Guru Purnima Aarti Lyrics In Hindi: आरती श्रद्धा पूर्ण पूजा को दिखाने का ही एक तरीका है जिसमें हम अपने पूजनीश् का गुणगान करते हैं। गुरु पूर्णिमा की पूजा में भी आरती का एक महत्वपूर्ण स्थान है। गुरु पूर्णिमा की आरती, जय गुरुदेव अमल अविनाशी... है। इस आरती के माध्यम से हम अपने गुरुओं को नमन करते हैं और उनको हमारे जीवन को सही दिशा देने के लिए धन्यवाद करते हैं। यहां देखें गुरु पूर्णिमा की आरती जय गुरुदेव अमल अविनाशी के हिंदी लिरिक्स लिखित में।
गुरु पूर्णिमा की आरती लिरिक्स हिंदी में
जय गुरुदेव अमल अविनाशी, ज्ञानरूप अन्तर के वासी,
पग पग पर देते प्रकाश, जैसे किरणें दिनकर कीं। आरती करूं गुरुवर की॥
जब से शरण तुम्हारी आए, अमृत से मीठे फल पाए,
शरण तुम्हारी क्या है छाया, कल्पवृक्ष तरुवर की। आरती करूं गुरुवर की॥
ब्रह्मज्ञान के पूर्ण प्रकाशक, योगज्ञान के अटल प्रवर्तक।
जय गुरु चरण-सरोज मिटा दी, व्यथा हमारे उर की। आरती करूं गुरुवर की।
अंधकार से हमें निकाला, दिखलाया है अमर उजाला,
कब से जाने छान रहे थे, खाक सुनो दर-दर की। आरती करूं गुरुवर की॥
संशय मिटा विवेक कराया, भवसागर से पार लंघाया,
अमर प्रदीप जलाकर कर दी, निशा दूर इस तन की। आरती करूं गुरुवर की॥
भेदों बीच अभेद बताया, आवागमन विमुक्त कराया,
धन्य हुए हम पाकर धारा, ब्रह्मज्ञान निर्झर की। आरती करूं गुरुवर की॥
करो कृपा सद्गुरु जग-तारन, सत्पथ-दर्शक भ्रांति-निवारण,
जय हो नित्य ज्योति दिखलाने वाले लीलाधर की। आरती करूं गुरुवर की॥
आरती करूं सद्गुरु की, प्यारे गुरुवर की, आरती करूं गुरुवर की।
इस आरती को आप पूजा के बाद कर सकते हैं। ये आरती गुरु की महिमा दर्शाने का एक श्रद्धापूर्ण माध्यम है।
