Guru Purnima 2024 Shlok, Dohe And Quotes In Hindi (गुरु पूर्णिमा श्लोक): आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है जो इस साल 21 जुलाई को मनाई जाएगी। मान्यताओं अनुसार इस दिन महर्षि वेद व्यास जी का जन्म हुआ था। इसलिए इसे व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। यह पूर्णिमा हमारे जीवन में गुरुओं के महत्व को दर्शाती है जो हमें जीवन में सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। इस शुभ अवसर पर हम आपको बताने जा रहे हैं गुरु पूर्णिमा के संस्कृत श्लोक और कोट्स अर्थ सहित।
Guru Purnima Shlok (गुरु पूर्णिमा श्लोक)
1. गुरु ब्रह्मा गुरु विष्णु गुरु देवो महेश्वरा गुरु साक्षात परम ब्रह्मा तस्मै श्री गुरुवे नमः
अर्थ- गुरु देव तुल्य होते हैं, देवता के समान होते हैं।

Guru Purnima Shlok
2. देवद्विजगुरुप्राज्ञपूजनं शौचमार्जवम्।
ब्रह्मचर्यमहिंसा च शारीरं तप उच्यते।।
अर्थ- देवता, ब्राह्मण, गुरु और ज्ञानीजनों का पूजन, पवित्रता, सरलता, ब्रह्चर्य और अहिंसा-ये शरीर संबंधी तप कहलाते हैं। जो मनुष्य ज्ञान दे और ब्रह्म की ओर ले जाए उसे गुरु कहते हैं।
3. स्वर्गो धनं वा धान्यं वा विद्या पुत्राः सुखानि च ।
गुरु वृत्युनुरोधेन न किंचितदपि दुर्लभम् ।।
अर्थ- गुरुजनों की सेवा करने से स्वर्ग,धन-धान्य,विद्या,पुत्र,सुख आदि कुछ भी दुर्लभ नहीं है।
Guru Purnima Quotes In Hindi (गुरु पूर्णिमा कोट्स)
4. सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज।
अहं त्वा सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यिा माम शुचः ।।
अर्थ- सभी साधनों को छोड़कर केवल नारायण स्वरूप गुरु की शरणगत हो जाना चाहिए। वे उसके सभी पापों का नाश कर देंगे। शोक नहीं करना चाहिए।

Guru Purnima Quotes
5. बंदउँ गुरु पद कंज कृपा सिंधु नररूप हरि।
महामोह तम पुंज जासु बचन रबिकर निकर।।
अर्थ- गुरु मनुष्य रूप में नारायण ही हैं। मैं उनके चरण कमलों की वन्दना करता हूं। जैसे सूर्य के निकलने पर अन्धेरा नष्ट हो जाता है,वैसे ही उनके वचनों से मोहरूपी अन्धकार का नाश हो जाता है।
Guru Purnima Dohe In Hindi (गुरु पूर्णिमा के दोहे)
6. गुरु गोविन्द दोऊ खड़े,काके लागूं पांय।
बलिहारी गुरु अपने गोविन्द दियो बताय।।
अर्थ- गुरु और गोविन्द एक साथ खड़े हों तो किसे प्रणाम करना चाहिए –गुरु को अथवा गोविन्द को? ऐसी स्थिति में गुरु के श्रीचरणों में शीश झुकाना उत्तम है जिनके कृपा रूपी प्रसाद से गोविन्द का दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।

Guru Purnima Ke Dohe
7. गुरु बिनु भवनिधि तरइ न कोई।
जों बिरंचि संकर सम होई।।
अर्थ- भले ही कोई ब्रह्मा, शंकर के समान क्यों न हो, वह गुरु के बिना भव सागर पार नहीं कर सकता।
8. गुरु गोबिंद दोऊ खड़े, काके लागूं पांय।
बलिहारी गुरु आपने। गोबिंद दियो बताय॥
अर्थ- गुरु और गोविंद यानी कि भगवान, एक साथ खड़े हों तो किसे प्रणाम करना चाहिए – गुरु को अथवा गोविंद को? ऐसी स्थिति में गुरु के श्रीचरणों में शीश झुकाना उत्तम है जिनके कृपा रूपी प्रसाद से गोविन्द का दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
