Janaki Jayanti Vrat Katha: जानकी जयंती व्रत कथा, यहां पढ़ें माता सीता के जन्म की कहानी, जानें सीता अष्टमी की कथा क्या है?
- Authored by: Srishti
- Updated Feb 9, 2026, 11:14 AM IST
Janati Jayanti Vrat Katha (जानकी जयंती व्रत कथा): आज 9 फरवरी, सोमवार को जानकी जयंती है। इस दिन को सीता अष्टमी भी कहते हैं। इस खास दिन पर यहां दिए व्रत कथा का पाठ करने से जीवन में चल रही वैवाहिक या आर्थिक समस्याएं दूर होती हैं।
जानकी जयंती व्रत कथा (pc: pinterest)
Janati Jayanti Vrat Katha (जानकी जयंती व्रत कथा): हर साल फाल्गुन कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जानकी जयंती का त्योहार मनाया जाता है। इसे सीता अष्टमी के नाम से भी जानते हैं। माता सीता को आदर्श नारीत्व, धैर्य, त्याग और मर्यादा की प्रतीक माना जाता है। रामायण में उनका जीवन सत्य, सेवा और सहनशीलता का अनुपम उदाहरण है। इसलिए जानकी जयंती केवल जन्मदिन नहीं, बल्कि उनके मूल्यों को याद करने का दिन भी है। आज जानकी जयंती के इसी खास अवसर पर यहां दिए व्रत कथा का पाठ जरूर करें। अगर आपकी शादी में देर हो रही है, या शादी नहीं हो रही है तो इससे अवश्य लाभ मिलेगा। साथ ही अगर आपके वैवाहिक जीवन में समस्या है या आर्थिक तंगी है तो भी आप लाभ पा सकते हैं।
जानकी जयंती व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, मिथिला की धरती पर कई वर्ष तक पानी की एक बूंद भी नहीं पड़ी थी। राजा जनक का पूरा राज्य पानी के बिना रेगिस्तान बना हुआ था। भयंकर अकाल और सूखे की वजह से मिथिला के लोगों को पानी की एक-एक बूंद के लिए तरसना पड़ रहा था। अपनी भूखे और प्यासी प्रजा को देखकर राजा जनकर जी विचलित से रहने लगे। मिथिला की बिगड़ती हालात को देखकर ऋषियों ने राजा जनक से कहा कि वो सोने की हल खुद खेत में चलाएं, जिससे इंद्रदेव की कृपा उनके राज्य पर हो। इसके बाद जनक जी ने हल से खेत जोतना शुरू किया तभी उनका हल किसी बक्से से टकराया। फिर उन्होंने उस बक्सा को बाहर निकालकर देखा तो उसमें एक बच्ची थी। राजा जनक की उस समय कोई संतान नहीं थी, इसलिए उन्होंने उस बच्ची को गोद ले लिया और उसका नाम सीता रखा। राजा जनक की बेटी होने के कारण उन्हें जानकी जी भी कहा जाता है। इसके अलावा माता सीता को मैथिली और भूमिजा के नाम से भी पुकारा जाता है। दरअसल, भूमि से जन्म लेने की वजह से उनका नाम भूमिजा पड़ा। कहते हैं कि सीता जी के प्रकट होते ही मिथिला राज्य में जमकर बारिश हुई और वहां का सूखा दूर हो गया।
जानकी जयंती पर करें इन चौपाइयों का पाठ-
जा पर कृपा राम की होई, ता पर कृपा करहिं सब कोई।
जिनके कपट, दंभ नहिं माया, तिनके हृदय बसहु रघुराया।
राम भगति मनि उर बस जाकें। दु:ख लवलेस न सपनेहुं ताकें॥
चतुर सिरोमनि तेइ जग माहीं। जे मनि लागि सुजतन कराहीं॥
अगुण सगुण गुण मंदिर सुंदर, भ्रम तम प्रबल प्रताप दिवाकर ।
काम क्रोध मद गज पंचानन, बसहु निरंतर जन मन कानन।।
कहु तात अस मोर प्रनामा। सब प्रकार प्रभु पूरनकामा ॥
दीन दयाल बिरिदु संभारी। हरहु नाथ मम संकट भारी॥
जानकी जयंती की पूजा कैसे करें?
जानकी जयंती की पूजा करने के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान किया जाता है और स्वच्छ वस्त्र धारण किए जाते हैं। इसके बाद माता सीता और श्रीराम का स्मरण करके व्रत का संकल्प लिया जाता है। मंदिर में चौकी सजाकर उसपर लाल कपड़ा बिछाया जाता है और श्रीराम और माता सीता की मूर्ति या तस्वीर उसपर विराजित की जाती है। प्रभु श्रीराम और माता सीता की पूजा करने के लिए अक्षत और फूल उनपर अर्पित किए जाते हैं। पूजा में चौपाइयां पढ़ी जाती हैं, आरती की जाती और व्रत की कथा पढ़ते हैं। भोग लगाया जाता है और पूजा का समापन होता है। जानकी जयंती पर मिट्टी के बर्तन, धान, अन्न और जल आदि दान में देने का विशेष महत्व है। इस दिन कन्या भोज भी कराया जा सकता है।
