्दशी तिथि का दो दिन होना है। आइए जानते हैं कि साल 2026 में महाशिवरात्रि की तिथि क्या है?
महाशिवरात्रि व्रत 2026
Mahashivratri Kab Hai: महाशिवरात्रि हिंदू धर्म का एक प्रमुख पर्व है, जो भगवान शिव की आराधना और उपासना के लिए समर्पित माना जाता है। हर साल यह पर्व फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन शिवभक्त व्रत रखते हैं, शिवलिंग का अभिषेक करते हैं और रात्रि जागरण कर भगवान शिव की विशेष पूजा करते हैं। साल 2026 में महाशिवरात्रि की तिथि को लेकर लोगों के मन में कन्फ्यूजन है कि व्रत 15 फरवरी को रखा जाएगा या 16 फरवरी को रखा जाएगा। आइए जानते हैं कि इस दिन व्रत कब रखा जाएगा?
महाशिवरात्रि 2026 कब है?
हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी तिथि का आरंभ 15 फरवरी 2026 को शाम 5 बजकर 4 मिनट से हो रहा है और यह तिथि 16 फरवरी 2026 को शाम 5 बजकर 34 मिनट तक रहेगी। महाशिवरात्रि की पूजा का सबसे महत्वपूर्ण समय प्रदोष काल से लेकर निशिता काल तक माना जाता है। इसी वजह से महाशिवरात्रि में उदया तिथि नहीं, बल्कि प्रदोष व्यापिनी तिथि को मान्यता दी जाती है। ऐसे में 15 फरवरी की शाम को प्रदोष काल में चतुर्दशी तिथि मौजूद है, इसलिए महाशिवरात्रि का व्रत 15 फरवरी 2026, रविवार को ही रखा जाएगा, जबकि व्रत का पारण 16 फरवरी को होगा।
महाशिवरात्रि क्यों मनाई जाती है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महाशिवरात्रि की रात भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। इसके अलावा यह दिन शिव-तत्व की आराधना का भी प्रतीक है। माना जाता है कि इस दिन सच्चे मन से शिव की उपासना करने से जीवन के दुख, भय और नकारात्मकता दूर होती है। महाशिवरात्रि को संयम, साधना और आत्मशुद्धि का पर्व माना जाता है, इसलिए इस दिन व्रत और रात्रि जागरण का विशेष महत्व है।
महाशिवरात्रि पूजा मुहूर्त 2026
- महाशिवरात्रि व्रत: 15 फरवरी 2026, रविवार
- निशिता काल पूजा समय: रात 12:09 बजे से 01:01 बजे तक (16 फरवरी)
- व्रत पारण समय: सुबह 06:59 बजे से दोपहर 03:24 बजे तक
- रात्रि प्रथम प्रहर पूजा: शाम 06:11 से रात 09:23 तक
- रात्रि द्वितीय प्रहर पूजा: रात 09:23 से सुबह 12:35 तक
- रात्रि तृतीय प्रहर पूजा: सुबह 12:35 से दोपहर 03:47 तक
- रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा: सुबह03:47 से सुबह 06:59 तक
महाशिवरात्रि की पूजा विधि
महाशिवरात्रि के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। व्रत का संकल्प लें। घर या मंदिर में शिवलिंग पर जल, दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक करें। इसके बाद बेलपत्र, भस्म, सफेद फूल, धतूरा और अक्षत अर्पित करें। ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें या शिव चालीसा का पाठ करें। रात में चारों प्रहर में अलग-अलग समय पर शिव पूजन करने की परंपरा है। अंत में भगवान शिव की आरती करें और अगले दिन व्रत का पारण करें।
महाशिवरात्रि व्रत का महत्व
महाशिवरात्रि का व्रत हिंदू धर्म में अत्यंत फलदायी माना गया है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियम से व्रत रखने वाले भक्त पर भगवान शिव की विशेष कृपा होती है। यह व्रत न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा है, बल्कि आत्मसंयम, साधना और सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाने का भी माध्यम माना जाता है।
डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी शास्त्रों पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।