Jaya Parvati Vrat Katha In Hindi (जया पार्वती व्रत कथा): जया पार्वती व्रत में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है। ये व्रत शादीशुदा महिलाएं और कुंवारी कन्याएं दोनों कर सकती हैं। मान्यता अनुसार इस व्रत को करने से सौभाग्य में वृद्धि होती है। शादीशुदा महिलाएं ये व्रत पति की लंबी आयु के लिए तो अविवाहित लड़कियां इस व्रत को मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए रखती हैं। जिन महिलाओं को संतान प्राप्ति में दिक्कत आ रही है उनके लिए भी ये व्रत शुभ फलदायी माना जाता है। यहां आप जानेंगे जया पार्वती व्रत कथा।
जया पार्वती व्रत कथा (Jaya Parvati Vrat Katha)
जया पार्वती व्रत की कथा अनुसार एक बार एक ब्राह्मण और उनकी पत्नी दोनों खुशी-खुशी अपना जीवन यापन कर रहे थे। उनके जीवन में सारी खुशियां थीं। लेकिन वे फिर भी दुखी रहते थे जिसका कारण था उनकी कोई संतान न होना। एक दिन महर्षि नारद ब्राह्मण के घर पहुंचे तो उन्होंने देखा कि दोनों पति-पत्नी काफी चिंतित है तब उन्होंने वजह जाननी चाही।
तब ब्राह्मण ने कहा हमारे जीवन में सब कुछ है लेकिन संतान सुख नहीं है। कृपया हमें कोई ऐसा उपाय बताएं जिससे हमें संतान सुख की प्राप्ति हो सके। तब नारद जी ने उन्हें शिव-पार्वती की पूजा-अर्चना करने की सलाह दी। ब्राह्मण और उनकी पत्नी उपाय मानकर भगवान की भक्ति में लीन तो हो गए। लेकिन एक दिन ब्राह्मण को किसी सांप ने काट लिया जिससे उनकी मृत्यु हो गयी।
पति को मृत देखकर सत्या बेहद दुखी हुआ और उन्होंने मां पार्वती का स्मरण करना शुरू कर दिया। सत्या की भक्ति से प्रसन्न होकर माता पार्वती ने उनके पति को पुनर्जीवित कर दिया। इसके साथ ही माता पार्वती ने ब्राह्मण और उसकी पत्नी से वर मांगने के लिए कहा। तब दोनों पति-पत्नी ने पुत्र प्राप्ति की इच्छा जाहिर की। तब माता पार्वती ने उन्हें जया-पार्वती व्रत रखने की सलाह दी। दोनों को इस व्रत के फलस्वरूप एक सुंदर पुत्र की प्राप्ति हुई। कहते हैं तभी से इस व्रत को रखने की परंपरा की शुरू हो गई।
