kalash visarjan muhurat 2026 Navratri March (चैत्र नवरात्रि कलश विसर्जन शुभ मुहर्त मार्च 2026): चैत्र नवरात्रि का समापन जितना महत्वपूर्ण होता है, उतना ही जरूरी होता है सही समय पर कलश विसर्जन और पारण करना। नवरात्र के पहले दिन शुभ समय में कलश स्थापना होती है और अंतिम नवरात्र पर हवन और कन्या पूजन के साथ ही कलश का विसर्जन भी किया जाता है। यहां देखें कि मार्च 2026 नवरात्रि में कलश विसर्जन का समय कितना है। नोट करें कि 27 या 28 मार्च - नवरात्रि कलश विसर्जन कब होगा मार्च 2026 में। आगे इस लेख में ये भी जानें कि अगर कलश का विसर्जन ना कर सकें तो क्या करें।
नवरात्र कलश विसर्जन मार्च 2026 डेट
मार्च 2026 के चैत्र नवरात्र की अष्टमी तिथि 25 मार्च को दोपहर 1:50 बजे से शुरू होकर 26 मार्च को सुबह 11:48 बजे तक रहेगी। लेकिन उदया तिथि के कारण 26 मार्च को ही अष्टमी मनाई जाएगी। इसके बाद नवमी तिथि 26 मार्च को सुबह 11:48 बजे से शुरू होकर 27 मार्च को सुबह 10:06 बजे तक रहेगी। यही वजह है कि राम नवमी और श्री राम जन्मोत्सव 27 मार्च को मनाया जाएगा। व्रत का समापन (पारण) हमेशा हवन और कलश विसर्जन के बाद ही किया जाता है। ऐसे में जो लोग अष्टमी को हवन करके व्रत खोलेंगे, वे नवरात्र कलश विसर्जन 26 मार्च को करेंगे। वहीं जो लोग नवमी को व्रत का पारण-हवन करेंगे, वे 27 मार्च को शुक्रवार के दिन नवरात्र कलश विसर्जन करेंगे।
चैत्र नवरात्रि कलश विसर्जन शुभ मुहूर्त मार्च 2026
Navratri Kalash Shubh Muhurat Date and time March 2026 : धार्मिक मान्यताओं और पंचांग के अनुसार, कलश विसर्जन 27 मार्च 2026 को ही करना शुभ माना गया है। कई लोग ये सोचते हैं कि दशमी को व्रत का पारण करते हुए नवरात्रि कलश विसर्जन कर सकते हैं। लेकिन सही टाइम नवमी को हवन के समय का रहता है।
ज्योतिषाचार्य सुजीत जी के अनुसार, चैत्र नवरात्रि कलश विसर्जन शुभ मुहूर्त मार्च 2026 में 27 तारीख को सुबह ब्रह्म मुहूर्त से लेकर सुबह 10:06 बजे तक का रहेगा। इसमें विशेष रूप से शुभ समय सुबह 07:50 से 09:45 के बीच का माना गया है ।
यानी जो भक्त पूरे 9 दिन का व्रत रख रहे हैं, उन्हें नवमी के दिन हवन और पूजा के बाद 27 मार्च को सुबह 10:06 बजे तक कलश विसर्जन और पारण कर लेना चाहिए।
नवरात्रि कलश विसर्जन कैसे करें?
कलश विसर्जन एक धार्मिक प्रक्रिया है, जिसे श्रद्धा और नियम के साथ किया जाता है।
- सबसे पहले नवमी के दिन माता सिद्धिदात्री की पूजा और हवन करें
- हवन के बाद कलश को उठाकर श्रद्धा पूर्वक प्रणाम करें
- यदि कलश मिट्टी का है, तो उसे बहते जल (नदी/तालाब) में प्रवाहित करें
- अगर तांबे या पीतल का कलश है, तो उसे विसर्जित न करें, बल्कि घर में सुरक्षित रखें
- कलश में रखे फूल, नारियल और अन्य सामग्री को जल में प्रवाहित करें या किसी पीपल या बरगद के पेड़ के नीचे रख दें
कलश विसर्जन क्यों किया जाता है
नवरात्रि में कलश स्थापना देवी शक्ति के आगमन का प्रतीक होती है। पूरे 9 दिनों तक घर में देवी का वास माना जाता है। कलश विसर्जन का अर्थ है -
- देवी को सम्मानपूर्वक विदाई देना
- उनके आशीर्वाद के साथ जीवन में आगे बढ़ना
- घर में सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखना
कलश विसर्जन में ध्यान रखने वाली जरूरी बातें
अगर नवरात्र में आपने कलश स्थापना की है तो इसका विसर्जन भी आपको जरूर करना चाहिए। इसके लिए नवमी पर ब्रह्म मुहूर्त में हवन करना सबसे शुभ माना गया है। विसर्जन से पहले पूरे विधि-विधान से पूजा जरूर करें। यह भी ध्यान रखें कि कलश को कभी भी बिना पूजा किए सीधे विसर्जित न करें। वहीं व्रत का पारण जल्दबाजी में नहीं, विधिपूर्वक करें। इस तरह यह प्रक्रिया भक्त और देवी के बीच आध्यात्मिक संबंध को पूर्ण करती है।
