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Govatsa Dwadashi 2026 Date: गोवत्स द्वादशी 2026 में कब है, जानें गाय और बछड़े की पूजा किस तारीख को होगी

Govatsa Dwadashi 2026 Date: गोवत्स द्वादशी 2026 में कब है। जानें धनतेरस से एक दिन पहले मनाए जाने वाले इस पर्व की सही तारीख, पूजा का शुभ मुहूर्त, धार्मिक महत्व। क्या हैं गोवत्स द्वादशी व्रत के नियम और इस दिन क्या खाएं और क्या नहीं।

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गोवत्स द्वादशी 2026 की डेट क्या है (AI Image)

Govatsa Dwadashi 2026 Date: दिवाली का त्योहार सिर्फ घरों को रोशन करने और खुशियां मनाने का अवसर नहीं है। यह पर्व प्रकृति, पशुओं और परिवार के प्रति आभार जताने का भी संदेश देता है। दिवाली से पहले आने वाली गोवत्स द्वादशी ऐसा ही एक खास त्योहार है। इस दिन गाय और बछड़े की पूजा की जाती है। हिंदू धर्म में गाय को माता का दर्जा दिया गया है। इसलिए गोवत्स द्वादशी पर उनकी सेवा और पूजा का विशेष महत्व है।

मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से गाय और बछड़े की पूजा करने से परिवार में सुख-समृद्धि आती है। संतान की लंबी उम्र और खुशहाल जीवन के लिए भी महिलाएं यह व्रत रखती हैं। आइए जानते हैं कि साल 2026 में गोवत्स द्वादशी कब है, पूजा का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा और इस दिन किन नियमों का पालन करना चाहिए।

गोवत्स द्वादशी 2026 में कब है

साल 2026 में गोवत्स द्वादशी का पर्व 5 नवंबर, गुरुवार को मनाया जाएगा। यह त्योहार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि को आता है। इसे दिवाली की तैयारियों से जुड़े प्रमुख पर्वों में गिना जाता है। गोवत्स द्वादशी को कई जगह नंदिनी व्रत के नाम से भी जाना जाता है।

गोवत्स द्वादशी 2026 पूजा का शुभ मुहूर्त

गोवत्स द्वादशी पर प्रदोष काल में पूजा करना शुभ माना जाता है। साल 2026 में पूजा के लिए मुहूर्त इस प्रकार रहेगा

  • गोवत्स द्वादशी 2026 डेट: 5 नवंबर 2026, गुरुवार
  • गोवत्स द्वादशी 2026 प्रदोषकाल पूजा मुहूर्त: शाम 5:33 बजे से रात 8:09 बजे तक
  • गोवत्स द्वादशी 2026 पूजा की कुल अवधि: 2 घंटे 37 मिनट
  • कार्तिक कृष्ण द्वादशी तिथि प्रारंभ: 5 नवंबर 2026 को सुबह 10:35 बजे
  • कार्तिक कृष्ण द्वादशी तिथि समाप्त: 6 नवंबर 2026 को सुबह 10:30 बजे

गोवत्स द्वादशी पर क्यों की जाती है गाय और बछड़े की पूजा

हिंदू धर्म में गाय को केवल एक पशु नहीं, बल्कि पूजनीय माता माना गया है। गाय से मिलने वाला दूध और उससे बनने वाले उत्पाद हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा हैं। धार्मिक मान्यताओं में गाय को देवी-देवताओं का निवास स्थान भी बताया गया है।

गोवत्स द्वादशी पर गाय के साथ उसके बछड़े की पूजा करने की परंपरा है। इस दिन महिलाएं गाय और बछड़े को तिलक लगाती हैं। उन्हें फूलों की माला पहनाई जाती है और भोजन कराया जाता है। पूजा के दौरान परिवार की खुशहाली और संतान की लंबी उम्र की कामना की जाती है।

गोवत्स द्वादशी को नंदिनी व्रत क्यों कहते हैं

गोवत्स द्वादशी को नंदिनी व्रत के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नंदिनी एक दिव्य गाय हैं। उनका संबंध ऋषि वशिष्ठ से बताया जाता है। पौराणिक कथाओं में नंदिनी को कामधेनु की पुत्री माना गया है।

मान्यता है कि नंदिनी की पूजा करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। इसी वजह से इस दिन गाय की पूजा को विशेष फलदायी माना जाता है।

गोवत्स द्वादशी पर क्या खाते हैं और क्या नहीं

गोवत्स द्वादशी के व्रत में खानपान से जुड़े कुछ खास नियम माने जाते हैं। परंपरा के अनुसार इस दिन व्रत रखने वाले लोग गेहूं और दूध से बनी चीजों का सेवन नहीं करते हैं।

  • इस दिन गेहूं से बनी रोटी, पूरी और अन्य खाद्य पदार्थ नहीं खाए जाते।
  • दूध और दूध से बने उत्पादों से परहेज किया जाता है।
  • पूजा के बाद गाय और बछड़े को गेहूं से बने खाद्य पदार्थ खिलाने की परंपरा है।
  • व्रत रखने वाले लोग अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार फलाहार कर सकते हैं।

गोवत्स द्वादशी और वसु बारस में क्या अंतर है

गोवत्स द्वादशी को भारत के अलग-अलग हिस्सों में अलग नामों से मनाया जाता है। महाराष्ट्र में इसे वसु बारस कहा जाता है। वहां इस पर्व को दिवाली उत्सव की शुरुआत से जोड़कर देखा जाता है।

इस दिन भी गाय और बछड़े की पूजा की जाती है। महिलाएं अपने परिवार की खुशहाली की कामना करती हैं। वहीं, उत्तर भारत के कुछ क्षेत्रों में इसी तरह की पूजा और परंपरा बछ बारस के अवसर पर निभाई जाती है। हालांकि बछ बारस और गोवत्स द्वादशी अलग-अलग तिथियों पर मनाए जाने वाले पर्व हैं।

गोवत्स द्वादशी का धार्मिक महत्व क्या है

गोवत्स द्वादशी का महत्व सिर्फ व्रत और पूजा तक सीमित नहीं है। यह त्योहार हमें गाय और बछड़े के प्रति प्रेम, दया और सेवा का भाव रखने की प्रेरणा देता है। इस दिन की पूजा में संतान की खुशहाली, परिवार की उन्नति और घर में सुख-शांति की कामना की जाती है।

Medha Chawla
मेधा चावलाauthor

मेधा चावला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर एसोसिएट एडिटर हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन की लीड हैं। लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 20 वर्षों का अनुभव रखने वाली मेधा की विशेषज्ञता हेल्थ, वेलनेस, फिटनेस, मेंटल हेल्थ, डेली लाइफ इम्प्रूवमेंट, ह्यूमन-इंटरेस्ट फीचर्स और रिसर्च-बेस्ड स्टोरीज तक फैली है। उनकी लेखन शैली पाठकों को जटिल स्वास्थ्य और जीवनशैली संबंधी विषयों को आसान, समझने योग्य और व्यवहारिक रूप में प्रस्तुत करती है, जिससे उनका कंटेंट व्यापक पाठक समूह से जुड़ता है। अबतक 30,000 से अधिक कंटेंट पीस लिख चुकी मेधा की कई एक्सक्लूसिव स्टोरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ट्रेंड सेट कर चुकी हैं।

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