अध्यात्म

सुकून का दूसरा नाम है आंध्र प्रदेश का यह गांव, सतयुग जैसा मिलता है आनंद

Kurmagram Andhra Pradesh: अगर आप शहर की भागदौड़ भरी जिंदगी से थक चुके हैं और सुकून के पल बिताना चाहते हैं तो आंध्र प्रदेश का यह गांव आपके लिए परफेक्ट डेस्टिनेशन है।

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कुर्माग्राम क्यों खास है

Kurmagram Andhra Pradesh: अगर आप ऐसी जगह घूमना चाहते हैं जहां पहुंचते ही मोबाइल की घंटियां, ट्रैफिक का शोर और शहर की भागदौड़ पीछे छूट जाए, तो आंध्र प्रदेश का कुर्माग्राम आपके लिए एक अलग तरह का ट्रैवल एक्सपीरियंस हो सकता है। श्रीकाकुलम जिले में बसा यह वैदिक गांव आम पर्यटन स्थलों से बिल्कुल अलग है। यहां आप कलियुग से कोसों दूर सतयुग जैसा आनंद प्राप्त करेंगे।

यहां आपको बड़े होटल, चमकती दुकानों और आधुनिक सुविधाओं की जगह खेत, गोशाला, गुरुकुल, प्राकृतिक माहौल और बेहद सादा जीवन देखने को मिलता है। कुर्माग्राम सिर्फ कोई पुराना पारंपरिक गांव नहीं है। यह एक फार्म कम्युनिटी है, जिसकी शुरुआत 2018 में नंद गोपाल गोशाला ट्रस्ट के तहत हुई थी। करीब 60 एकड़ में फैले इस समुदाय में गोशाला और वैदिक गुरुकुल भी है। यहां रहने वाले लोग आधुनिक जीवन से दूरी बनाकर खेती और वैदिक जीवनशैली को अपनाकर रहते हैं।

क्यों खास है कुर्माग्राम

कुर्माग्राम पहुंचने के बाद सबसे पहले जो चीज आपको हैरान करेगी, वह है यहां का बिल्कुल अलग माहौल। यहां बिजली और इंटरनेट जैसी आधुनिक सुविधाएं नहीं हैं। खाना गैस स्टोव पर नहीं, बल्कि लकड़ी और गोबर के उपलों से बने चूल्हे पर पकाया जाता है। कपड़े और रोजमर्रा के कई काम भी पारंपरिक तरीके से किए जाते हैं। रात में रोशनी के लिए पारंपरिक तेल के दीयों का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में शाम के बाद कुर्माग्राम का माहौल किसी पुराने भारतीय गांव जैसा महसूस होता है। यही वजह है कि आधुनिक शहरों से यहां पहुंचने वाले लोगों के लिए यह जगह किसी टाइम मशीन से कम नहीं लगती है।

डिजिटल दुनिया से दूर है गांव

कुर्माग्राम की सबसे बड़ी खासियतों में से एक यहां की डिजिटल दुनिया से दूरी है। गांव की जीवनशैली में मोबाइल, इंटरनेट और टीवी जैसी सुविधाएं शामिल नहीं हैं। यही वजह है कि यहां कुछ घंटे बिताने पर ही आपको शहर की रोजाना की डिजिटल जिंदगी से बिल्कुल अलग अनुभव मिलता है। अगर आप यहां घूमने जा रहे हैं तो फोन को लगातार इस्तेमाल करने के बजाय गांव की असली जिंदगी को देखने का मौका मिलेगा। खेतों में काम करते लोग, पशुओं की देखभाल, मंदिर की गतिविधियां और प्राकृतिक माहौल इस ट्रिप का हिस्सा बन जाते हैं।

60 एकड़ में फैला है पूरा समुदाय

कुर्माग्राम करीब 60 एकड़ में फैला फार्म कम्युनिटी है। यहां प्राकृतिक खेती को काफी महत्व दिया जाता है और समुदाय अपने भोजन की जरूरतों को खेती के जरिए पूरा करने की कोशिश करता है। गांव की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार यहां प्राकृतिक खेती के साथ गोशाला और वैदिक गुरुकुल भी संचालित होते हैं। घूमने के दौरान आपको बड़े शहरों की तरह अलग-अलग टूरिस्ट अट्रैक्शन नहीं मिलेंगे। यहां खुद पूरा गांव ही देखने और समझने वाली जगह है।

जरूर जाएं गौशाला और वैदिक गुरुकुल

कुर्माग्राम की यात्रा में गोशाला और वैदिक गुरुकुल खास आकर्षण हैं। यह समुदाय सिर्फ खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि वैदिक शिक्षा और पारंपरिक संस्कृति को भी अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाता है। गांव में भगवद्गीता, श्रीमद्भागवत, रामायण और महाभारत जैसे ग्रंथों की शिक्षा और वैदिक संस्कृति से जुड़े कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। अगर आप धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन में रुचि रखते हैं तो कुर्माग्राम आपके लिए खास अनुभव बन सकता है।

यहां खेती सिर्फ काम नहीं, जिंदगी का हिस्सा है

कुर्माग्राम में खेतों का महत्व बहुत ज्यादा है। समुदाय प्राकृतिक खेती को अपनाता है और अपना भोजन खुद पैदा करने की दिशा में काम करता है। यहां पहुंचने पर खेतों और ग्रामीण जीवन का वह रूप दिखाई देता है जो शहरों में तेजी से गायब होता जा रहा है। यही वजह है कि कुर्माग्राम में घूमना किसी सामान्य पिकनिक जैसा नहीं लगता है। यहां आपको गांव के कामकाज और पारंपरिक जीवन को करीब से देखने का मौका मिलता है।

यहां जाने पर कैसा रहेगा दिन

कुर्माग्राम की दिनचर्या आम टूरिस्ट डेस्टिनेशन से काफी अलग है। यहां सुबह जल्दी दिन शुरू होता है और पूजा-पाठ, जप, खेती, गौसेवा और सामुदायिक गतिविधियां दिन का हिस्सा रहती हैं। कुछ हालिया ट्रैवल रिपोर्ट्स यहां की दिनचर्या सुबह करीब 3:30-4:30 बजे शुरू होने और रात जल्दी सोने वाली है। यानी अगर आप कुर्माग्राम जा रहे हैं तो देर रात पार्टी या सुबह देर तक सोने वाला हॉलिडे यहां नहीं मिलने वाला है। यह जगह सुबह जल्दी उठकर गांव की जिंदगी को महसूस करने वाले यात्रियों के लिए ज्यादा दिलचस्प है।

कुर्माग्राम के आसपास क्या देखें

कुर्माग्राम श्रीकाकुलम जिले में स्थित है और इसके आसपास कई ग्रामीण तथा धार्मिक स्थल हैं। आधिकारिक पते के अनुसार यह एंथाकापल्ली गांव के पास, किट्टलापाडु पोस्ट और श्रीमुखलिंगम के रास्ते पर स्थित है। खास बात यह है कि कुर्माग्राम के पास श्रीमुखलिंगम भी है, जो अपने प्राचीन मंदिर और धार्मिक महत्व के लिए जाना जाता है। मैपिंग डेटा के अनुसार श्रीमुखलिंगम कुर्माग्राम के आसपास के प्रमुख स्थानों में शामिल है। इस वजह से कुर्माग्राम की यात्रा को श्रीकाकुलम के ग्रामीण और धार्मिक पर्यटन के साथ जोड़ा जा सकता है।

कैसे पहुंचें कुर्माग्राम

श्रीकाकुलम शहर से सड़क मार्ग के जरिए कुर्माग्राम पहुंचा जा सकता है। उपलब्ध ट्रैवल जानकारी के अनुसार यह श्रीकाकुलम टाउन से करीब 60 किलोमीटर दूर है। श्रीकाकुलम रोड रेलवे स्टेशन से भी सड़क मार्ग के जरिए यहां पहुंचा जा सकता है। हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए विशाखापत्तनम एयरपोर्ट के बाद आगे सड़क मार्ग से कुर्माग्राम पहुंचना होगा। अलग-अलग स्रोतों में दूरी और यात्रा समय अलग दिया गया है, इसलिए निकलने से पहले स्थानीय रूट और वाहन की स्थिति जरूर जांच लें।

पहली बार जा रहे हैं तो इन बातों का रखें ध्यान

कुर्माग्राम को किसी सामान्य पर्यटन स्थल की तरह न समझें। यह करीब 60 एकड़ में फैली रेजिडेंशियल कम्युनिटी है, जहां लोग अपनी चुनी हुई जीवनशैली के अनुसार रहते हैं। इस कारण जाने से पहले वहां संपर्क करना सबसे बेहतर रहेगा। आधिकारिक वेबसाइट पर फोन नंबर और ईमेल भी दिया गया है। यहां आधुनिक सुविधाएं सीमित हैं। मोबाइल चार्जिंग, इंटरनेट, होटल जैसी सुविधाओं की उम्मीद लेकर जाएंगे तो अनुभव अलग हो सकता है। यहां जाने का असली मकसद गांव की पारंपरिक और वैदिक जीवनशैली को करीब से देखना है।

Mohit Tiwari
मोहित तिवारीauthor

मोहित तिवारी को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव है। इन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रतिष्ठित न्यूजपेपर में फील्ड रिपोर्टिंग से की थी। मोहित ने प्रिंट, टीवी और डिजिटल तीनों प्लेटफॉर्म पर काम किया है। देश-विदेश, लाइफस्टाइल, धर्म और आध्यात्मिक विषयों में गहरी रुचि रखने वाले मोहित ने ज्योतिष का भी व्यापक अध्ययन किया है। मोहित के आलेख लाइफस्टाइल, हेल्थ, न्यूज, धर्म, ज्योतिष आदि विषयों पर गहरी शोध और प्रामाणिकता पर आधारित होते हैं और इन विषयों पर वह 12,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं।

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