Gupt Navratri Ghatasthapana Muhurat 2026 : गुप्त नवरात्रि के पहले दिन घट स्थापना का क्या है शुभ मुहूर्त, जानिए गुप्त नवरात्रि की पूरी पूजा विधि
- Authored by: Mohit Tiwari
- Updated Jan 19, 2026, 07:03 AM IST
Gupt Navratri Ghatasthapana Muhurat 2026 : साल 2026 में 19 जनवरी से माघ माह की गुप्त नवरात्रि शुरू हो गई हैं। इस नवरात्रि में देवी माता के 10 महाविद्या स्वरूपों का पूजन किया जाता है। 19 जनवरी को घटस्थापना का मुहूर्त क्या है और घटस्थापना कैसे करें। आइए जानते हैं।
गुप्त नवरात्रि पर घट स्थापना कैसे करें और पूजा विधि
Gupt Navratri Ghatasthapana Muhurat 2026 : हिंदू धर्म में माघ मास की गुप्त नवरात्रि को साधना, आत्मशुद्धि और शक्ति उपासना का विशेष पर्व माना जाता है। साल 2026 में माघ गुप्त नवरात्रि 19 जनवरी से शुरू हो रही है। यह नवरात्रि बाहरी उत्सव से अधिक आंतरिक साधना और गुप्त पूजा के लिए जानी जाती है। इस दौरान देवी शक्ति की आराधना, घट स्थापना और मंत्र साधना से विशेष फल की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि माघ गुप्त नवरात्रि में की गई साधना जल्दी फल देती है और साधक को मानसिक, आध्यात्मिक और ऊर्जा स्तर पर मजबूती प्रदान करती है।
माघ गुप्त नवरात्रि में घट स्थापना क्यों की जाती है?
घट स्थापना को देवी शक्ति के आगमन का प्रतीक माना जाता है। घट यानी कलश को जीवन, ऊर्जा और सृष्टि का स्वरूप कहा गया है। जब घट स्थापना की जाती है, तो माना जाता है कि देवी मां पूरे नवरात्रि काल तक उसी स्थान पर विराजमान रहती हैं। इससे घर और पूजा स्थल में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और साधना को स्थिरता मिलती है।
माघ गुप्त नवरात्रि 2026 पर घट स्थापना शुभ मुहूर्त
माघ गुप्त नवरात्रि 2026 में घट स्थापना सोमवार, 19 जनवरी को की जाएगी। इस दिन प्रातः काल का समय घट स्थापना के लिए सबसे शुभ माना गया है। सुबह 07:14 बजे से 10:46 बजे तक का समय घट स्थापना और देवी पूजन के लिए अनुकूल रहेगा। इसके अलावा जो लोग अभिजित मुहूर्त में पूजा करना चाहते हैं, वे दोपहर 12:11 बजे से 12:53 बजे के बीच घट स्थापना कर सकते हैं। दोनों ही मुहूर्त शक्ति साधना के लिए अच्छे माने गए हैं।
माघ गुप्त नवरात्रि में घट स्थापना की सही विधि
घट स्थापना के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ लाल या पीले वस्त्र धारण करें। पूजा स्थान को साफ करके पूर्व दिशा की ओर मुख करके चौकी स्थापित करें। चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर देवी दुर्गा की प्रतिमा या चित्र रखें। इसके बाद मिट्टी के पात्र में मिट्टी भरकर जौ बो दें। तांबे या मिट्टी के कलश में जल, गंगाजल, अक्षत, हल्दी, रोली, सुपारी और एक सिक्का डालें। कलश के मुख पर आम के पत्ते रखें और ऊपर लाल कपड़े में लिपटा नारियल स्थापित करें। इसके बाद कलश को जौ वाले पात्र के ऊपर रखकर देवी का आवाहन करें।
माघ गुप्त नवरात्रि में देवी पूजन कैसे करें?
घट स्थापना के बाद सबसे पहले गणेश जी का पूजन करें। इसके बाद दीप प्रज्वलित करें और मां दुर्गा का ध्यान करते हुए आवाहन करें। देवी को जल और पंचामृत से स्नान कराएं और लाल चुनरी, सिंदूर, पुष्प और भोग अर्पित करें। पूजा के दौरान मन को शांत रखें और पूर्ण श्रद्धा के साथ साधना करें। गुप्त नवरात्रि में पूजा को दिखावे से दूर रखना विशेष रूप से फलदायी माना जाता है।
साल 2026 की पहली नवरात्रि क्यों है माघ गुप्त नवरात्रि
माघ गुप्त नवरात्रि साल 2026 की पहली नवरात्रि मानी जा रही है। साल में कुल चार नवरात्रि आती हैं, जिनमें चैत्र और शारदीय नवरात्रि सामान्य रूप से मनाई जाती हैं, जबकि माघ और आषाढ़ नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहा जाता है। गुप्त नवरात्रि को यह नाम इसलिए दिया गया है क्योंकि इसमें पूजा, मंत्र जाप और साधना को निजी और गोपनीय रखा जाता है। यह समय विशेष रूप से साधकों, तांत्रिक उपासकों और ध्यान करने वालों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
माघ गुप्त नवरात्रि का क्या है महत्व?
माघ माह अपने आप में ही पुण्यकारी माना गया है और जब इसी मास में नवरात्रि आती है, तो इसका महत्व और बढ़ जाता है। इस दौरान देवी के गूढ़ स्वरूपों की उपासना की जाती है। माना जाता है कि इन नौ दिनों में देवी शक्ति धरती के अधिक निकट रहती हैं, जिससे मंत्र जाप और साधना जल्दी प्रभाव दिखाते हैं। माघ गुप्त नवरात्रि आत्मिक शुद्धि, भय से मुक्ति और मन की स्थिरता प्राप्त करने का श्रेष्ठ समय मानी जाती है।
माघ गुप्त नवरात्रि में कौन से मंत्रों का जाप करें?
इस नवरात्रि में मंत्र जाप का विशेष महत्व होता है। साधक अपनी क्षमता और श्रद्धा के अनुसार मंत्रों का जाप कर सकते हैं। देवी साधना के लिए 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे' मंत्र को अत्यंत प्रभावशाली माना गया है। इसके अलावा 'ॐ दुं दुर्गायै नमः' मंत्र का जाप भी किया जा सकता है। जो लोग पाठ करना चाहते हैं, वे दुर्गा सप्तशती, दुर्गा चालीसा या 'या देवी सर्वभूतेषु' मंत्र का पाठ कर सकते हैं।
गुप्त नवरात्रि के नियम और विसर्जन विधि क्या है?
माघ गुप्त नवरात्रि की साधना को पूर्णतः गुप्त रखने की परंपरा है। इन नौ दिनों में सात्विक भोजन करें और नकारात्मक विचारों से दूर रहें। अखंड दीप जलाना शुभ माना जाता है। नवरात्रि का विसर्जन अष्टमी या नवमी तिथि को अपनी श्रद्धा के अनुसार किया जाता है। विसर्जन से पहले कन्या पूजन और दान करने से साधना पूर्ण मानी जाती है। कलश में उगाए गए जौ को देवी का प्रसाद मानकर विधिपूर्वक विसर्जित किया जाता है।
डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी शास्त्रों पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।