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Hal Chhath Maiya Ki Aarti, Photo: जय षष्ठी माते जय हलषष्ठी माते...हल छठ माता की आरती और फोटो

Hal Chhath Mata Aarti, Photo: हरछठ का पर्व अमूमन जन्माष्टमी से दो दिन पहले मनाते हैं। इससे ललही छठ, हल छठ, चंदन छठ आदि नामों से जाना जाता है। यहां आप देखेंगे हरछठ माता की फोटो, आरती और कथा।

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Har Chhath Maiya Ki Aarti

Hal Chhath Mata Ki Aarti, Photo: हल छठ का त्योहार भादो कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भगवान कृष्ण के बड़े भाई बलराम जी का जन्म हुआ था। सनातन धर्म में इस व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। ये व्रत महिलाएं अपनी संतान की लंबी आयु और खुशहाल जीवन की कामना से रखती हैं। इस दिन हरछठ माता की पूजा की जाती है। यहां देखें हर छठ माता की आरती और फोटो।

हल छठ माता की आरती (Hal Chhath Mata Ki Aarti)

जय षष्ठी माते जय हलषष्ठी माते।

नीराजनममरैर्कृतमाधात्रे जाते॥ जय हल…

करुणामयि गुणशीले तिथिशीलेऽभयदे।

वचसातीतमहिम्ने वात्सल्येऽऽनन्दे॥ जय हल…

कंसभगिन्या पूज्ये चन्द्रललितसुतदे।

वंशकरे प्रभुरिवगुणयुक्तवत्सकप्रदे॥ जय हल…

वैदर्भ्याऽपि सुपूज्ये नष्टपुत्रदात्रे।

श्रीखण्डप्रसवाङ्गे वरुणामोदकरे॥ जय हल…

क्रीडनकेन भवाब्धे पूज्ये सौख्यवरे।

अम्बुयुक्तचीरैरजिरेऽजरवज्रकरे॥ जय हल…

महिषीदुग्धप्रभाऽऽर्चे वरदे धर्मधरे।

कृष्णाग्रजगुणयुक्ते शुभ्रे कृष्णप्रिये॥ जय हल…

वरुणेनादियुगेऽस्मिन् हरिश्चद्रकुलदे।

स्वानन्दे प्रामीत्योऋणत्रिशङ्कुजनने॥ जय हल…

गायन्तीति मनुष्याः तीरे चाम्बुवरे।

काले दोषविमुक्ता वरुणानन्दमये॥ जय हल…

Hal Chhath Mata photo

Har Chhath mata Photo

Har Chhath mata Photo

हल छठ व्रत रखने के फायदे

मान्यताओं अनुसार जो माताएं हर छठ का व्रत रखती हैं उनकी संतान को लंबी आयु प्राप्त होती है। साथ ही संतान के जीवन में सदैव खुशहाली बनी रहती है। ये व्रत ज्यादातर जगह पुत्रों के लिए रखा जाता है। इस व्रत को करने से सौभाग्य बढ़ता है और जीवन में सदैव सुख-समृद्धि बनी रहती है।

Laveena Sharma
लवीना शर्माauthor

धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर की रहने वाली हूं। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट हूं। 10 साल से मीडिया में काम कर रही हूं। पत्रकारिता में करियर की शुरुआत न्यूज 24 से हुई। इसके बाद तमाम चैनलों में काम किया। जहां स्क्रिप्ट राइटिंग, एडिटिंग और एंकरिंग का अनुभव हासिल हुआ। रफ्तार यहीं नहीं रूकी अब चाह थी कुछ नया करने की जिसके लिए मैंने डिजिटल मीडिया में स्विच किया और मैं जनसत्ता से जुड़ गई। जनसत्ता में मैंने अध्यात्म सेक्शन लीड किया। इसके बाद पत्रिका में सेवाएं दी और अब timesnowhindi.com से जु़ड़ी हूं। यहां भी मैं अध्यात्म सेक्शन में कार्यरत हूं। भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और ज्योतिष शास्त्र में मेरा शुरू से ही लगाव रहा है। मेरी कोशिश रहती है कि मैं ऐसा कंटेट लिखूं जिससे बड़े बुजुर्ग ही नहीं बल्कि आज के युवा भी कनेक्ट कर सकें।

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