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Lohri 2023 Date: 13 या 14 जनवरी किस दिन मनाई जाएगी लोहड़ी? जानें इस पर्व का इतिहास

  • Authored by: लवीना शर्मा
  • Updated Jan 13, 2023, 11:21 AM IST

Lohri 2023 Kab Hai: मकर संक्रांति (Makar Sankranti) की तरह ही लोहड़ी के त्योहार को लेकर भी कन्फ्यूजन बना हुआ है। जानें 2023 में किस दिन लोहड़ी मनाना शुभ रहेगा।

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लोहड़ी कब है 2023?

Lohri 2023: लोहड़ी का त्योहार आनंद और खुशियों का प्रतीक है। ये त्योहार मूलरूप से सिंखों द्वारा पंजाब और हरियाणा में मनाया जाता है। परंतु लोकप्रियता के चलते ये भारत ही नहीं बल्कि विश्वभर में मनाया जाने लगा है। लोहड़ी के त्योहार को मकर संक्रांति से जोड़ा गया है। हर साल मकर संक्रांति (Makar Sankranti) से एक दिन पहले इस पर्व को मनाया जाता है। इस बार मकर संक्रांति 15 जनवरी को मनाई जा रही है तो लोहड़ी पर्व 14 जनवरी को मनाया जाएगा।

कब मनाई जाएगी लोहड़ी 2023? Lohri 2023 Kab Hai

साल 2023 में लोग लोहड़ी की डेट को लेकर काफी कन्फ्यूज हैं कोई 13 जनवरी तो कोई 14 जनवरी को लोहड़ी मनाने की बात कर रहा है। वैसे लोहड़ी का त्योहार मकर संक्रांति की पूर्व संध्या यानी एक दिन पहले मनाया जाता है। इस लिहाज से 14 जनवरी को लोहड़ी मनाई जाएगी क्योंकि 15 जनवरी को मकर संक्रांति है। 14 जनवरी को लोहड़ी की पूजा का शुभ मुहूर्त रात 8:57 बजे है।

लोहड़ी पर्व कैसे मनाया जाता है?

लोहड़ी पंजाब और हरियाणा का प्रसिद्ध त्यौहार है, लेकिन अब इस पर्व को देश के सभी हिस्सों में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।

इस दिन किसान ईश्वर के प्रति अपना आभार प्रकट करते हैं

इस दिन पतंगें उड़ाने का भी रिवाज है।

लोहड़ी उत्सव के दिन बच्चे घर-घर जाकर लोकगीत गाते हैं और लोग उन्हें मिठाई और पैसे देते हैं।

इस दिन बच्चों को चीनी, गजक, गुड़, मूंगफली तथा मक्का आदि दिया जाता है, इसे ही लोहड़ी कहते हैं।

इसके पश्चात शाम के समय सभी लोग एकत्र होकर आग जलाते है और मिलकर नाच-गाकर लोहड़ी का उत्सव मनाते हैं।

रात को सरसों का साग, मक्के की रोटी और खीर आदि भोजन का लुत्फ लिया जाता है।

लवीना शर्मा
लवीना शर्माauthor

धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर की रहने वाली हूं। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट हूं। 10 साल से मीडिया में काम कर रही हूं। पत्रकारिता में करियर की शुरुआत न्यूज 24 से हुई। इसके बाद तमाम चैनलों में काम किया। जहां स्क्रिप्ट राइटिंग, एडिटिंग और एंकरिंग का अनुभव हासिल हुआ। रफ्तार यहीं नहीं रूकी अब चाह थी कुछ नया करने की जिसके लिए मैंने डिजिटल मीडिया में स्विच किया और मैं जनसत्ता से जुड़ गई। जनसत्ता में मैंने अध्यात्म सेक्शन लीड किया। इसके बाद पत्रिका में सेवाएं दी और अब timesnowhindi.com से जु़ड़ी हूं। यहां भी मैं अध्यात्म सेक्शन में कार्यरत हूं। भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और ज्योतिष शास्त्र में मेरा शुरू से ही लगाव रहा है। मेरी कोशिश रहती है कि मैं ऐसा कंटेट लिखूं जिससे बड़े बुजुर्ग ही नहीं बल्कि आज के युवा भी कनेक्ट कर सकें।

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