Aaj Ka Panchang 14 March 2025 (आज का पंचांग 14 मार्च 2025): रंगों का महा उत्सव कहे जाने वाली होली आज है, जिसकी लोकप्रियता पूरे विश्व में है। ये पर्व फाल्गुन मास में पूर्णिमा तिथि के दिन मनाया जाता है। आज शुक्रवार का दिन है जिसे हिंदू धर्म और ज्योतिष में अत्यधिक धार्मिक और आध्यात्मिक माना जाता है। ये दिन विशेष रूप से माता लक्ष्मी और शुक्र ग्रह को समर्पित होता है। माता लक्ष्मी को धन और समृद्धि की देवी माना जाता है, इसलिए इस दिन इनका पूजन करने से घर में आर्थिक उन्नति होती है। ज्योतिष शास्त्र में शुक्र ग्रह को सौंदर्य, प्रेम, कला, वैवाहिक जीवन और विलासिता का प्रतीक माना गया है। जिनकी कुंडली में शुक्र कमजोर होता है, उन्हें शुक्रवार के दिन व्रत रखने और शुक्र से संबंधित वस्तुओं का दान करने से लाभ मिलता है। इस दिन सफेद या गुलाबी रंग के वस्त्र पहनना और खीर, दही और मिठाइयों का सेवन करना शुभ माना जाता है। होली के शुभ तिथि से जुड़े शुभ मुहूर्त, राहुकाल, दिशाशूल और उपायों के बारे में जानने के लिए आप यहां 14 मार्च 2025 का पंचांग पढ़ सकते हैं।
Aaj Ka Panchang 14 March 2025 (आज का पंचांग 14 मार्च 2025)
आज का पंचांग 14 मार्च 2025
- संवत - पिङ्गला विक्रम संवत 2081
- माह - फाल्गुन, शुक्ल पक्ष,
- तिथि - 12:23 पी.एम तक पूर्णिमा फिर चैत्र माह प्रतिपदा
- पर्व-होली
- दिवस - शुक्रवार
- सूर्योदय - 06:38 ए.एम सूर्यास्त-6:27 पी.एम
- नक्षत्र-उत्तराफाल्गुनी
- चन्द्र राशि - सिंह, स्वामी ग्रह - सूर्य 12:57 पी.एम तक फिर कन्या राशि, स्वामी ग्रह-बुध
- सूर्य राशि - कुंभ, स्वामी ग्रह-शनि
- करण - बव 12:23 पी.एम तक फिर बालव
- योग - शूल 01:24 पी.एम तक फिर गण्ड
आज के शुभ मुहूर्त
- अभिजीत - 12:07 पी.एम से 12:55 पी.एम तक
- विजय मुहूर्त - 02:25 पी.एम से 03:25 पी.एम तक
- गोधुली मुहूर्त - 06:25 पी.एम से 07:21 पी.एम तक
- ब्रम्ह मुहूर्त - 4:03 ए.एम से 05:07 ए.एम तक
- अमृत काल - 06:03 ए.एम से 07:46 ए.एम तक
- निशीथ काल मुहूर्त - रात 11:42 पी.एम से 12:26 पी.एम रात
- संध्या पूजन - 06:26 पी.एम से 07:04 पी.एम तक
दिशा शूल - पश्चिम दिशा। इस दिशा में यात्रा से बचें। दिशाशूल के दिन उस दिशा की यात्रा करने से बचते हैं, यदि आवश्यक है तो एक दिन पहले प्रस्थान निकालकर फिर उसको लेकर यात्रा करें।
अशुभ मुहूर्त - राहुकाल - प्रातःकाल 10:30 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक
क्या करें - आज फाल्गुन माह शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि 12:24 बजे दोपहर तत्पश्चात होली है। फाल्गुन पूर्णिमा होलिका दहन के बाद अगले दिन होली चैत्र प्रतिपदा में मनाते हैं। आज नृसिंह भगवान की उपासना भी करते हैं। पूर्ण उमंग व तरंग से होली का सानन्द लें। मृदुल हृदय व निर्मल अंतःकरण में श्री हरि नाम का स्मरण आपके जीवन को धन्य कर देगा। प्रेम पूर्वक होली मनाएं। होली प्रेम व उमंग का पर्व है। प्रथम होली घर के मंदिर में भगवान के चरणों मे अबीर-गुलाल से आरंभ करना अच्छा होता है।
क्या न करें - किसी भी प्रकार का नशा मत करें।
