PM Jan Dhan Yojana : 28 अगस्त 2014 को शुरू हुई 'प्रधानमंत्री जनधन योजना' (PMJDY) ने देश के बैंकिंग परिदृश्य और आम नागरिकों के जीवन में एक बड़ा बदलाव ला दिया है। एक समय था जब बैंक में खाता खुलवाना गरीबों और ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए एक कठिन काम माना जाता था। औपचारिक बैंकिंग सेवाएं इस बात पर निर्भर करती थीं कि व्यक्ति कहां रहता है, उसकी आर्थिक स्थिति कैसी है या बैंक उससे कितना दूर है। लेकिन पिछले 12 सालों में इस योजना ने न केवल इस अंतर को खत्म किया है, बल्कि वित्तीय समावेश की दिशा में भारत को दुनिया के सामने एक मिसाल बनाकर खड़ा कर दिया है। माईगव इंडिया की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, 2015 में जहां जनधन खातों की संख्या केवल 14.7 करोड़ थी, वहीं 2026 में यह आंकड़ा बढ़कर 59 करोड़ हो चुका है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस सफलता पर कहा कि इस योजना का प्रभाव बेजोड़ रहा है और इसके परिवर्तनकारी परिणाम देश के कोने-कोने में साफ दिखाई दे रहे हैं।
बिचौलियों का सफाया और 53 लाख करोड़ रुपये सीधे खाते में ट्रांसफर
जनधन योजना का सबसे बड़ा लाभ सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और पारदर्शिता में देखने को मिला है। प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) प्रणाली के जरिये पिछले 12 वर्षों में लाभार्थियों के खातों में 53 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे भेजी जा चुकी है। इसमें एक बहुत बड़ा हिस्सा जनधन खाताधारकों को मिला है। पहले कल्याणकारी योजनाओं का पैसा बिचौलियों और कागजी प्रक्रियाओं के कारण जरूरतमंदों तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाता था। डीबीटी ने इस समस्या को जड़ से समाप्त कर दिया है। अब सरकारी पेंशन, छात्रवृत्ति, सब्सिडी और इमरजेंसी वित्तीय सहायता की राशि बिना किसी कटौती के सीधे आम जनता के खाते में जमा होती है। इससे भ्रष्टाचार पर लगाम लगी है और व्यवस्था अधिक कुशल और पारदर्शी बनी है।
महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण
इस योजना ने देश की महिलाओं को आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वर्तमान में कुल 59 करोड़ जनधन खातों में से करीब 33 करोड़ खाते महिलाओं के नाम पर हैं। यह कुल खातों का करीब 56 प्रतिशत है। घर की बचत को पहले महिलाएं कैश के रूप में सुरक्षित रखती थीं, लेकिन अब वे इसे अपने बैंक खातों में जमा कर रही हैं। इससे न केवल उनकी बचत पर ब्याज मिल रहा है, बल्कि वित्तीय फैसलों में उनकी भागीदारी भी बढ़ी है। बैंकिंग प्रणाली से जुड़ने के कारण महिलाएं अब विभिन्न स्वरोजगार योजनाओं, सूक्ष्म ऋण और बीमा सुविधाओं का लाभ उठाकर अपने पैरों पर खड़ी हो रही हैं।
जनधन के 12 साल, परिणाम रहे परिवर्तनकारी, गरीबों को हुआ-क्या फायदा (तस्वीर-X)
ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों तक बैंकिंग सेवा
जनधन योजना ने भारत के ग्रामीण क्षेत्रों की तस्वीर बदल दी है। देश के कुल जनधन खातों में से 78 प्रतिशत यानी करीब 46 करोड़ खाते ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में खोले गए हैं। बैंकिंग सुविधाओं को हर गांव तक पहुंचाने के लिए 'बैंक मित्र' मॉडल ने अहम भूमिका निभाई है। वर्तमान में 13.5 लाख से अधिक बैंक मित्र शाखाओं से बाहर रहकर लोगों के घर-घर तक डिजिटल और कैश बैंकिंग सेवाएं पहुंचा रहे हैं। आज स्थिति यह है कि देश के करीब 100 प्रतिशत गांवों में 5 किलोमीटर के दायरे में बैंकिंग सुविधा उपलब्ध है। अब ग्रामीण नागरिकों को अपने ही पैसे निकालने या जमा करने के लिए शहरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते।
बिना न्यूनतम बैलेंस की सुविधा और बीमा सुरक्षा
जनधन योजना को आम लोगों के लिए सुलभ बनाने के लिए इसके नियमों को बेहद सरल और जनहितैषी रखा गया है। इसके तहत प्रत्येक बिना बैंक खाते वाले वयस्क को 'जीरो बैलेंस' (शून्य न्यूनतम शेष राशि) और बिना किसी रखरखाव शुल्क के बुनियादी बचत खाता उपलब्ध कराया जाता है। इसके अलावा खाताधारकों को कई अतिरिक्त वित्तीय लाभ भी दिए जाते हैं:-
- फ्री रुपे डेबिट कार्ड:- अब तक 41 करोड़ से अधिक रुपे डेबिट कार्ड जारी किए जा चुके हैं, जिससे लोग आसानी से एटीएम और डिजिटल भुगतान कर पा रहे हैं।
- मुफ्त दुर्घटना बीमा:- रुपे कार्ड के साथ खाताधारकों को 2 लाख रुपये तक का मुफ्त दुर्घटना बीमा कवर दिया जाता है।
- ओवरड्राफ्ट सुविधा:- आपातकालीन स्थिति में वित्तीय सहायता के तौर पर खाताधारकों को 10,000 रुपये तक की ओवरड्राफ्ट सुविधा मिलती है, जिससे वे जरुरत पड़ने पर खाते में पैसे न होने पर भी राशि निकाल सकते हैं।
12 वर्षों की यह यात्रा दर्शाती है कि जनधन योजना केवल एक बैंक खाता खोलने का अभियान नहीं थी, बल्कि यह देश के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाने का एक बड़ा माध्यम बन चुकी है। औपचारिक वित्तीय प्रणाली से जुड़कर आज देश का गरीब, किसान और महिला आर्थिक मुख्यधारा का हिस्सा बन चुके हैं।
