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Gangaur 2024 Date: कब रखा जाएगा गणगौर का व्रत, यहां जानें डेट और महत्व

Gangaur 2024 Date: गणगौर का पर्व राजस्थान का एक लोक पर्व है। ये खासतौर पर वहीं मनाया जाता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं। ऐसे में आइए जानते हैं इस साल कब रखा जाएगा गणगौर का व्रत। यहां जानें डेट और महत्व।

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Gangaur Vrat

Gangaur 2024 Date (कब है गणगौर 2024): भारत में बहुत से तीज त्योहार मनाये जाते हैं। इन्हीं में से एक हैं गणगौर का पर्व। ये पर्व विशेषतौर पर राजस्थान में मनाया जाता है। गणगौर का व्रत माता पार्वती को समर्पित व्रत। ये व्रत महिलाओं द्वारा अपने पति की लंबी आयु के लिए किया जाता है। हालांकि इस व्रत को कुंवारी कन्या भी सुयोग वर की प्राप्ति के लिए करती हैं। गणगौर का व्रत हर साल चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के दिन मनाया जाता है। इस व्रत के दिन माता पार्वती की पूजा की जाती है। हम आपको बता दें कि इस पर्व की शुरुआत होली के अगले दिन से हो जाती है और चैत्र नवरात्रि के तीसरे दिन इस व्रत को रखने के साथ समाप्त होती है। इस दौरान 17 दिनों तक महिलाएं विधिवत माता पार्वती की पूजा करती हैं। ऐसे में आइए जानते हैं इस साल कब रखा जाएगा गणगौर का व्रत।

Gangaur 2024 Date (कब है गणगौर 2024)

गणगौर का व्रत हर साल चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के दिन रखा जाता है। ये चैत्र नवरात्रि का तीसरा दिन होता है। इस साल गणगौर का व्रत 11 अप्रैल 2024 को रखा जाएगा। इस दिन महिलाएं मिट्टी से शिव और पार्वती की मूर्ति बनाकर इनकी पूजा करती हैं। शिव को गण और पार्वती को गौर कहा जाता है, इसलिए इस व्रत का गणगौर है।

गणगौर व्रत 2024 शुभ मुहूर्त (Gangaur Vrat 2024 Shubh Muhurat)

इस साल चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि की शुरुआत 10 अप्रैल को शाम 05 बजकर 32 मिनट से हो रही है। वहीं इस तिथि का समापम 11 अप्रैल को दोपहर 3 बजे होगा। उदयातिथि के अनुसार ये व्रत 11 अप्रैल को रखा जाएगा। इस दिन प्रात:काल में सुबह 6 बजकर 29 मिनट से लेकर 8 बजकर 24 मिनट तक पूजा का शुभ मुहूर्त रहने वाला है। वहीं दोपहर 12:04 से 12:52 तक अभिजीत मुहूर्त रहेगा।

Gangaur Vrat Puja Vidhi (गणगौर व्रत पूजा विधि)

  • गणगौर व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नना आदि के बाद सोलह श्रृंगार कर लें।
  • उसके बाद माता पार्वती और शिव की मिट्टी से प्रतिमा बनाएं।
  • फिर उस प्रतिमा को साफ चौकी पर स्थापित कर दें।
  • उसके बाद माता पार्वती को अक्षत, रोली और चंदन अर्पित करें।
  • उसके बाद इस दिन आप माता पार्वती को श्रृंगार का सामान चढ़ा सकते हैं।
  • फिर माता को भोग लगाकर गणगौर माता की आरती गाएं।
  • इस दिन पूजा के समय लोकगीत गाने की भी परंपरा है।
  • अंत में भोग लगाकर सब में प्रसाद बांटे।

गणगौर व्रत महत्व (Gangaur Vrat Importance)

गणगौर का व्रत राजस्थान का एक लोक पर्व है। ये व्रत महिलाओं द्वारा अपने पति की लंबी उम्र के लिए किया जाता है। गणगौर शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है। इसमे गण का मतलब है शिव और गैर का अर्थ है पार्वती। इस व्रत के दिन माता पार्वती और शिव की मिट्टी से प्रतिमा बनाकर पूजा की जाती है। गणगौर का व्रत कुंवारी कन्याओं द्वारा भी अच्छे पति के लिए भी किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि गणगौर का व्रत रखने से महिलाओं को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है और सुख समृ्द्धि मिलती है।
TNN Spirituality Desk
TNN अध्यात्म डेस्क author

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