Gayatri Jayanti 2025 Date, Time, Puja Vidhi, Katha, Aarti: गायत्री जयंती साल में दो बार मनाई जाती है। यह ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को और श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है। गायत्री जयंती आध्यात्मिक जागरण का पर्व, आत्मा की शुद्धि, विचारों की पवित्रता और आत्मबोध का दिन है। देवी गायत्री सभी वेदों की जननी हैं इसलिए इन्हें वेदमाता कहा गया है। गायत्री मंत्र का जप इस दिन विशेष फलदायी होता है। कहते हैं इस दिन उपवास, मंत्रजप, ध्यान और यज्ञ करने से जन्म-जन्मांतर के पाप मिटते हैं। यहां से आप जान सकते हैं कि सावन की गायत्री जयंती कब है, इसकी पूजा कैसे की जाती है, मंत्र, कथा और आरती भी यहां मौजूद है।
गायत्री जयंती 2025 में कब है? (Gayatri Jayanti 2025 Date)-
हर साल की तरह साल 2025 में भी दो बार गायत्री जंयती मनाई जा रही है। बात करें सावन के महीने की गायत्री जयंती की तो अगस्त में 9 अगस्त 2025 को गायत्री जयंती है।
गायत्री जयंती 2025 पूजन विधि (Gayatri Jayanti Puja Vidhi)-
- इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें।
- चौकी में देवी गायत्री की तस्वीर स्थापित करें।
- देवी गायत्री को तिलक लगाएं, फूल अर्पित करें।
- देवी गायत्री के समक्ष दीपक जलाएं और धूपबत्ती जलाएं।
- साथ में गायत्री मंत्र का जाप करें।
- देवी को फल, मिठाई और अन्य प्रसाद चढ़ाएं।
- ब्राह्मणों को भोजन कराएं और दान और दक्षिणा दें।
- प्रसाद को सभी लोगों में बांटे।
गायत्री मंत्र (Gayatri Jayanti Mantra)-
ॐ भूर्भुवः स्वः
तत्स॑वि॒तुर्वरे॑ण्यं॒
भर्गो॑ दे॒वस्य॑ धीमहि।
धियो॒ यो नः॑ प्रचो॒दया॑त्॥
गायत्री जयंती कथा (Gayatri Jayanti Katha)-
पौराणिक मान्यता के अनुसार, ब्रह्मा जी जब सृष्टि की रचना कर रहे थे, तब उन्हें यज्ञ की आवश्यकता पड़ी। यज्ञ के लिए एक पत्नी की जरूरत थी। उस समय देवी गायत्री ब्रह्मा जी की सहधर्मिणी के रूप में प्रकट हुईं।
एक अन्य कथा के अनुसार – महर्षि विश्वामित्र घोर तपस्या में लीन थे। उन्होंने इंद्र सहित देवताओं को भी अपनी तपस्या से विचलित कर दिया। तप से संतुष्ट होकर ब्रह्माजी ने उन्हें गायत्री मंत्र प्रदान किया। गायत्री मंत्र के उच्चारण से उन्हें दिव्य ज्ञान और ब्रह्मतेज की प्राप्ति हुई। इस दिन को ही गायत्री जयंती के रूप में मनाया जाता है।
गायत्री जयंती आरती (Gayatri Jayanti Aarti)-
।।गायत्री माता की आरती।।
जयति जय गायत्री माता,
जयति जय गायत्री माता ।
सत् मारग पर हमें चलाओ,
जो है सुखदाता ॥
॥ जयति जय गायत्री माता..॥
आदि शक्ति तुम अलख निरंजन जगपालक कर्त्री ।
दु:ख शोक, भय, क्लेश कलश दारिद्र दैन्य हत्री ॥
॥ जयति जय गायत्री माता..॥
ब्रह्म रूपिणी, प्रणात पालिन जगत धातृ अम्बे ।
भव भयहारी, जन-हितकारी, सुखदा जगदम्बे ॥
॥ जयति जय गायत्री माता..॥
भय हारिणी, भवतारिणी, अनघेअज आनन्द राशि ।
अविकारी, अखहरी, अविचलित, अमले, अविनाशी ॥
॥ जयति जय गायत्री माता..॥
कामधेनु सतचित आनन्द जय गंगा गीता ।
सविता की शाश्वती, शक्ति तुम सावित्री सीता ॥
॥ जयति जय गायत्री माता..॥
ऋग, यजु साम, अथर्व प्रणयनी, प्रणव महामहिमे ।
कुण्डलिनी सहस्त्र सुषुमन शोभा गुण गरिमे ॥
॥ जयति जय गायत्री माता..॥
स्वाहा, स्वधा, शची ब्रह्माणी राधा रुद्राणी ।
जय सतरूपा, वाणी, विद्या, कमला कल्याणी ॥
॥ जयति जय गायत्री माता..॥
जननी हम हैं दीन-हीन, दु:ख-दरिद्र के घेरे ।
यदपि कुटिल, कपटी कपूत तउ बालक हैं तेरे ॥
॥ जयति जय गायत्री माता..॥
स्नेहसनी करुणामय माता चरण शरण दीजै ।
विलख रहे हम शिशु सुत तेरे दया दृष्टि कीजै ॥
॥ जयति जय गायत्री माता..॥
काम, क्रोध, मद, लोभ, दम्भ, दुर्भाव द्वेष हरिये ।
शुद्ध बुद्धि निष्पाप हृदय मन को पवित्र करिये ॥
॥ जयति जय गायत्री माता..॥
जयति जय गायत्री माता,
जयति जय गायत्री माता ।
सत् मारग पर हमें चलाओ,
जो है सुखदाता ॥
