अध्यात्म

16 श्रृंगार से जुड़ी है पति की आयु और धन का लाभ, नोट करें गणगौर से 16 श्रृंगार की लिस्ट

Gangaur Ke 16 Shringar: कल यानी 21 मार्च को गणगौर की पूजा है। गणगौर की पूजा में 16 श्रृंगार का खास महत्व होता है। यहां से आप इन 16 श्रृंगार की पूरी लिस्ट देख सकते हैं और साथ ही इसके महत्व को भी समझ सकते हैं।

Image

गणगौर के 16 श्रृंगार लिस्ट (pc: pinterest)

Gangaur Ke 16 Shringar: गणगौर का त्योहार मां गौरी के प्रति श्रद्धा, प्रेम और समर्पण का प्रतीक है। इस पर्व में महिलाओं द्वारा किया जाने वाला सोलह श्रृंगार केवल बाहरी सजावट नहीं है, बल्कि यह उनके मन की आस्था, विश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का रूप होता है। सोलह श्रृंगार के माध्यम से स्त्री खुद को केवल सुंदर नहीं बनाती, बल्कि वह अपने अंदर की पवित्रता, धैर्य और प्रेम को भी संवारती है। हर एक श्रृंगार का अपना एक विशेष महत्व होता है, जो जीवन के अलग-अलग पहलुओं जैसे प्रेम, सौभाग्य, सुरक्षा और संतुलन को दर्शाता है। यह परंपरा हमें सिखाती है कि सच्ची सुंदरता केवल बाहरी रूप में नहीं, बल्कि हमारे विचारों और भावनाओं में भी होती है। इस आर्टिकल में हम गणगौर के सोलह श्रृंगार के महत्व को समझने का प्रयास करेंगे, ताकि हम इस परंपरा के पीछे छिपे आध्यात्मिक अर्थ को महसूस कर सकें और अपनी संस्कृति से और गहराई से जुड़ सकें।

गणगौर 16 श्रृंगार लिस्ट-

  1. सिंदूर
  2. बिंदिया
  3. मांग टीका
  4. काजल
  5. नथ
  6. मंगलसूत्र
  7. झुमके
  8. मेहंदी
  9. चूड़ियां
  10. गजरा
  11. बाजूबंद
  12. अंगूठी
  13. कमरबंद
  14. पायल
  15. बिछिया
  16. इत्र

गणगौर के 16 श्रृंगार का महत्व-

सिंदूर

सिंदूर मांग में भरा जाता है और यह शादीशुदा स्त्री की पहचान है। इसे पति की लंबी उम्र और रिश्ते की मजबूती से जोड़ा जाता है। धार्मिक रूप से इसे बहुत पवित्र माना जाता है और गणगौर में इसे खास महत्व दिया जाता है।

बिंदिया

बिंदिया महिलाओं के सुहागनों का प्रतीक है। अपनी दोनों भौंहो के बीच महिलाएं जब लाल कलर की बिंदी लगाती है उनमें अलग ही ऊर्जा का संचार होता है। स्वास्थ्य के लिहाज से भी बिंदी अच्छी मानी जाती है। यह आपके ध्यान को केंद्रीत करने में मदद करती है।

मांग टीका

मांग टीका न सिर्फ सुंदरता बढ़ाता है बल्कि यह भी माना जाता है कि यह मन और विचारों को संतुलित रखता है। मांग टीका इसलिए भी लगाया जाता है क्योंकि यह पति के लगाए गए सिंदूर की रक्षा करता है।

काजल

आम मान्यता है कि काजल बुरी नजर से बचाता है और आँखों की खूबसूरती को बढ़ाता है। पहले के समय में घर पर बना काजल ही इस्तेमाल होता था।

नथ

नाक में पहनी जाने वाली नथ स्त्री की पारंपरिक सुंदरता का अहम हिस्सा है। यह शादी और खास मौकों पर ही पहनी जाती है और इसे स्त्री की शान माना जाता है।

मंगलसूत्र

मंगलसूत्र शादीशुदा महिला के लिए बहुत खास होता है। यह पति-पत्नी के पवित्र बंधन का प्रतीक है और इसे हमेशा पहनना शुभ माना जाता है।

झुमके

कानों में पहने जाने वाले झुमके हर महिला की सुंदरता को और निखारते हैं। इनकी मधुर आवाज और डिजाइन पूरे श्रृंगार को पूरा करते हैं।

मेहंदी

मेहंदी लगाकर अक्सर महिलाएं उस रंग से तुलना करती है कि उनके पति उन्हें कितना प्यार करते हैं। जी हां, साथ ही यह भी कहा जाता है कि मेहंदी के बिना एक दुल्हन अधूरी होती है।

चूड़ियां

हाथों में पहनी जाने वाली चूड़ियां खुशहाली और खुशी का प्रतीक होती हैं। इनकी खनक घर में सकारात्मक माहौल बनाती है और यह सुहाग की निशानी भी मानी जाती हैं।

गजरा

बालों की सुंदरता को बढ़ाता है और इसकी महक एक-दूसरे को करीब लाती है। इसका महत्व और अधिक हो जाता है जब पति अपने हाथों से इसे अपनी पत्नी के बालों में लगाता है।

बाजूबंद

बाजू पर पहना जाने वाला बाजूबंद पुराने समय से ही रानी-महारानियों का आभूषण रहा है। यह शक्ति, सुंदरता और आत्मविश्वास को दर्शाता है।

अंगूठी

उंगली में पहनी जाने वाली अंगूठी रिश्ते की मजबूती और विश्वास का प्रतीक होती है। यह प्यार और जुड़ाव को दर्शाती है।

कमरबंद

कमर में पहना जाने वाला कमरबंद शरीर की सुंदरता को उभारता है। यह पारंपरिक नृत्य और त्योहारों में खास रूप से पहना जाता है।

पायल

पैरों में पहनी जाने वाली पायल की मधुर आवाज बहुत शुभ मानी जाती है। यह घर में सकारात्मक ऊर्जा लाती है और स्त्री की उपस्थिति को दर्शाती है।

बिछिया

बिछिया पैरों की उंगलियों में पहनी जाती है और यह शादीशुदा स्त्री की पहचान होती है। इसे पहनना धार्मिक और पारंपरिक दोनों रूप से महत्वपूर्ण है।

इत्र

इत्र शरीर पर लगाया जाता है, जिससे खुशबू आती है। यह मन को प्रसन्न करता है और आसपास के वातावरण को भी सकारात्मक बनाता है।

Srishti
सृष्टिauthor

सृष्टि टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की फीचर डेस्क से जुड़ी कंटेंट राइटर हैं, जो मुख्य रूप से धर्म और लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिखती हैं। सृष्टि को आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और साहित्य में गहरी रुचि है। यही वजह है कि उनके लेखों में परंपरा, आस्था और जीवनशैली की सहज समझ खूबसूरती से दिखाई देती है। वह धार्मिक कथाओं, ग्रंथों से जुड़े विषयों, आध्यात्मिक ट्रेंड्स और समकालीन जीवनशैली पर 5,000 से अधिक लेख लिख चुकी हैं। मॉडर्न लाइफस्टाइल और पारंपरिक मूल्यों के बीच संतुलन बनाते हुए वह ऐसे कंटेंट गढ़ती हैं, जो प्रेरक होने के साथ-साथ जानकारीपूर्ण भी होता है।

और पढ़ें
End of Article