अध्यात्म

Baba Hariharnath Mandir: जहां भगवान विष्णु संग होती है महादेव की पूजा, भगवान श्रीराम ने करवाया था निर्माण

बिहार का हरिहर नाथ मंदिर शायद देश का एकमात्र ऐसा मंदिर है, जहां गर्भगृह में एक ही साथ भगवान विष्णु और भगवान शिव की पूजा होती है। सारण जिले के सोनपुर में गंडक और गंगा के तट पर स्थित यह मंदिर आम से लेकर खास शैव और वैष्णव संप्रदाय के लोगों के लिए आस्था का केंद्र है।

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बाबा हरिहर नाथ मंदिर ,सोनपुर ,बिहार

छपरा: बिहार का हरिहर नाथ मंदिर शायद देश का एकमात्र ऐसा मंदिर है, जहां गर्भगृह में एक ही साथ भगवान विष्णु और भगवान शिव की पूजा होती है। सारण जिले के सोनपुर में गंडक और गंगा के तट पर स्थित यह मंदिर आम से लेकर खास शैव और वैष्णव संप्रदाय के लोगों के लिए आस्था का केंद्र है।

हरिहरनाथ मंदिर न सिर्फ धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र है, बल्कि ऐतिहासिक और पौराणिक दृष्टिकोण से भी विशेष महत्व रखता है। श्रावण माह में इस मंदिर की महिमा और भी बढ़ जाती है, जब हजारों की संख्या में शिवभक्त यहां जलाभिषेक और दर्शन के लिए पहुंचते हैं। गंगा और गंडक नदियों के संगम पर बसे सोनपुर स्थित यह मंदिर भगवान शिव और विष्णु की संयुक्त आराधना का प्रतीक है। बताया जाता है कि बाबा हरिहर नाथ ऐसा शिवालय है, जहां स्थापित शिवलिंग के आधे भाग में शिव (हर) और आधे भाग में विष्णु (हरि) का निवास है। एक ही गर्भगृह में विराजे दोनों देव एक साथ हरिहर कहलाते हैं।

हरिहरनाथ मंदिर का निर्माण स्वयं भगवान श्रीराम ने करवाया था

न्यूज एजेंसी आईएएनएस के मुताबिक मान्यता है कि हरिहरनाथ मंदिर का निर्माण स्वयं भगवान श्रीराम ने करवाया था। कहा जाता है कि श्रीराम ने यहां अहिल्या उद्धार के पश्चात विश्राम किया और फिर शिवलिंग की स्थापना कर पूजा की। एक अन्य मान्यता के अनुसार, इसकी स्थापना स्वयं ब्रह्मा ने शैव और वैष्णव संप्रदाय को एक-दूसरे के पास लाने के लिए की थी। गज-ग्राह की पुराण कथा भी प्रमाण है। इसी स्थान पर लंबे संघर्ष के बाद शैव और वैष्णव मतावलंबियों का संघर्ष विराम हुआ था। इस क्षेत्र में शैव और वैष्णव संप्रदाय के लोग एक साथ कार्तिक पूर्णिमा का स्नान और जलाभिषेक करते हैं।

हर-हर महादेव के जयकारों से गूंजता है मंदिर

बताया जाता है कि मुगल शासक औरंगजेब के शासनकाल में यह मंदिर क्षतिग्रस्त हुआ, जिसे राम नारायण ने 18वीं शताब्दी में फिर से बनवाया।

मंदिर के पुजारी सुशील चन्द्र शास्त्री ने समाचार एजेंसी आईएएनएस को बताया कि भगवान शिव के अत्यंत प्रिय महीने श्रावण माह में इस मंदिर की रौनक बढ़ जाती है। दूर-दराज से श्रद्धालु यहां जल लेकर पहुंचते हैं और हर-हर महादेव के जयकारों से मंदिर परिसर गूंज उठता है।

सावन के महीने में दर्शन के लिए विशेष व्यवस्था

मंदिर समिति के अनुसार, हर साल लाखों शिवभक्त यहां जल अर्पण करते हैं। वर्तमान में मंदिर के प्रबंधन की जिम्मेदारी बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड के अधीन है। सुरक्षा और व्यवस्था को देखते हुए श्रावण मास में यहां विशेष व्यवस्था की जाती है। मंदिर के पुजारी और भक्तों के अनुसार, यह मनोकामना मंदिर है। पुजारी बताते हैं कि यहां पहुंचकर पूजा अर्चना करने पर अद्भुत ऊर्जा मिलती है। भक्तों को लगता है कि यहां दोनों देवों से शक्ति मिलती है। भगवान विष्णु को सृष्टि का पालक और भगवान शिव को संहार करने वाला देव माना जाता है, ऐसे में भक्तों को लगता है कि एक मंदिर पहुंचकर दोनों देव खुश हो जाते हैं।

हर साल सोनपुर मेला लगता है

हरिहरनाथ मंदिर सिर्फ धार्मिक कारणों से नहीं, बल्कि सांस्कृतिक रूप से भी चर्चित है। यहीं पर प्रत्येक वर्ष सोनपुर मेला लगता है, जो एशिया का सबसे बड़ा पशु मेला माना जाता है। श्रावण माह में मंदिर और संगम तट दोनों ही स्थानों पर धार्मिक अनुष्ठान, भजन-कीर्तन, और महादेव की विशेष झांकी का आयोजन होता है। श्रद्धा, भक्ति और पौराणिक इतिहास का यह संगम आज भी सोनपुर को बिहार के धार्मिक मानचित्र पर एक विशिष्ट पहचान दिलाता है। (आईएएनएस इनपुट)

Sanjeev Dubey
संजीव कुमार दुबेauthor

पत्रकारिता में मेरे सफर की शुरुआत 20 साल पहले हुई। 2002 अक्टूबर में टीवी की रुपहले दुनिया में दाखिल हुआ। शुरुआत टीवी की दुनिया के उस पहलू से हुई जहां हर खबर को उसके मुताबिक आकार दिया जाता है यानी उसे कसा जाता है। सहारा टीवी में मेरे कामकाज की शुरुआत पैकेजिंग से हुई जहां खबरों को अलग-अलग प्रारूपों में गढ़ने का काम होता है। फिर पीसीआर में आउटपुट एडिटर की भूमिका निभाने का मौका मिला जहां तुरंत निर्णय कर खबरों को ब्रेक करने की चुनौती रहती है। न्यूजरूम की गहमागमी के बीच रनडाउन तैयार करने की जिम्मेदारी भी बखूबी निभाई। यहां ब्रेकिंग, हार्ड कोर की खबरों और फीचर्ड प्रोग्रामिंग ने मेरे अनुभव का दायरा तो बढ़ाया ही उसमें गहराई एवं पैनापन भी दिया। 2011 में टेलिविजन न्यूज की दुनिया को अलविदा कहना पड़ा। अक्टूबर 2011 में Zee News की हिंदी वेबसाइट को अपनी अगवुाई में लॉन्च करने का मौका मिला। डिजिटल की दुनिया और टीवी की दुनिया में खबरें परोसने और खबरों को दिखाने का अंदाज बिल्कुल अलग था। मैं उस दौर में दस्तक दे चुका था जब टीवी भी स्मार्टफोन पर देखा जाने लगा था। डिजिटल पर भी ब्रेकिंग थी। अगर टीवी में प्रोग्रामिंग थी तो यहां भी बतौर फीचर, सॉफ्ट स्टोरीज का विशाल संसार था। एक नया मीडियम जो स्मार्टफोन पर बखूबी देखा और समझा जा सकता था। डिजिटल की इस दुनिया में टीवी और अखबार दोनों समाहित थे। यहां काम करते हुए डिजिटल न्यूज मीडिया की बारीकियां तो सीखी हीं। साथ ही जब जी न्यूज से विदाई ली तो उस समय 33 मिलियन यूजर्स के बीच 84 मिलियन पीवीज देखने की अपार खुशियां हासिल हुईं। जी न्यूज में एक लंबी पारी खेलने के बाद जुलाई 2017 में टाइम्स नाउ नेटवर्क से जुड़ने का अवसर मिला। 2017 में ही टाइम्स नाउ की हिंदी वेबसाइट की शुरुआत हुई। यह पहला मौका था जब टाइम्स नाउ की अगुवाई में कोई हिंदी न्यूज वेबसाइट लॉन्च हुई। यहां एक नई और युवा टीम बनी। यह टीम आक्रामक अंदाज में काम करते हुए कम समय में अपनी पहचान बनाई। डिजिटल की दुनिया के बदलते संसार में अब चुनौती पीवीज की नहीं बल्कि यूजर्स की थी, जिन्हें लाना इतना आसान नहीं थी। लेकिन टीम के जज्बे, हौसले ने असाधारण चुनौतियों को भी अपनी मेहनत एवं लगन से उसे सामान्य बनाया। डिजिटल न्यूज की दुनिया में हर पल चुनौतियों के बीच नया कुछ सीखने-समझने और कुछ कर गुजरने की प्रेरणा मिलती है। यह सिलसिला आज भी अनवरत जारी है-

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