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हरियाली अमावस्या अगस्त में कब है, क्यों मनाया जाता है यह पर्व और इस दिन आपको क्या करना चाहिए

Hariyali Amavasya kab hai, kyon manate hain: हरियाली अमावस्या 2026 कब है अगस्त में। जानें अगस्त की अमावस्या तिथि कब पड़ेगी, हरियाली अमावस्या क्यों मनाई जाती है और अमावस्या पर आपको पीपल के नीचे कितने दीपक जलाने चाहिए।

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हरियाली अमावस्या क्यों मनाते हैं, क्या है महत्व व संदेश

Hariyali Amavasya kab hai, kyon manate hain: सावन की बारिश के बाद जब पेड़-पौधों पर नई पत्तियां आने लगती हैं और चारों ओर हरियाली दिखाई देती है, तब हरियाली अमावस्या मनाई जाती है। यह दिन पूजा-पाठ के साथ प्रकृति के प्रति आभार जताने का भी अवसर है। इस अमावस्या पर भगवान शिव की पूजा, पितरों का स्मरण, जरूरतमंदों को दान और पौधारोपण करने की परंपरा है।

कई परिवारों में शाम के समय पीपल के नीचे दीपक भी जलाया जाता है। हालांकि लोगों के मन में इसे लेकर कई सवाल रहते हैं। दीपक कितने जलाएं, किस दिशा में रखें और पूजा के बाद क्या करें? आइए इन बातों को आसान भाषा में समझते हैं।

अगस्त में हरियाली अमावस्या कब है 2026

साल 2026 में हरियाली अमावस्या 12 अगस्त, बुधवार को मनाई जाएगी। दृक पंचांग पर दी गई जानकारी के अनुसार, अमावस्या तिथि सूर्योदय के समय मौजूद रहेगी, इसलिए पूजा, स्नान, दान और पितरों से जुड़े धार्मिक कार्य 12 अगस्त को ही किए जाएंगे। ध्यान दें कि यहां दिए गए समय नई दिल्ली के अनुसार हैं।

हरियाली अमावस्या 2026तारीख और समय
हरियाली अमावस्या12 अगस्त 2026, बुधवार
अमावस्या तिथि प्रारंभ12 अगस्त को रात 1:52 बजे
अमावस्या तिथि समाप्त12 अगस्त को रात 11:06 बजे
पूजा, स्नान और दान12 अगस्त को

अलग-अलग शहरों में पंचांग के समय में एक-दो मिनट का अंतर हो सकता है।

हरियाली अमावस्या क्यों मनाई जाती है

श्रावण मास की अमावस्या को हरियाली अमावस्या कहा जाता है। सावन तक मानसून अपने रंग में आ चुका होता है। खेतों में फसलें बढ़ने लगती हैं और सूखे दिखाई देने वाले पेड़ भी दोबारा हरे हो जाते हैं। इसलिए यह पर्व जीवन, वर्षा और प्रकृति के बीच के संबंध को याद दिलाता है।

धार्मिक मान्यता में सावन भगवान शिव का प्रिय महीना है। इस कारण हरियाली अमावस्या पर शिवलिंग का जलाभिषेक किया जाता है। अमावस्या पितरों के स्मरण की तिथि भी मानी गई है। लोग अपने परिवार की परंपरा के अनुसार तर्पण, भोजन दान या पितरों के नाम से जरूरतमंदों की सहायता करते हैं।

हरियाली अमावस्या पर क्या करें

दिन की शुरुआत स्नान के बाद सूर्य देव को जल चढ़ाकर की जा सकती है। इसके बाद घर के मंदिर में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें। शिवलिंग पर जल, बेलपत्र और सफेद फूल अर्पित किए जा सकते हैं।

इस दिन अपनी क्षमता के अनुसार ये काम कर सकते हैं:

  • पीपल, नीम, बरगद, आंवला या बेल का पौधा लगाएं।
  • पितरों को याद करते हुए जल अर्पित करें।
  • किसी जरूरतमंद को भोजन, कपड़े या अनाज दें।
  • गाय या पक्षियों के लिए भोजन और पानी रखें।
  • शिव मंदिर में जलाभिषेक करें।
  • घर और आसपास लगे पौधों की सफाई एवं देखभाल करें।
  • प्लास्टिक या सजावटी सामग्री की जगह प्राकृतिक चीजों से पूजा करें।

यदि परिवार में पितृ तर्पण की कोई विशेष विधि चली आ रही है तो उसी परंपरा को प्राथमिकता दें। विधिवत श्राद्ध या तर्पण के लिए जानकार पुरोहित का मार्गदर्शन लिया जा सकता है।

हरियाली अमावस्या पर पीपल के नीचे कितने दीपक जलाएं

धार्मिक परंपराओं में अमावस पर पीपल के नीचे दीपक जलाने की कोई एक अनिवार्य संख्या तय नहीं है। श्रद्धा से जलाया गया एक दीपक भी पर्याप्त माना जाता है। कुछ लोग अपनी पारिवारिक मान्यता के अनुसार 5, 7 या 11 दीपक जलाते हैं, लेकिन इसे जरूरी नियम न समझें।

यदि पितरों के निमित्त दीपक जला रहे हैं तो सरसों के तेल का एक दीपक रखा जा सकता है। भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की भावना से पूजा करने वाले लोग घी का दीपक भी जलाते हैं।

पीपल का दीपक कहां और कैसे रखें

सूर्यास्त के बाद पीपल के पेड़ के पास साफ और समतल स्थान पर दीपक रखें। दीपक को पेड़ के तने से थोड़ा दूर रखना बेहतर है। इसे सूखे पत्तों, घास या जड़ों के बिल्कुल पास न रखें, क्योंकि आग लगने का डर रहता है।

दीपक जलाने के बाद जल अर्पित करें और हाथ जोड़कर अपने पितरों को याद कर सकते हैं। इसके बाद सुरक्षित दूरी से पीपल की परिक्रमा करें। सामान्य रूप से 3, 5 या 7 परिक्रमा की जाती है।

परिक्रमा करते समय पेड़ पर धागा बहुत कसकर न बांधें। पेड़ में कील ठोकना, प्लास्टिक छोड़ना या तेल सीधे जड़ों पर उड़ेलना भी ठीक नहीं है। दीपक बुझ जाने के बाद उसकी सामग्री वहां बिखरी न छोड़ें।

पीपल की पूजा के बाद क्या करें

पीपल के नीचे कुछ देर शांत बैठकर भगवान शिव या विष्णु का ध्यान किया जा सकता है। ‘ॐ नमः शिवाय’ या ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें। पितरों के लिए प्रार्थना करते हुए परिवार की सुख-शांति की कामना करें।

हरियाली अमावस्या का संदेश क्या है

हरियाली अमावस्या का संदेश है कि पूर्वजों के प्रति सम्मान रखें और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रकृति को सुरक्षित बनाएं। इसलिए इस दिन केवल दीपक जलाना ही नहीं, किसी पौधे को जीवन देना भी पूजा का सुंदर रूप हो सकता है।

Medha Chawla
मेधा चावलाauthor

मेधा चावला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर एसोसिएट एडिटर हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन की लीड हैं। लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 20 वर्षों का अनुभव रखने वाली मेधा की विशेषज्ञता हेल्थ, वेलनेस, फिटनेस, मेंटल हेल्थ, डेली लाइफ इम्प्रूवमेंट, ह्यूमन-इंटरेस्ट फीचर्स और रिसर्च-बेस्ड स्टोरीज तक फैली है। उनकी लेखन शैली पाठकों को जटिल स्वास्थ्य और जीवनशैली संबंधी विषयों को आसान, समझने योग्य और व्यवहारिक रूप में प्रस्तुत करती है, जिससे उनका कंटेंट व्यापक पाठक समूह से जुड़ता है। अबतक 30,000 से अधिक कंटेंट पीस लिख चुकी मेधा की कई एक्सक्लूसिव स्टोरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ट्रेंड सेट कर चुकी हैं।

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