Gupt Navratri 2026: गुप्त नवरात्रि का चौथा दिन आज, माता के किस स्वरूप का करें पूजन, जानिए पूजा विधि और शुभ मुहूर्त और लाभ
- Authored by: Mohit Tiwari
- Updated Jan 22, 2026, 07:13 AM IST
Gupt Navratri 2026: आज 22 जनवरी दिन गुरुवार को माघ माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि है। इस कारण आज गुप्त नवरात्रि का चौथा दिन है। इस दिन 10 महाविद्याओं में चौथी महाविद्या माता भुवनेश्वरी का पूजन किया जाता है। माना जाता है कि माता का पूजन मानसिक शांति, आत्मबल और आध्यात्मकि स्थिरता प्रदान करता है। आइए जानते हैं गुप्त नवरात्रि के चौथे दिन माता को प्रसन्न करने के लिए क्या उपाय किए जा सकते हैं?
गुप्त नवरात्रि का चौथा दिन
Gupt Navratri 2026: आज 22 जनवरी 2026 है और गुप्त नवरात्रि का चौथा दिन है। गुप्त नवरात्रि में देवी की गूढ़ और तांत्रिक साधना का विशेष महत्व माना जाता है। इन दिनों में की गई साधना से साधक को मानसिक शांति, आत्मबल और आध्यात्मिक स्थिरता प्राप्त होती है। गुप्त नवरात्रि के चौथे दिन मां भुवनेश्वरी की पूजा की जाती है।
मां भुवनेश्वरी का स्वरूप और महत्व
मां भुवनेश्वरी को सृष्टि की अधिष्ठात्री देवी माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, संपूर्ण ब्रह्मांड का संचालन उनकी शक्ति से होता है। वे दस महाविद्याओं में चौथे स्थान पर विराजमान हैं। मां भुवनेश्वरी की साधना विशेष रूप से मोक्ष प्राप्ति, दान-पुण्य के फल और चंद्रमा से जुड़े दोषों की शांति के लिए की जाती है। उनकी उपासना से मन स्थिर रहता है और मानसिक उलझनें धीरे-धीरे कम होती हैं।
मां भुवनेश्वरी की पूजा विधि
गुप्त नवरात्रि के चौथे दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को साफ करके लाल या पीले रंग का आसन बिछाएं। मां भुवनेश्वरी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। देवी को अक्षत, लाल फूल, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें। इसके बाद शांत मन से मां का ध्यान करें। पूजा के दौरान नियमित रूप से मंत्र जप करें और अंत में मां से सुख, शांति और आत्मबल की कामना करें।
मां भुवनेश्वरी का मंत्र
गुप्त नवरात्रि के चौथे दिन मां भुवनेश्वरी के इस मंत्र का जप किया जाता है। ‘ॐ ह्रीं भुवनेश्वर्यै नमः’ इस मंत्र का 108 बार जाप करें।
22 जनवरी 2026 पर पूजन के शुभ मुहूर्त
आज गुप्त नवरात्रि के चौथे दिन पूजा और साधना के लिए कई शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:27 से 6:20 बजे तक रहेगा, जबकि प्रातः संध्या का समय सुबह 5:53 से 7:14 बजे तक है। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:12 से 12:54 बजे तक रहेगा, जो पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
विजय मुहूर्त दोपहर 2:19 से 3:02 बजे तक रहेगा। इसके अलावा गोधूलि मुहूर्त शाम 5:49 से 6:16 बजे तक और सायाह्न संध्या शाम 5:52 से 7:12 बजे तक है। आज रवि योग सुबह 7:14 से दोपहर 2:27 बजे तक रहेगा, जिसमें की गई पूजा फलदायी मानी जाती है।
मां भुवनेश्वरी का स्वरूप, उत्पत्ति और पौराणिक मान्यता
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां भुवनेश्वरी को संपूर्ण सृष्टि की अधिष्ठात्री देवी माना गया है। कहा जाता है कि जब सृष्टि की रचना नहीं हुई थी और चारों ओर शून्य था, तब उसी शून्य से मां भुवनेश्वरी का प्राकट्य हुआ। वे उस शक्ति का स्वरूप हैं, जिससे आकाश, पृथ्वी, जल, अग्नि और वायु जैसे पंचतत्वों की उत्पत्ति हुई। इसी कारण उन्हें भुवनों की स्वामिनी यानी तीनों लोकों का संचालन करने वाली देवी कहा जाता है।
मां भुवनेश्वरी का स्वरूप अत्यंत शांत, सौम्य और तेजस्वी माना गया है। उनका वर्ण सुनहरा है और वे चंद्रमा की तरह शीतल प्रभाव देने वाली देवी हैं। मान्यता है कि वे लाल वस्त्र धारण करती हैं और उनके नेत्र करुणा व ममता से भरे होते हैं। मां का यह स्वरूप दर्शाता है कि वे सृष्टि को धारण करने वाली, पालन करने वाली और संतुलन बनाए रखने वाली शक्ति हैं।
शास्त्रों के अनुसार मां भुवनेश्वरी दस महाविद्याओं में चौथे स्थान पर विराजमान हैं। वे आदि शक्ति के उसी स्वरूप से प्रकट हुई हैं, जिससे ब्रह्मांड का विस्तार हुआ। यही कारण है कि उन्हें ज्ञान, विवेक और चेतना की देवी माना जाता है। उनकी साधना से व्यक्ति के भीतर छिपी हुई नकारात्मकता धीरे-धीरे समाप्त होने लगती है और मन स्थिर होता है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार मां भुवनेश्वरी की उपासना विशेष रूप से चंद्रमा से जुड़े दोषों, मानसिक अशांति और भावनात्मक असंतुलन को दूर करने के लिए की जाती है। कहा जाता है कि चंद्रमा मन का कारक है और मां भुवनेश्वरी की कृपा से मन को शांति और स्थिरता प्राप्त होती है। इसी कारण गुप्त नवरात्रि में उनकी साधना को अत्यंत प्रभावशाली माना गया है।
मां भुवनेश्वरी को मोक्ष देने वाली देवी भी माना गया है। उनकी आराधना से व्यक्ति सांसारिक मोह से धीरे-धीरे ऊपर उठता है और आत्मिक शुद्धता की ओर बढ़ता है। यही वजह है कि गुप्त नवरात्रि के चौथे दिन मां भुवनेश्वरी की पूजा और साधना का विशेष महत्व बताया गया है।
मां भुवनेश्वरी की पूजा से मिलने वाले लाभ
मां भुवनेश्वरी की उपासना करने से साधक को मानसिक शांति और आत्मबल की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही धन, सुख, वैभव और सभी सिद्धियों की प्राप्ति, व्यक्तित्व में आकर्षण, साहस और आत्मविश्वास में वृद्धि, रोगों, शत्रुओं और नकारात्मक प्रभावों से रक्षा, मोक्ष और जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति होती है।
चंद्रमा से जुड़े दोष, जैसे मानसिक तनाव और भावनात्मक असंतुलन, धीरे-धीरे कम होते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां की साधना से दान-पुण्य का फल प्राप्त होता है और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है। गुप्त नवरात्रि में की गई यह साधना साधक को भीतर से मजबूत बनाती है।
डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी शास्त्रों पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।