दिल्ली : साइबर अपराधियों और उन्हें मदद पहुंचाने वाले नेटवर्क के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने अब तक के बड़े अभियानों में से एक कार्रवाई करते हुए CyHawk 6.0 ऑपरेशन चलाया। दो दिनों तक चले इस देशव्यापी अभियान में दिल्ली पुलिस ने 1,732 आरोपियों को गिरफ्तार किया। दिल्ली पुलिस के सभी जिलों, क्राइम ब्रांच और IFSO यूनिट की 283 टीमों ने 17 राज्यों और 5 केंद्र शासित प्रदेशों में एक साथ छापेमारी की।
इस अभियान के दौरान 536 नई FIR दर्ज की गईं, जबकि पहले से दर्ज मामलों को मिलाकर कुल 1,632 मामलों में कार्रवाई की गई। इसके अलावा साइबर फ्रॉड से जुड़ी 4,002 शिकायतों पर भी पुलिस ने कार्रवाई की। जांच के दायरे में करीब 479 करोड़ रुपये की चेक अमाउंट से जुड़े मामले भी शामिल रहे। इस ऑपरेशन में बैंकिंग सिस्टम से जुड़े लोगों की भूमिका भी सामने आई। एक बैंक मैनेजर और चार बैंक एजेंटों को कथित तौर पर साइबर ठगी में मदद करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया।
साइबर ठगी करने वालों के साथ मददगारों पर भी शिकंजा
दिल्ली पुलिस का यह अभियान सिर्फ साइबर ठगी करने वालों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं था। पुलिस ने इस बार उन सभी लोगों और नेटवर्क को निशाना बनाया, जो साइबर अपराधियों को ठगी के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध कराते हैं। जांच में सामने आया कि साइबर ठगी का नेटवर्क कई स्तरों पर काम करता है। इसमें फर्जी दस्तावेजों या कमीशन के लालच में बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले लोग, सिम कार्ड सप्लायर, POS एजेंट, बैंकिंग सिस्टम से जुड़े संदिग्ध लोग, सिम बॉक्स संचालक और अवैध कॉल सेंटर चलाने वाले गिरोह शामिल हैं।
पुलिस ने ऐसे लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की। साथ ही फर्जी मोबाइल ऐप और गेमिंग ऐप के जरिए लोगों को ठगने वाले नेटवर्क को भी जांच के दायरे में लिया गया।
बैंक मैनेजर और चार एजेंट भी गिरफ्तार
साइबर ठगी में म्यूल बैंक अकाउंट यानी ऐसे बैंक खातों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता है, जिनके जरिए ठगी की रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किया जाता है। कई लोग कमीशन के लालच में अपने बैंक खाते साइबर अपराधियों को उपलब्ध करा देते हैं।
पुलिस की जांच में बैंक खाते खोलने और उन्हें साइबर अपराधियों तक पहुंचाने वाले नेटवर्क की भूमिका भी सामने आई। इसी कड़ी में एक जिले की पुलिस टीम ने एक बैंक मैनेजर और चार बैंक एजेंटों को गिरफ्तार किया। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन लोगों ने कितने बैंक खाते खुलवाए और उनके जरिए कितनी रकम का लेन-देन किया गया।
NCRP के डेटा से तैयार किए गए साइबर ठगी के हॉटस्पॉट
इस बड़े ऑपरेशन की तैयारी कई दिनों तक चली। दिल्ली पुलिस ने नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर दर्ज शिकायतों का विश्लेषण किया। इसके आधार पर उन इलाकों की पहचान की गई, जहां से सबसे ज्यादा साइबर ठगी की शिकायतें सामने आ रही थीं।
इन हॉटस्पॉट में फर्जी कॉल सेंटर, अवैध सिम कार्ड नेटवर्क और साइबर ठगी के लिए इस्तेमाल होने वाले दूसरे ठिकानों की पहचान की गई। पुलिस ने एक ही दस्तावेज पर कई सिम कार्ड जारी करने, सिम कार्ड की अवैध खरीद-फरोख्त और POS एजेंटों की भूमिका की भी जांच की।
इसके अलावा सिम बॉक्स के जरिए अंतरराष्ट्रीय या फर्जी कॉल करने वाले नेटवर्क और लोगों को फिशिंग मैसेज भेजकर ठगी करने वाले आरोपियों पर भी शिकंजा कसा गया।
बैंक खातों से लेकर क्रिप्टोकरेंसी तक फैला था नेटवर्क
जांच में यह भी सामने आया कि साइबर ठगी से मिलने वाली रकम को ठिकाने लगाने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाए जाते हैं। ठगी की रकम को बैंक खातों के जरिए आगे ट्रांसफर करने के अलावा चेक, ATM और क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से भी निकालने या दूसरी जगह भेजने का काम किया जाता है।
इस पूरी प्रक्रिया में अलग-अलग लोग अपनी भूमिका निभाते हैं। कोई बैंक खाता उपलब्ध कराता है, कोई रकम निकालता है, तो कोई उसे दूसरे खातों या डिजिटल माध्यमों से आगे भेजता है। दिल्ली पुलिस ने इस बार ऐसे पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़कर कार्रवाई की।
I4C और NCRB के इनपुट से बना ऑपरेशन का प्लान
CyHawk 6.0 को डेटा और तकनीकी इनपुट के आधार पर तैयार किया गया था। इसके लिए गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाले इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) और NCRB के पोर्टल से मिले इनपुट का इस्तेमाल किया गया। बैंकिंग डेटा, NCRP पर दर्ज शिकायतों और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर संदिग्ध खातों, साइबर ठगी के हॉटस्पॉट और अपराधियों के नेटवर्क की पहचान की गई। इसके बाद दिल्ली पुलिस के अलग-अलग जिलों, क्राइम ब्रांच और IFSO की टीमों को जिम्मेदारी सौंपकर एक साथ कार्रवाई की गई।
CyHawk 5.0 के बाद अब 6.0, आगे भी जारी रहेगी कार्रवाई
दिल्ली पुलिस इससे पहले जून महीने में CyHawk 5.0 ऑपरेशन भी चला चुकी है। अधिकारियों के मुताबिक, CyHawk 6.0 के तहत दो दिन तक चली कार्रवाई भले ही पूरी हो गई हो, लेकिन जांच अभी जारी रहेगी। छापेमारी के दौरान मिले दस्तावेजों, बैंक खातों, मोबाइल फोन और दूसरे तकनीकी इनपुट के आधार पर आगे की जांच की जाएगी। पुलिस का मकसद केवल आरोपियों को गिरफ्तार करना नहीं, बल्कि साइबर ठगी के लिए इस्तेमाल होने वाले पूरे नेटवर्क और उसकी सप्लाई चेन को खत्म करना है।
CyHawk 6.0 ऑपरेशन: एक नजर में
- कुल गिरफ्तारियां- 1,732
- नई दर्ज FIR -536
- कुल मामले (पुरानी FIR सहित) 1,632
- साइबर फ्रॉड शिकायतें -4,002
- चेक अमाउंट करीब- 479 करोड़ रुपये
- Alert की टीमें- 283
- राज्यों में कार्रवाई -17
- केंद्र शासित प्रदेश- 5
- गिरफ्तार बैंक मैनेजर-1
- गिरफ्तार बैंक एजेंट-4
