Makar Sankranti 2023: सनातन धर्म में दान करना सबसे प्रमुख कर्म बताया गया है। यूं तो सनातन धर्म में अधिकांश त्योहारों पर किसी न किसी तरह का दान किया ही जाता है लेकिन मकर संक्रांति पर किया गया दान मोक्ष के द्वार खाेलता है। मकर संक्रांति के दन लोग गरीबों को विशेष दान करते हैं। पौष के महीने में सबसे बड़ी संक्रांति होती है। वैसे संक्रांति हर महीने में होती है परंतु मकर राशियों पर सूर्य जाने से विशेष महत्व होता है। पौष मास में सूर्य मकर राशि पर आता है। इसलिए इसे मकर संक्रांति कहते हैं। मकर संक्रांति में सूर्य उत्तरायण हो जाते हैं। मकर संक्रांति हमेशा अंग्रेजी तिथि 14 जनवरी को ही होती है। दक्षिणा भारत में इस पर्व को पोंगल कहा जाता है।
तिल का दान
मकर संक्रांति पर तिल के दान का विशेष महत्व है और इसी कारण इसे तिल संक्रांति भी कहते हैं। तिल के साथ ही भगवान विष्णु , सूर्य और शनिदेव की तिल से पूजा की जाती है। इस दिन ब्राह्मणाें को तिल से बनी चीजों का दान करना शुभ माना जाता है। शनि देवता ने अपने पिता सूर्य देव की पूजा करने केलिए काले तिल का प्रयोग किया था। उनकी पूजा से प्रसन्न् होकर सूर्य देव ने शनि देव को वरदान दिया था कि जब भी वह मकर राशि में आएंगे तो तिल से उनकी पूजा करने और तिल का दान करने से ही प्रसन्न होंगे। इस दिन तिल का दान करने से शनि दोष दूर होता है।
कंबल का दान
मकर संक्रांति पर गरीब या जरूरतमंद को कंबल का दान करना भी शुभ माना जाता है। इससे राहु के अशुभ प्रभाव भी दूर होते हैं।
गुड़ का दान
शास्त्रों में गुण का दान भी शुभ माना जाता है। गुड़ को गुरु की प्रिय वस्तु माना जाता है। इस दिन गुड़ का सेवन और दान करने से शनि, गुरु और सूर्य दोष दूर होते हैं।
खिचड़ी का दान
इस दिन चावल और उड़द की काली दाल का दान खिचड़ी के रूप में किया जाता है। शनि देव से उड़द का संबंध होता है और इसका दान करने से वे खुश होते हैं। अक्षय अनाज चावल का दान करने से अक्षय फल की प्राप्ति होती है।
वस्त्र का दान
मकर संक्रांति पर किसी गरीब को एक जोड़ी वस्त्र का दान जरूर करें। वस्त्र पुराने या फिर इस्तेमाल किये न हों। इस दिन नये वस्त्रों का दान ही करना चाहिए।
घी का दान
मकर संक्रांति पर घी का दान का बहुत महत्व होता है। शुद्ध घी का दान करने से करियर संबंधित मामलों में लाभ होता है। भाैतिक सुविधाएं मिलती हैं और मोक्ष का मार्ग मिलता है।
इसलिए करते हैं दान
सूर्य इस दिन धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं। इसी कारण इसे मकर संक्रांति कहते हैं। स्नान के बाद लोग इस दिन बहुत सी वस्तुएं दान करते हैं। इस दिन सभी को अपनी क्षमता के हिसाब से दान पुण्य करना चाहिए।
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